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सबसे महंगा शृंगार: 100 करोड़ के कीमती गहनों से सजीं राधा रानी; मनोहारी रूप के दर्शन के लिए भक्तों की लगी कतार

Thu, 07 Sep 2023 03:17 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Thu, 07 Sep 2023 03:17 PM IST
सार

भगवान के गहने गहने सेंट्रल बैंक आफ इंडिया के लॉकर से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच गोपाल मंदिर लाए गए हैं। मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था में दो से ढाई सैकड़ा पुलिस जवान तैनात हैं।

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Radha Rani decorated with precious ornaments worth 100 crores in Shri Krishna Gopal Mandir Gwalior
राधा रानी के सौ करोड़ के बेशकीमती गहने। - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर ग्वालियर के फूल बाग स्थित रियासत कालीन ऐतिहासिक गोपाल मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण गोपाल और राधारानी का बेशकीमती करोड़ों रुपये के आभूषणों से शृंगार किया गया। कड़ी सुरक्षा के बीच जिला कोषालय से इन गहनों को मंदिर परिसर तक लाया गया, जहां पुलिस प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों की मौजूदगी में इन जेवरातों से भगवान का शृंगार किया गया। इसके बाद मंदिर के पट भक्तों के लिए खोल दिए गए। इस दौरान पूरे मंदिर परिसर को कड़े सुरक्षा पहरे में लिया गया है। सुरक्षा के लिए दर्जनों सीसीटीवी कैमरे भी आसपास लगाए गए हैं।

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सौ करोड़ से अधिक के एंटीक गहने
ग्वालियर के फूलबाग स्थित गोपाल मंदिर में जन्माष्टमी महोत्सव इस वर्ष भी बड़े हर्ष उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। गोपाल मंदिर में विराजमान भगवान श्रीकृष्ण और राधाजी का शृंगार हीरे, माणिक व पन्ने जड़ित सवा सौ करोड़ से अधिक के एंटीक गहनों से किया गया है। गहने सेंट्रल बैंक आफ इंडिया के लॉकर से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच गोपाल मंदिर लाए गए हैं। शृंगार के बाद भक्तों के दर्शनों के लिए मंदिर के पट खोल दिये गए। 
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पूरे मंदिर को सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में लिया गया
ग्वालियर के सिंधिया रियासत कालीन 100 वर्ष से ज्यादा प्राचीन गोपाल मंदिर पर हर वर्ष जन्माष्टमी महापर्व पर राधा रानी और भगवान गोपाल कृष्ण का बेस कीमती सवा सौ करोड़ से अधिक कीमत के जेवरातों से शृंगार किया जाता है। इसके लिए एक रोज पूर्व ही मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था चौकस करने के साथ ही मंदिर की साज सज्जा का काम शुरू कर दिया गया था। पूरे मंदिर को सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में लिया गया है। वहीं देर रात के बाद ही मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था में दो से ढाई सैकड़ा पुलिस जवान लगा दिए गए थे। इस गोपाल मंदिर की स्थापना करीब 102 साल पहले सिंधिया घराने ने ही कराई थी। यह बेशकीमती रत्न जड़े गहने भी सिंधिया घराने की देन हैं। जब राधा-कृष्ण इन गहनों को पहनते हैं तो उनकी सज्जा सभी को मोहित कर देने वाली होती है।




भगवान के इस स्वरूप के दर्शन का साल भर रहता है इंतजार
गोपाल मंदिर की स्थापना 1921 में ग्वालियर रियासत के तत्कालीन शासक माधवराव सिंधिया प्रथम ने की थी। उन्होंने भगवान की पूजा के लिए चांदी के बर्तन और पहनाने के लिए रत्न जड़ित सोने के आभूषण बनवाए थे। इनमें राधा-कृष्ण के 55 पन्ना जड़ित सात लड़ी का हार, सोने की बांसुरी जिस पर हीरे और माणिक लगे हैं, सोने की नथ, जंजीर और चांदी के पूजा के बर्तन हैं। हर साल जन्माष्टमी पर इन जेवरातों से राधा-कृष्ण का शृंगार किया जाता है। इस स्वरूप को देखने के लिए भक्त सालभर का इंतजार करते हैं। यही वजह है कि भक्तों का दर्शन के लिए तांता लगा रहता है। 



इन आभूषणों से हुआ शृंगार
गोपाल मंदिर में भगवान के जो जेवरात हैं, उनमें सोना-चांदी के जेवरात में माता राधा के सात लड़ी के हार में पन्ना, हीरे और माणिक जड़े हुए हैं। राधा-कृष्ण के मुकुट में हीरे के साथ ही पदम, पन्ना जड़े हैं। कृष्ण की बांसुरी सोने की है और उस पर भी हीरे लगे हैं। राधा-कृष्ण के हार में बेशकीमती नीलम, पुखराज, पन्ना, माणिक लगे हैं। पूरे गहने सोने के हैं और उनमें हीरे, मोती, पन्ना, माणिक, नीलम, पुखराज लगे हैं।

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