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Guna News: नियुक्ति के नाम पर वसूली भारी पड़ी, राघौगढ़ के परियोजना अधिकारी संतोष अलावा निलंबित
Wed, 19 Aug 2026 11:12 PM IST
गुना ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुना
Published by: गुना ब्यूरो
Updated Wed, 19 Aug 2026 11:12 PM IST
सार
गुना के राघौगढ़ बाल विकास परियोजना अधिकारी संतोष अलावा को आंगनवाड़ी सहायिका की नियुक्ति के लिए 25 हजार रुपये रिश्वत मांगने के आरोप में निलंबित किया गया है। शिकायतकर्ता ने कॉल रिकॉर्डिंग भी सौंपी थी। जांच में आरोप सही पाए गए। संभाग आयुक्त ने निलंबन के साथ विभागीय जांच के निर्देश दिए हैं।
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महिला बाल विकास अधिकारी रिश्बत मांगने के मामले में निलंबित
विस्तार
सरकारी नौकरी के नाम पर अवैध वसूली अब अधिकारियों पर भारी पड़ रही है। गुना जिले के राघौगढ़ बाल विकास परियोजना के परियोजना अधिकारी संतोष अलावा को आंगनवाड़ी सहायिका की नियुक्ति में रिश्वत मांगने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। ग्वालियर संभाग आयुक्त मनोज खत्री ने जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्काल प्रभाव से निलंबन के आदेश जारी किए हैं।
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पूरा प्रकरण मकसूदनगढ़ के तिलक चौक स्थित आंगनवाड़ी केंद्र से जुड़ा है। यहां सहायिका पद के लिए रानी सेन का चयन प्रक्रिया के बाद हुआ था। लेकिन चयन के बाद भी नियुक्ति आदेश जारी नहीं किया जा रहा था। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने कई बार कार्यालय के चक्कर लगाए, लेकिन हर बार टाल-मटोल की गई।
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शिकायतकर्ता हिमांशु सेन ने 28 अप्रैल को जिला कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में लिखित शिकायत सौंपी। शिकायत में कहा गया कि नियुक्ति आदेश दिलाने के बदले परियोजना अधिकारी की ओर से दलाल जितेंद्र यादव के माध्यम से 25 हजार रुपये की मांग की जा रही है।
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सबसे अहम बात यह रही कि हिमांशु सेन ने रिश्वत मांग को लेकर हुई फोन वार्ता की कॉल रिकॉर्डिंग भी कलेक्टर को सौंपी। ऑडियो में नियुक्ति के बदले रकम देने का जिक्र साफ सुना जा सकता था। रिकॉर्डिंग के साथ शिकायत मिलते ही प्रशासन हरकत में आया। कलेक्टर के निर्देश पर महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया। जांच दल ने शिकायतकर्ता, गवाहों और दस्तावेजों के आधार पर 27 मई को अपनी रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में परियोजना अधिकारी संतोष अलावा पर आरोप सही पाए गए। इसके साथ ही विभाग के संयुक्त संचालक ने भी अपनी टिप्पणी में लिखा कि अधिकारी विभागीय कार्यों में गंभीरता नहीं दिखा रहे और पात्र हितग्राहियों को जानबूझकर लटकाया जा रहा है। दोनों स्तर की अनुशंसा के बाद मामला संभाग आयुक्त को भेजा गया।
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जांच प्रतिवेदन और साक्ष्यों को देखते हुए संभाग आयुक्त मनोज खत्री ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने संतोष अलावा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय संभागीय कार्यालय ग्वालियर रहेगा। आयुक्त ने कहा कि आंगनवाड़ी जैसी योजनाएं गरीब और जरूरतमंद महिलाओं के लिए हैं। इसमें किसी भी तरह की लेनदेन या पक्षपात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषी पाए जाने पर विभागीय जांच भी आगे बढ़ाई जाएगी। निलंबन की खबर के बाद रानी सेन के परिजनों ने राहत की सांस ली। उनका कहना है कि अब बिना पैसे दिए नियुक्ति आदेश मिल जाएगा। वहीं पूरे जिले के महिला एवं बाल विकास विभाग में इस कार्रवाई के बाद हड़कंप मच गया है।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि लंबित सभी नियुक्ति आदेशों की समीक्षा की जाए और 15 दिन के अंदर पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी किए जाएं।आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका की भर्ती पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया से होती है। इसमें किसी अधिकारी को शुल्क लेने का अधिकार नहीं है। इस मामले ने एक बार फिर साबित किया है कि जनसुनवाई और सबूत के साथ की गई शिकायत पर प्रशासन तुरंत कार्रवाई करता है। फिलहाल विभाग ने संतोष अलावा के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी जारी कर दिए हैं। जांच पूरी होने तक उन पर अन्य वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार भी रोक दिए गए हैं।
