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Gwalior: रेप के केस में झूठा फंसाने पर युवती और उसके पिता-भाई को सजा, जानें क्यों रची थी साजिश
Thu, 03 Nov 2022 06:42 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Thu, 03 Nov 2022 06:42 PM IST
सार
हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने युवक को रेप के मामले में झूठा फंसाने और बार-बार बयान बदलकर कोर्ट को गुमराह करने के मामले में युवती, उसके पिता और भाई को दोषी मानते हए छह महीने की जेल की सजा सुनाई है।
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : Social Media
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विस्तार
मध्य प्रदेश के दतिया से अलग ही मामला सामने आया है। हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने युवक को रेप के मामले में झूठा फंसाने और बार-बार बयान बदलकर कोर्ट को गुमराह करने के मामले में युवती, उसके पिता और भाई को दोषी मानते हए छह महीने की जेल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने माना कि भ्रूणहत्या की अनुमति लेने के लिए सभी ने षडयंत्र रचा था। दतिया के सत्र न्यायालय में सुनवाई के दौरान लगातार गैरहाजिर रहने पर भी कोर्ट ने तीनों को अवमानना का दोषी माना है।
बता दें कि 8 मार्च 2021 को हाईकोर्ट में दतिया के रहने वाले एक व्यक्ति ने याचिका दायर की थी, जिसमें उसने जानकारी दी थी कि उसकी नाबालिग बेटी के साथ सोनू परिहार नामक युवक ने दुष्कर्म किया है। इस कारण उसकी नाबालिग बेटी गर्भवती हो गई है। मामले की सुनवाई के दौरान सोनू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। साथ ही परिजनों के आग्रह पर कोर्ट ने लड़की के भविष्य को देखते हुए उसे गर्भपात की अनुमति भी दे दी थी। कोर्ट के आदेश पर लड़की ने अपना गर्भपात भी करा लिया था।
सुनवाई के दौरान सोनू के बयान पर कोर्ट ने भ्रूण का डीएनए टेस्ट भी कराया था, जिसमें पता चला थी कि भ्रूण और सोनू का डीएनएन मैच नहीं हुआ। ये बात सामने आई कि पीड़िता के साथ दुष्कर्म करने वाला सोनू परिहार नहीं था बल्कि उसके चचेरे भाई से अवैध संबंध थे। कोर्ट ने इस मामले में दतिया पुलिस को नोटिस जारी किए और लड़की के भी बयान दर्ज किए, जिसमें लड़की ने बताया कि न तो सोनू ने उसके साथ दुष्कर्म किया है न ही वह नाबालिग है। इस तथ्य को हाईकोर्ट ने गंभीर माना और नए सिरे से मामले की जांच के आदेश दिए।
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कोर्ट के सामने आया कि लड़की, उसके पिता और भाई लगातार बयान बदल रहे हैं। कोर्ट ने दतिया एसपी को जांच का जिम्मा दिया था और दतिया सत्र न्यायालय को भी नए सिरे से सुनवाई के आदेश दिए थे। लेकिन ये लोग कोर्ट में हाजिर नहीं हो रहे थे। पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने युवती, उसके पिता और भाई को गिरफ्तारी वारंट से तलब किया था। दतिया पुलिस ने तीनों को हाई कोर्ट में पेश किया। जहां कोर्ट ने उन्हें यह सजा सुनाई।
जानकारी में ये बात भी सामने आई है कि लड़की को उसके घरवालों ने चचेरे भाई के साथ संबंध बनाते हुए देख लिया था, लेकिन उन्होंने जो गर्भपात का तरीका अपनाया वह बेहद षड्यंत्रकारी था। इसमें एक युवक को झूठा फंसाने के अलावा कोर्ट को भ्रमित कर गर्भपात की अनुमति हासिल करने का भी मामला गंभीर था।
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बता दें कि 8 मार्च 2021 को हाईकोर्ट में दतिया के रहने वाले एक व्यक्ति ने याचिका दायर की थी, जिसमें उसने जानकारी दी थी कि उसकी नाबालिग बेटी के साथ सोनू परिहार नामक युवक ने दुष्कर्म किया है। इस कारण उसकी नाबालिग बेटी गर्भवती हो गई है। मामले की सुनवाई के दौरान सोनू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। साथ ही परिजनों के आग्रह पर कोर्ट ने लड़की के भविष्य को देखते हुए उसे गर्भपात की अनुमति भी दे दी थी। कोर्ट के आदेश पर लड़की ने अपना गर्भपात भी करा लिया था।
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सुनवाई के दौरान सोनू के बयान पर कोर्ट ने भ्रूण का डीएनए टेस्ट भी कराया था, जिसमें पता चला थी कि भ्रूण और सोनू का डीएनएन मैच नहीं हुआ। ये बात सामने आई कि पीड़िता के साथ दुष्कर्म करने वाला सोनू परिहार नहीं था बल्कि उसके चचेरे भाई से अवैध संबंध थे। कोर्ट ने इस मामले में दतिया पुलिस को नोटिस जारी किए और लड़की के भी बयान दर्ज किए, जिसमें लड़की ने बताया कि न तो सोनू ने उसके साथ दुष्कर्म किया है न ही वह नाबालिग है। इस तथ्य को हाईकोर्ट ने गंभीर माना और नए सिरे से मामले की जांच के आदेश दिए।
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कोर्ट के सामने आया कि लड़की, उसके पिता और भाई लगातार बयान बदल रहे हैं। कोर्ट ने दतिया एसपी को जांच का जिम्मा दिया था और दतिया सत्र न्यायालय को भी नए सिरे से सुनवाई के आदेश दिए थे। लेकिन ये लोग कोर्ट में हाजिर नहीं हो रहे थे। पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने युवती, उसके पिता और भाई को गिरफ्तारी वारंट से तलब किया था। दतिया पुलिस ने तीनों को हाई कोर्ट में पेश किया। जहां कोर्ट ने उन्हें यह सजा सुनाई।
जानकारी में ये बात भी सामने आई है कि लड़की को उसके घरवालों ने चचेरे भाई के साथ संबंध बनाते हुए देख लिया था, लेकिन उन्होंने जो गर्भपात का तरीका अपनाया वह बेहद षड्यंत्रकारी था। इसमें एक युवक को झूठा फंसाने के अलावा कोर्ट को भ्रमित कर गर्भपात की अनुमति हासिल करने का भी मामला गंभीर था।
