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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   HC discharged to vyapam scam accused

व्यापम घोटाले के आरोपी को HC ने दी छुट्टी

Sun, 19 Mar 2017 12:59 PM IST
amarujala.com- Presented by: मुकेश झा
amarujala.com- Presented by: मुकेश झा Updated Sun, 19 Mar 2017 12:59 PM IST
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HC discharged to vyapam scam accused

इंदौर के उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने व्यापम घोटाले के आरोपी संतोष कुमार गुप्ता के खिलाफ सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। गौरतलब है कि जबलपुर में एक कोचिंग क्लास चलाने वाले गुप्ता को जुलाई 2013 में गिरफ्तार किया गया था। गुप्ता के साथ-साथ उनके सहयोगी सुधीर राय पर भी इंटर-स्टेट पीएमटी रैकेट चलाने का आरोप था। एमपी, कर्णाटका और महाराष्ट्रा के मेडिकल कॉलेजों में गुप्ता और राय दोनो मिलकर गलत तरीके से एमबीबीएस कोर्सो में उम्मीदवारों को प्रवेश दिलाने की गारंटी लेते थे। इन दोनों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 420, 467, 471 और धारा 3/4 के मध्य प्रदेश मान्यताप्राप्त परीक्षा अधिनियम, 1937 के तहत धारा 3/4 के आरोप तय किए गए थे।

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हालांकि, इनके खिलाफ अभिनव कटारे ने केस दायर किया था। 2008 में इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस कोर्स में प्रवेश दिलाने के लिए गुप्ता पर गलत तरीकों से प्रवेश दिलाने का आरोप लगाया गया था। इतना ही नहीं अभिनव ने पुलिस को बताया कि  उन्होंने ''सॉल्वर'' की व्यवस्था करने के लिए गुप्ता को 2,50,000 रुपये का भुगतान भी किया था, जिनकी मदद से वह पीएमटी 2008 की परीक्षा पास करने में कामयाब रहे।
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वहीं, गुप्ता के वकील अमित दुबे ने कहा कि पुलिस के छानबीन के बाद भी ना तो उनके पास से पैसा बरामद किया गया और ना ही "सॉल्वर" की पहचान की गई। जिसके बाद इस घोटाले का छानबीन करने के लिए इंदौर क्राइम ब्रांच से हाई कोर्ट की निगरानी में एसटीएफ को दिया गया और बाद में सीबीआई के हवाले कर दिया गया।
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बहरहाल, जस्टीस पी के जैसवाल और जस्टीस वीरेंद्र सिंह ने अपने फैसले में कहा कि "यह विवेक का एक नियम है। उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत याचिकाकर्ता के पास नही था। जब तक किसी व्यक्ति के खिलाफ पूरा साक्ष्य नहीं मिल जाता तब तक उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि एक सहयोगी के साक्ष्य का उपयोग दूसरे सहयोगी के साक्ष्य को सिद्ध करने के लिए नहीं किया जा सकता"। 

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