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Gwalior: सरपंच महिला ने सिंधिया के पकड़े पैर, कहा- 'महाराज न्याय दिलाओ, जबरन अंगूठा लगाकर दबाब बनाता है सचिव'
Sat, 22 Feb 2025 07:56 PM IST
ग्वालियर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
Published by: ग्वालियर ब्यूरो
Updated Sat, 22 Feb 2025 07:56 PM IST
सार
सरपंच कुसमा बाई का कहना है कि वह विशेष पिछड़ी सहरिया जनजाति से आती है और पढ़ी-लिखी नहीं है। इसका फायदा उठाकर उनकी ग्राम पंचायत का सचिव मस्तराम धाकड़ जबरन कागजों पर अंगूठा लगाने का दबाव बनाता है।
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सिंधिया के पैर छूते दंपती
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के पैरों में एक आदिवासी महिला अपने पति के साथ रोती हुई गिर गई। वह बार-बार महाराज न्याय दिलाओ की गुहार लगाती नजर आई, उसने केंद्रीय मंत्री सिंधिया को अपना दर्द कागज के पन्नों पर लिख कर दिया। जिसमें कानून और अधिकारियों पर सीधे सवाल उठाया।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शनिवार को अपने जयविलास पैलेस पर आम लोगों से मुलाकात की। इस दौरान शिवपुरी जिले से एक दर्जन से अधिक आदिवासी भी पहुंचे। जिनमें पोहरी जनपद क्षेत्र के उपसिल गांव की आदिवासी महिला सरपंच कुसमा बाई भी शामिल थीं। ज्योतिरादित्य सिंधिया के पास पहुंच आदिवासी महिला सरपंच और उनका पति उनके पैरों में गिर गए। पैर पकड़ कर महाराज न्याय दिलाओ की गुहार लगाने लगे। सिंधिया ने उनसे उनका आवेदन लिया और उनकी परेशानी दूर करने का आश्वासन दिया।
सरपंच कुसमा बाई का कहना है कि वह विशेष पिछड़ी सहरिया जनजाति से आती है और पढ़ी-लिखी नहीं है। इसका फायदा उठाकर उनकी ग्राम पंचायत का सचिव मस्तराम धाकड़ जबरन कागजों पर अंगूठा लगाने का दबाव बनाता है। विरोध किया तो वह उन्हें पद से हटवाने की धमकी देता रहा और आखिरकार उसने पंचायत के पंचों की खरीद फरोख्त और डरा धमका कर उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला दिया।
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सचिव की राजनीति में पकड़ है। जिसके चलते मेरे आवेदनों पर कोई कार्रवाई और सुनवाई नहीं की गई। जिसे देख अब ऐसा लगने लगा है कि आपका कानून और आपके अधिकारी सिर्फ बड़े लोगों के कहने पर ही चलते हैं, आम आदमी के लिए न्याय भी अब बड़े लोगों की इच्छा पर निर्भर हो गया है। लिहाजा एक बार फिर गुहार लगाती हूं कि मेरे खिलाफ पंचायत सचिव द्वारा षडयंत्र पूर्वक लाए गए अविश्वास प्रस्ताव में बहुमत साबित करने के लिए एक माह का समय दिया जाए।
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केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शनिवार को अपने जयविलास पैलेस पर आम लोगों से मुलाकात की। इस दौरान शिवपुरी जिले से एक दर्जन से अधिक आदिवासी भी पहुंचे। जिनमें पोहरी जनपद क्षेत्र के उपसिल गांव की आदिवासी महिला सरपंच कुसमा बाई भी शामिल थीं। ज्योतिरादित्य सिंधिया के पास पहुंच आदिवासी महिला सरपंच और उनका पति उनके पैरों में गिर गए। पैर पकड़ कर महाराज न्याय दिलाओ की गुहार लगाने लगे। सिंधिया ने उनसे उनका आवेदन लिया और उनकी परेशानी दूर करने का आश्वासन दिया।
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सरपंच कुसमा बाई का कहना है कि वह विशेष पिछड़ी सहरिया जनजाति से आती है और पढ़ी-लिखी नहीं है। इसका फायदा उठाकर उनकी ग्राम पंचायत का सचिव मस्तराम धाकड़ जबरन कागजों पर अंगूठा लगाने का दबाव बनाता है। विरोध किया तो वह उन्हें पद से हटवाने की धमकी देता रहा और आखिरकार उसने पंचायत के पंचों की खरीद फरोख्त और डरा धमका कर उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला दिया।
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सचिव की राजनीति में पकड़ है। जिसके चलते मेरे आवेदनों पर कोई कार्रवाई और सुनवाई नहीं की गई। जिसे देख अब ऐसा लगने लगा है कि आपका कानून और आपके अधिकारी सिर्फ बड़े लोगों के कहने पर ही चलते हैं, आम आदमी के लिए न्याय भी अब बड़े लोगों की इच्छा पर निर्भर हो गया है। लिहाजा एक बार फिर गुहार लगाती हूं कि मेरे खिलाफ पंचायत सचिव द्वारा षडयंत्र पूर्वक लाए गए अविश्वास प्रस्ताव में बहुमत साबित करने के लिए एक माह का समय दिया जाए।
