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MP News: नर्सिंग कॉलेजों पर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, प्रदेश के 70 कॉलेजों की मान्यता निरस्त
Wed, 29 Jun 2022 06:17 PM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Wed, 29 Jun 2022 06:17 PM IST
सार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 70 नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता रद्द करने के निर्देश नर्सिंग काउंसिल को दिए हैं। साथ ही मापदंड न पूरा करने वाले इन कॉलेजों को मान्यत देने वालों की जांच के निर्देश भी दिए हैं।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अंचल में निर्धारित मानकों को पूरा किए बिना संचालित हो रहे नर्सिंग कॉलेजों पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच की गाज गिरी है। हाईकोर्ट ने नर्सिंग काउंसिल को 70 नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता रद्द करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि इन नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता देने वाले जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ भी विभागीय जांच शुरू की जाए।
अधिवक्ता उमेश बोहरे ने अंचल में संचालित नर्सिंग कॉलेज में अनियमितताओं को लेकर याचिका दायर की थी। इसके बाद ग्वालियर हाईकोर्ट ने एक जांच कमेटी गठित की थी। उसे निर्देश दिए थे कि सभी नर्सिंग कॉलेजों की जांच की जाए। इसके बाद जांच कमेटी ने अंचल के सभी 270 कॉलेजों का फिजिकल वैरिफिकेशन किया था। जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपी गई थी। हालांकि, इस बीच हाईकोर्ट ने नर्सिंग काउंसिल से भी एक रिपोर्ट मांगी थी, जिसे कोर्ट में पेश किया गया था। इस रिपोर्ट के आधार पर ही 70 नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता निरस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। याचिका में कहा गया था कि यदि इन नर्सिंग कॉलेजों को बंद नहीं कराया गया तो अप्रशिक्षित हेल्थ वर्कर सामने आएंगे। इससे कहीं ना कहीं मानव जीवन पर भी खतरा हो सकता है।
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अधिवक्ता उमेश बोहरे ने अंचल में संचालित नर्सिंग कॉलेज में अनियमितताओं को लेकर याचिका दायर की थी। इसके बाद ग्वालियर हाईकोर्ट ने एक जांच कमेटी गठित की थी। उसे निर्देश दिए थे कि सभी नर्सिंग कॉलेजों की जांच की जाए। इसके बाद जांच कमेटी ने अंचल के सभी 270 कॉलेजों का फिजिकल वैरिफिकेशन किया था। जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपी गई थी। हालांकि, इस बीच हाईकोर्ट ने नर्सिंग काउंसिल से भी एक रिपोर्ट मांगी थी, जिसे कोर्ट में पेश किया गया था। इस रिपोर्ट के आधार पर ही 70 नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता निरस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। याचिका में कहा गया था कि यदि इन नर्सिंग कॉलेजों को बंद नहीं कराया गया तो अप्रशिक्षित हेल्थ वर्कर सामने आएंगे। इससे कहीं ना कहीं मानव जीवन पर भी खतरा हो सकता है।
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