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Honeytrap case mp: हनीट्रेप मामले में तीन साल बाद मिली आरोपी आरती को जमानत, एक आरोपी जेल में है बंद
Thu, 19 May 2022 02:45 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा
Updated Thu, 19 May 2022 02:45 PM IST
सार
मप्र के बहुचर्चित हनी ट्रेप मामले में आरोपी आरती दयाल को जमानत मिल गई है। तीन साल बाद आरती को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली है। मामले की अन्य आरोपी श्वेता जैन जेल में बंद है। तीन साल पहले यह मामला सामने आया था।
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आरती दयाल
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
मप्र के बहुचर्चित हनी ट्रेप में आरोपी आरती दयाल को जमानत मिल गई है। तीन साल बाद आरती की जमानत मंजूर हुई है। मामले की एक अन्य आरोपी श्वेता विजय जैन जेल में ही है। तीन साल पहले यह मामला सामने आया था जिसके बाद मप्र में हड़कंप मच गया था।
गौरतलब है कि तीन साल पहले हनी ट्रेप का भूचाल मप्र में आया था। 18 सितंबर 2019 को क्राइम ब्रांच ने भोपाल से तीन और इंदौर से दो महिलाओं समेत ड्राइवर गिरफ्तार किया था। आरोपी महिलाओं ने इंदौर नगर निगम के इंजीनियर हरभजन सिंह को हनी ट्रैप में फंसाकर वीडियो के जरिये तीन करोड़ रुपये मांगे थे। पलासिया थाने में सभी आरोपी आरती दयाल, मोनिका यादव, श्वेता विजय जैन, श्वेता स्वप्निल जैन, बरखा सोनी भटनागर और ड्रायवर ओमप्रकाश कोरी के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। यह बात सामने आई थी कि ये महिलाएं नेताओं और अफसरों के पास कॉल गर्ल भेजकर उनके आपत्तिजनक वीडियो बनाती थीं। उन्हें वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करती थीं। इस केस में आरती दयाल और श्वेता विजय जैन जेल में बंद हैं, जिनमें से आरती को बुधवार को सु्प्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। इन दोनों महिलाओं के अलावा नगर निगम इंदौर के एक अधिकारी सहित कई लोग तब गिरफ्तार हुए थे। इस मामले की जांच तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने एसआईटी गठित कर उसे सौंप दिया था। मगर नेताओं, आईएएस-आईपीएस अधिकारियों के नाम इस मामले से जैसे ही जुड़ने लगे तो मंत्रालय और पुलिस मुख्यालय के बीच तलवारें खिंचने लगी थीं। एसआईटी पर भी सवाल उठे थे। इधर आरोपी आरती दयाल को अब जमानत मिलने से कई लोगों की चिंता बढ़ी हैं। आरती को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दी है। अब दूसरी आरोपी श्वेता विजय जैन की जमानत के लिए भोपाल कोर्ट में कोशिशें तेज हो गई हैं।
इस तरह सामने आया हनीट्रेप
17 सितंबर 2019 को यह मामला खुला था। इंदौर नगर निगम के इंजीनियर हरभजन सिंह ने पलासिया थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में हरभजन सिंह ने बताया कि उन्हें 29 साल की आरती दयाल नाम की महिला ब्लैकमेल कर रही है। इसके बाद से हनीट्रेप का राज सामने आया। बता दें कि आरती दयाल का असली नाम आरती अहिरवार है। वह अपने प्रेमी के साथ लिव इन में रहती थी। इसके बाद फरीदाबाद में अनिल वर्मा से शादी की। कुछ समय बाद पति को आरती की हरकतों का पता चला तो उसे छोड़ दिया। बाद में वह मप्र के छतरपुर आ गई। यहां उसने छतरपुर न्यायालय और कुटुंब न्यायालय में पति अनिल वर्मा, अनिल के पिता और मां के खिलाफ मार्च 2014 में प्रकरण दर्ज कराया था। बाद में दोनों पक्षों ने समझौता कर लिया, लेकिन आरती ने पति के साथ रहने से मना कर दिया।
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2017 में वह छतरपुर के ही देरी रोड पर रहने वाले पंकज दयाल के संपर्क में आई। दोनों लिव इन में रहने लगे। इस दौरान उसकी मुलाकात श्वेता जैन से हुई। दोनों साथ मिलकर लोगों को देह व्यापार के जाल में फंसाकर ब्लैकमेल करने लगीं। उसका देह व्यापार से जुड़ी अन्य लड़कियों से संपर्क हो गया। भोपाल आना-जाना शुरू हो गया। उसका संपर्क नगर निगम इंजीनियर हरभजन से हुआ। हरभजन से दोस्ती के बाद आरती का इंदौर के होटलों में भी जाना शुरू हो गया। इसी दौरान आरती ने छतरपुर की ही अपनी साथी रूपा अहिरवार के साथ हरभजन को अपने जाल में फंसाने की प्लानिंग की। उसके फोटो-वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने लगी। इंजीनियर हरभजनसिंह आरती और उसकी साथी रूपा अहिरवार को लाखों रुपये दे चुका था, लेकिन फिर भी ब्लेकैमेल किया जा रहा था। आरती दयाल छतरपुर ने रूपा अहिरवार के साथ मिलकर तीन अफसरों के अश्लील वीडियो बनाए थे। इन वीडियो से उसने लाखों रुपये वसूल कर लिए थे। रूपा अहिरवार को रहने और खाने के लिए थोड़े रुपये दिए थे। रूपा को एसआइटी ने छतरपुर से गिरफ्तार किया था।
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गौरतलब है कि तीन साल पहले हनी ट्रेप का भूचाल मप्र में आया था। 18 सितंबर 2019 को क्राइम ब्रांच ने भोपाल से तीन और इंदौर से दो महिलाओं समेत ड्राइवर गिरफ्तार किया था। आरोपी महिलाओं ने इंदौर नगर निगम के इंजीनियर हरभजन सिंह को हनी ट्रैप में फंसाकर वीडियो के जरिये तीन करोड़ रुपये मांगे थे। पलासिया थाने में सभी आरोपी आरती दयाल, मोनिका यादव, श्वेता विजय जैन, श्वेता स्वप्निल जैन, बरखा सोनी भटनागर और ड्रायवर ओमप्रकाश कोरी के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। यह बात सामने आई थी कि ये महिलाएं नेताओं और अफसरों के पास कॉल गर्ल भेजकर उनके आपत्तिजनक वीडियो बनाती थीं। उन्हें वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करती थीं। इस केस में आरती दयाल और श्वेता विजय जैन जेल में बंद हैं, जिनमें से आरती को बुधवार को सु्प्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। इन दोनों महिलाओं के अलावा नगर निगम इंदौर के एक अधिकारी सहित कई लोग तब गिरफ्तार हुए थे। इस मामले की जांच तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने एसआईटी गठित कर उसे सौंप दिया था। मगर नेताओं, आईएएस-आईपीएस अधिकारियों के नाम इस मामले से जैसे ही जुड़ने लगे तो मंत्रालय और पुलिस मुख्यालय के बीच तलवारें खिंचने लगी थीं। एसआईटी पर भी सवाल उठे थे। इधर आरोपी आरती दयाल को अब जमानत मिलने से कई लोगों की चिंता बढ़ी हैं। आरती को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दी है। अब दूसरी आरोपी श्वेता विजय जैन की जमानत के लिए भोपाल कोर्ट में कोशिशें तेज हो गई हैं।
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इस तरह सामने आया हनीट्रेप
17 सितंबर 2019 को यह मामला खुला था। इंदौर नगर निगम के इंजीनियर हरभजन सिंह ने पलासिया थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में हरभजन सिंह ने बताया कि उन्हें 29 साल की आरती दयाल नाम की महिला ब्लैकमेल कर रही है। इसके बाद से हनीट्रेप का राज सामने आया। बता दें कि आरती दयाल का असली नाम आरती अहिरवार है। वह अपने प्रेमी के साथ लिव इन में रहती थी। इसके बाद फरीदाबाद में अनिल वर्मा से शादी की। कुछ समय बाद पति को आरती की हरकतों का पता चला तो उसे छोड़ दिया। बाद में वह मप्र के छतरपुर आ गई। यहां उसने छतरपुर न्यायालय और कुटुंब न्यायालय में पति अनिल वर्मा, अनिल के पिता और मां के खिलाफ मार्च 2014 में प्रकरण दर्ज कराया था। बाद में दोनों पक्षों ने समझौता कर लिया, लेकिन आरती ने पति के साथ रहने से मना कर दिया।
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2017 में वह छतरपुर के ही देरी रोड पर रहने वाले पंकज दयाल के संपर्क में आई। दोनों लिव इन में रहने लगे। इस दौरान उसकी मुलाकात श्वेता जैन से हुई। दोनों साथ मिलकर लोगों को देह व्यापार के जाल में फंसाकर ब्लैकमेल करने लगीं। उसका देह व्यापार से जुड़ी अन्य लड़कियों से संपर्क हो गया। भोपाल आना-जाना शुरू हो गया। उसका संपर्क नगर निगम इंजीनियर हरभजन से हुआ। हरभजन से दोस्ती के बाद आरती का इंदौर के होटलों में भी जाना शुरू हो गया। इसी दौरान आरती ने छतरपुर की ही अपनी साथी रूपा अहिरवार के साथ हरभजन को अपने जाल में फंसाने की प्लानिंग की। उसके फोटो-वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने लगी। इंजीनियर हरभजनसिंह आरती और उसकी साथी रूपा अहिरवार को लाखों रुपये दे चुका था, लेकिन फिर भी ब्लेकैमेल किया जा रहा था। आरती दयाल छतरपुर ने रूपा अहिरवार के साथ मिलकर तीन अफसरों के अश्लील वीडियो बनाए थे। इन वीडियो से उसने लाखों रुपये वसूल कर लिए थे। रूपा अहिरवार को रहने और खाने के लिए थोड़े रुपये दिए थे। रूपा को एसआइटी ने छतरपुर से गिरफ्तार किया था।
