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पार्टी के पास हेलीकॉप्टर है पर दफ्तर नहीं
जयप्रकाश पाराशर/भोपाल
Updated Tue, 19 Nov 2013 07:00 PM IST
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मध्य प्रदेश में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोगपा) एक ऐसी पार्टी है, जिसका कोई कार्यालय नहीं, लेकिन जब एक हेलिकाप्टर उतरता है, तो आदिवासी उसे गोंडवाना का हेलिकाप्टर कहकर दौड़ने लगते हैं।
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यह हेलिकाप्टर वास्तव में जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष शरद यादव का है। गोगपा ने जेडीयू से मध्य प्रदेश में चुनावी गठबंधन किया है।
गोगपा की कांफ्रेंस खुले आकाश के नीचे होती है। नाम से आप भ्रमित न हों। यह कोई क्षेत्रीय जाति आधारित पार्टी नहीं है। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का आंदोलन वास्तव में दुनिया के पांच महाद्वीपों की जमीन का आंदोलन है।
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इस पार्टी के फिलासफर मानते हैं कि आस्ट्रेलिया, यूरोप, एशिया की तमाम जमीन उनकी है। गोगपा का आंदोलन आदिवासियों की आवाज बुलंद करना और समाज के दबे-कुचले तबके की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने का मकसद लेकर चल रहा है।
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छत्तीसगढ़ के हीरासिंह मरकाम इसके अध्यक्ष और मध्य प्रदेश के गुलजार सिंह मरकाम इसके उपाध्यक्ष हैं।
राजनीतिक महत्व
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने ही 2003 में भारतीय जनता पार्टी की पूर्ण बहुमत वाली सरकार का रास्ता प्रशस्त किया था। जब 2003 में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने मध्य प्रदेश में अपने प्रत्याशी खड़े किए तो कई इलाकों में आदिवासियों का एक बड़ा वोट उनके साथ चला गया।
नतीजा यह हुआ कि कांग्रेस अपने वोट बैंक से हाथ धो बैठी और भाजपा को पहली बार शानदार बहुमत मिला। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के भी तीन विधायक अमरवाड़ा, परसवाड़ा और घनसौर से चुने गए।
लिहाजा इस पार्टी को एक दफ्तर भी मिल गया था। वर्ष 2008 के चुनाव में विभाजन हो गया और उसे कोई सीट नहीं मिली। अब फिर विलय के बाद यह पार्टी मैदान में है और इस बार उसका गठबंधन जनता दल यूनाइटेड के साथ हुआ है।
जनता दल यूनाइटेड के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद पटेल लंबे समय तक आदिवासी आंदोलन में काम कर रहे हैं। उन्होंने जेडीयू और गोगंपा के बीच गठबंधन कराया है।
उनका कहना है, ‘जब पहली बार मैं पार्टी की बैठकों में गया तो यह देखकर हैरान रह गया कि दस-दस हजार लोग वहां आते हैं। नाचते हैं, गाते हैं। जेडीयू के साथ उनका गठबंधन अच्छा रहा क्योंकि उनका विश्वास है। हम ही उनकी स्टेशनरी आदि में मदद करते हैं।’
गोगपा के प्रवक्ता पूनमसिंह के मुताबिक प्रदेश में करीब 64 सीटों पर गोगपा ने अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं। अभी पर्यवेक्षक यह अनुमान लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि गोगपा को कितनी सीटें मिलने वाली हैं।
गोगपा ने इस साल जेडीयू के साथ 140 सीटों का तालमेल किया और 64 सीटों में से 42 पर बड़ी गंभीरता से चुनाव लड़ रही है। गोविंद यादव के अनुसार गोगपा की वर्तमान चुनाव में भी 8-10 सीटों पर अच्छी स्थिति है।
बिगाड़ देंगे गणित
2003 के चुनाव में गोगपा को करीब 55 सीटों पर 5000 से 25,000 वोट तक मिले थे। इन वोटों ने कांग्रेस का गणित बिगाड़ दिया था।
हालांकि 2008 के चुनाव में आदिवासियों का अच्छा खासा वोट भाजपा को मिला था। कांग्रेस विरोधी गैर आदिवासी वोटभी भाजपा को मिला था।
अब यदि गोगपा ज्यादा सीटों पर 10,000-20,000 वोट ले जाती है तो किसी भी पार्टी के अच्छे खासे उम्मीदवार को हरा सकती है।
शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, कटनी, बालाघाट, छिंदवाड़ा जैसे जिलों में गोगपा का अच्छा प्रभाव है। गोगपा के वोटर की खासियत यह है कि उसे आप सर्वे में पकड़ नहीं सकते। यह वोटर दोनों ही पार्टियों से नाराज होने के कारण गोगपा के पास चला जाता है।
