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MP News: ग्वालियर घराने की शास्त्रीय गायिका मालिनी राजुरकर का निधन, ‘ख्याल’ और ‘टप्पा’ शैली में बनाई पहचान
Thu, 07 Sep 2023 05:39 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Thu, 07 Sep 2023 05:39 PM IST
सार
हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायिका मालिनी राजुरकर का 82 वर्ष की आयु में हैदराबाद में निधन हो गया। वे ग्वालियर घराने की थीं। राजुरकर ने चिकित्सकीय अध्ययन के लिए शरीर दान करने का फैसला किया था। उनका शरीर हैदराबाद के उस्मानिया मेडिकल कॉलेज को दान कर दिया गया।
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शास्त्रीय गायिका मालिनी राजुरकर की पहचान ‘ख्याल’ और ‘टप्पा’ शैली में गाए उनके गीत हैं।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
ग्वालियर घराने से एक बुरी खबर आई है। यहां की हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायिका मालिनी राजुरकर का 82 वर्ष की आयु में हैदराबाद में निधन हो गया। कुछ दिनों से स्थानीय अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था। बुधवार को उन्होंने अंतिम सांस ली।
ग्वालियर घराने की प्रख्यात गायिका राजुरकर को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। राजुरकर की पहचान ‘ख्याल’ और ‘टप्पा’ शैली में गाए उनके गीत हैं, जो उन्हें इस शैली की अग्रणी गायिका बनाते हैं। उनके परिवार में दो बेटियां हैं। राजुरकर ने चिकित्सकीय अध्ययन के लिए शरीर दान करने का फैसला किया था। उनका शरीर हैदराबाद के उस्मानिया मेडिकल कॉलेज को दान कर दिया गया।
मालिनी राजुरकर का जन्म 1941 में राजस्थान के अजमेर में हुआ था। उन्होंने जीवन के प्रारंभिक वर्ष अजमेर में ही बिताएं। गणित में स्नातक मालिनी राजुरकर ने अजमेर के सावित्री गर्ल्स हाईस्कूल एवं कॉलेज में तीन साल गणित भी पढ़ाया। बाद में उन्हें कला में छात्रवृत्ति मिली और उन्होने संगीत के क्षेत्र में मजबूती से कदम रखा। गोविंदराव राजुरकर और उनके भतीजे वसंतराव राजुरकर के मार्गदर्शन में उन्होंने अजमेर संगीत महाविद्यालय से संगीत की शिक्षा ली। बाद में उन्होंने अपने गुरु वसंतराव राजुरकर से विवाह कर लिया।
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ग्वालियर घराने की प्रख्यात गायिका राजुरकर को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। राजुरकर की पहचान ‘ख्याल’ और ‘टप्पा’ शैली में गाए उनके गीत हैं, जो उन्हें इस शैली की अग्रणी गायिका बनाते हैं। उनके परिवार में दो बेटियां हैं। राजुरकर ने चिकित्सकीय अध्ययन के लिए शरीर दान करने का फैसला किया था। उनका शरीर हैदराबाद के उस्मानिया मेडिकल कॉलेज को दान कर दिया गया।
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मालिनी राजुरकर का जन्म 1941 में राजस्थान के अजमेर में हुआ था। उन्होंने जीवन के प्रारंभिक वर्ष अजमेर में ही बिताएं। गणित में स्नातक मालिनी राजुरकर ने अजमेर के सावित्री गर्ल्स हाईस्कूल एवं कॉलेज में तीन साल गणित भी पढ़ाया। बाद में उन्हें कला में छात्रवृत्ति मिली और उन्होने संगीत के क्षेत्र में मजबूती से कदम रखा। गोविंदराव राजुरकर और उनके भतीजे वसंतराव राजुरकर के मार्गदर्शन में उन्होंने अजमेर संगीत महाविद्यालय से संगीत की शिक्षा ली। बाद में उन्होंने अपने गुरु वसंतराव राजुरकर से विवाह कर लिया।
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