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नृसिंह जयंती आज: होलकर राजवंश की आस्था का केंद्र इंदौर का ये मंदिर, जंग के मैदान में प्रतिमा लेकर जाती थी सेना
Thu, 30 Apr 2026 10:17 AM IST
कमलेश सेन
इंदौर
इंदौर
Published by: कमलेश सेन
Updated Thu, 30 Apr 2026 10:17 AM IST
सार
इंदौर के ऐतिहासिक नरसिंह मंदिर का होलकर काल से गहरा संबंध रहा है। महाराजा यशवंत राव होलकर प्रथम द्वारा स्थापित इस मंदिर से न सिर्फ धार्मिक आस्था जुड़ी है, बल्कि युद्ध के समय सेना भी विजय की कामना लेकर यहां से भगवान की प्रतिमा साथ ले जाती थी।
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नरसिंह मंदिर का होलकर काल से गहरा संबंध।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मराठा शासकों के राज्य में प्रत्येक धर्म का सम्मान था। इसलिए इंदौर रियासत के होलकर राज्य में सभी धर्म के धर्म स्थल प्राचीन दौर से नगर में विद्यमान है। चूंकि, नगर में देवी, गणेश और शिव के मंदिर तो हैं पर अन्य देवताओं के भी मंदिर काफी प्राचीन हैं। लोधीपुरा, खजूरी बाजार, कृष्णपुरा और मोरसली गली के राम मंदिर व राजबाड़े के समीप बांके बिहारी और गोपाल मंदिर नगर के साथ ही कपड़ा मार्केट के समीप नरसिंह मंदिर प्राचीन मंदिरों की श्रेणी में हैं।
युद्ध के दौरान होलकर सेना मंदिर से नरसिंह भगवान की प्रतिमा साथ में लेकर जाती थी, ताकि युद्ध में उन्हें विजय मिले। युद्ध से आने के पश्चात मूर्ति मंदिर में पुनः यथा स्थान विराजित करवा दी जाती थी। माना जाता है कि नरसिंह भगवान की प्रतिमा तत्कालीन होलकर शासक महाराजा यशवंत राव होलकर प्रथम (कार्यकाल-1798-1811) द्वारा स्थापित करवाई गई थी।
इंदौर शहर के मध्य स्थित नरसिंह मंदिर के नाम से ही बाजार का नामकरण भी है। यह इलाका नरसिंह बाजार कहलाता है। महाराजा यशवंत राव होलकर प्रथम द्वारा 1807 में मंदिर के पुजारी बिरदी शर्मा को कुछ अधिकार पत्र सौंपे थे। रियासत के वक्त मंदिर के आसपास अनाज मंडी का क्षेत्र था, होलकर राजा दशहरे मैदान के लिए जाते वक्त भगवान नरसिंह के दर्शन करते हुए दशहरे मैदान जाते थे साथ ही राजपरिवार के सदस्य भी मंदिर दर्शन के लिए आते थे।
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इसलिए कहलाता था लश्करी मंदिर
रियासत काल में नरसिंह मंदिर लश्करी मंदिर के नाम से यह मंदिर जाना जाता था। लश्करी मूलतः फारसी शब्द है, जिसका अभिप्राय सेना, फौज से जुड़ा है ऐसी मान्यता है कि होलकर राजा युद्ध के दौरान अपने साथ कुलदेवता के साथ भगवान नरसिंह की प्रतिमा भी ले जाते थे, सेना की यह यह मान्यता थी कि रण क्षेत्र में विजय होने के लिए भगवान नरसिंह का साथ जरूरी है। गोराकुंड पर दिगंबर लश्करी जैन मंदिर भी प्रसिद्ध है। वहां भी होलकर सेना दर्शन के लिए जाया करती थी।
कौन हैं नृसिंह भगवान?
नृसिंह भगवान विष्णु के अवतारों में से एक हैं। उनकी वैशाख शुक्ल पक्ष की चौदस को जयंती मनाई जाती है। भगवान नृसिंह का शरीर मनुष्य का और मुख सिंह का है। ऐसा माना जाता है कि भगवान नृसिंह विपत्ति और मुसीबत में मदद करते हैं।
ये भी पढ़ें- Indore Water Crisis: दुकानें बंद कर टंकियों पर उमड़ी भीड़, तीन किमी दूर से ला रहे पानी; आधे शहर में त्राहिमाम
शाम को निकलेगी यात्रा
नृसिंह जयंती पर इंदौर के विभिन्न नृसिंह मंदिरों में भव्य कार्यक्रम आयोजित होते हैं। इस प्राचीन नृसिंह मंदिर में तीन दिवसीय उत्सव आयोजित किया गया है। भगवान का नौका विहार, भजन संध्या भी आयोजित होती है। मुख्य आयोजन का समापन गुरुवार को होगा। सुबह पूजन और संध्या को नरसिंह भगवान का मुखौटा धारण कर निकाली जाने वाली यात्रा, आकर्षण का केंद्र रहती है। नरहरि नंदलाल भजो, नरसिंह गोपाल के उद्घोष से क्षेत्र गुंजायमान रहेगा।
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युद्ध के दौरान होलकर सेना मंदिर से नरसिंह भगवान की प्रतिमा साथ में लेकर जाती थी, ताकि युद्ध में उन्हें विजय मिले। युद्ध से आने के पश्चात मूर्ति मंदिर में पुनः यथा स्थान विराजित करवा दी जाती थी। माना जाता है कि नरसिंह भगवान की प्रतिमा तत्कालीन होलकर शासक महाराजा यशवंत राव होलकर प्रथम (कार्यकाल-1798-1811) द्वारा स्थापित करवाई गई थी।
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इंदौर शहर के मध्य स्थित नरसिंह मंदिर के नाम से ही बाजार का नामकरण भी है। यह इलाका नरसिंह बाजार कहलाता है। महाराजा यशवंत राव होलकर प्रथम द्वारा 1807 में मंदिर के पुजारी बिरदी शर्मा को कुछ अधिकार पत्र सौंपे थे। रियासत के वक्त मंदिर के आसपास अनाज मंडी का क्षेत्र था, होलकर राजा दशहरे मैदान के लिए जाते वक्त भगवान नरसिंह के दर्शन करते हुए दशहरे मैदान जाते थे साथ ही राजपरिवार के सदस्य भी मंदिर दर्शन के लिए आते थे।
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इसलिए कहलाता था लश्करी मंदिर
रियासत काल में नरसिंह मंदिर लश्करी मंदिर के नाम से यह मंदिर जाना जाता था। लश्करी मूलतः फारसी शब्द है, जिसका अभिप्राय सेना, फौज से जुड़ा है ऐसी मान्यता है कि होलकर राजा युद्ध के दौरान अपने साथ कुलदेवता के साथ भगवान नरसिंह की प्रतिमा भी ले जाते थे, सेना की यह यह मान्यता थी कि रण क्षेत्र में विजय होने के लिए भगवान नरसिंह का साथ जरूरी है। गोराकुंड पर दिगंबर लश्करी जैन मंदिर भी प्रसिद्ध है। वहां भी होलकर सेना दर्शन के लिए जाया करती थी।
कौन हैं नृसिंह भगवान?
नृसिंह भगवान विष्णु के अवतारों में से एक हैं। उनकी वैशाख शुक्ल पक्ष की चौदस को जयंती मनाई जाती है। भगवान नृसिंह का शरीर मनुष्य का और मुख सिंह का है। ऐसा माना जाता है कि भगवान नृसिंह विपत्ति और मुसीबत में मदद करते हैं।
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शाम को निकलेगी यात्रा
नृसिंह जयंती पर इंदौर के विभिन्न नृसिंह मंदिरों में भव्य कार्यक्रम आयोजित होते हैं। इस प्राचीन नृसिंह मंदिर में तीन दिवसीय उत्सव आयोजित किया गया है। भगवान का नौका विहार, भजन संध्या भी आयोजित होती है। मुख्य आयोजन का समापन गुरुवार को होगा। सुबह पूजन और संध्या को नरसिंह भगवान का मुखौटा धारण कर निकाली जाने वाली यात्रा, आकर्षण का केंद्र रहती है। नरहरि नंदलाल भजो, नरसिंह गोपाल के उद्घोष से क्षेत्र गुंजायमान रहेगा।
