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गुना: सरकारी काम की फाइल समझकर खोला लिंक, ठगों ने पंचायत सचिव के खाते से उड़ाए 3.05 लाख रुपये

Tue, 22 Sep 2026 10:13 AM IST
गुना ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुना Published by: गुना ब्यूरो Updated Tue, 22 Sep 2026 10:13 AM IST
सार

गुना के मृगवास थाना क्षेत्र में साइबर ठगी का अनोखा मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत सचिव ने सरकारी काम से जुड़ा समझकर व्हाट्सएप पर आई एपीके फाइल खोली, जिसके बाद उनके बैंक खाते से अलग-अलग लेन-देन में तीन लाख पांच हजार 50 रुपये निकाल लिए गए।

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Opened APK thinking it was a government work link, 3.05 lakhs were withdrawn from the account
apk फाइल से उड़ाए सचिव के खाते से पैसे

विस्तार

गुना में साइबर ठग अब लोगों को बैंक या इनाम का लालच देकर ही नहीं, बल्कि सरकारी कामकाज से जुड़ी फाइल और लिंक के नाम पर भी अपना शिकार बना रहे हैं। मृगवास थाना क्षेत्र की सानई चौकी अंतर्गत ग्राम तलावड़ा में ऐसा ही मामला सामने आया है।

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यहां ग्राम पंचायत सचिव के मोबाइल पर व्हाट्सएप के जरिए आई एक संदिग्ध एपीके फाइल ने उन्हें मुश्किल में डाल दिया। लिंक को सरकारी कार्य से संबंधित समझकर खोलने के बाद उनके बैंक खाते से अलग-अलग दिनों में तीन लाख पांच हजार 50 रुपये की राशि अनधिकृत तरीके से निकाल ली गई।

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शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की
मामला तब सामने आया, जब पंचायत सचिव बैंक पहुंचे और खाते में हो रहे लेन-देन की जानकारी ली। स्टेटमेंट निकलवाने पर पता चला कि उनके खाते से कई बार UPI के जरिए रकम दूसरे खातों में भेजी जा चुकी थी। इसके बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की और साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की।

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जानकारी के मुताबिक, तलावड़ा मजरा सानई निवासी मिंटूलाल (59) पिता सोनाराम मीणा ग्राम पंचायत बरोद में सचिव के पद पर पदस्थ हैं। उनके मुताबिक, 18 अगस्त 2026 को व्हाट्सएप पर एक अज्ञात नंबर से APK फाइल अथवा लिंक भेजा गया था। लिंक को उन्होंने सरकारी काम से संबंधित समझकर खोल दिया। इसके बाद मोबाइल में मौजूद जानकारी और बैंकिंग से जुड़ी गतिविधियों तक साइबर ठगों की पहुंच बनने की आशंका है।

ठगी का सिलसिला उसी दिन शुरू हो गया। 18 अगस्त को खाते से दो अलग-अलग ट्रांजैक्शन में 4,969 रुपये निकाले गए। इसके बाद 21 अगस्त को चार लेन-देन में 99,979 रुपये, 22 अगस्त को चार ट्रांजैक्शन के जरिए 99,999 रुपये और 23 अगस्त को एक अन्य लेन-देन में 1,00,103 रुपये ट्रांसफर कर दिए गए। इस तरह कुछ ही दिनों में खाते से कुल 3,05,050 रुपये गायब हो गए।

पीड़ित को इसकी जानकारी तब हुई, जब वह 23 अगस्त को बैंक शाखा पहुंचे। खाते में लगातार हुए संदिग्ध लेन-देन देखकर उन्होंने बैंक से स्टेटमेंट निकलवाया। इसके बाद पूरे मामले की शिकायत पुलिस से की गई।

राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल 1930 से प्राप्त ई-जीरो एफआईआर और जांच के बाद सानई चौकी प्रभारी उप निरीक्षक राहुल शर्मा ने जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। स्वीकृति मिलने के बाद मृगवास पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज किया है।

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अब पुलिस साइबर सेल की मदद से उन मोबाइल नंबरों और बैंक खातों की जानकारी जुटा रही है, जिनके जरिए रकम ट्रांसफर हुई। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस ठगी के पीछे एक व्यक्ति है या संगठित साइबर गिरोह काम कर रहा है।

इस घटना ने एक बार फिर मोबाइल पर आने वाली अनजान फाइल और लिंक को लेकर सावधानी की जरूरत सामने ला दी है। साइबर ठग अक्सर भरोसेमंद विभाग, बैंक, सरकारी योजना या जरूरी दस्तावेज के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को लिंक खोलने के लिए तैयार करते हैं। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में ठगों ने मोबाइल तक किस तरह पहुंच बनाई और बैंक खाते से रकम निकालने के लिए कौन-सा तरीका अपनाया।

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