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भारत बंद पर बड़ा खुलासा, राजनीतिक संगठन ने की थी हिंसा के लिए फंडिंग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Updated Sun, 08 Apr 2018 03:04 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट के एससी-एसटी एक्ट पर सुनाए गए फैसले के विरोध में 2 अप्रैल को देशव्यापी बंद का आयोजन किया गया था। इस दौरान हुई हिंसा में दर्जनों लोगों की मौत हो गई और देशभर में सड़क तथा रेलमार्ग भी बाधित रहा। अब इस हिंसा पर इंटेलीजेंस ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया है कि भारत बंद के दौरान प्रदेश में हुई हिंसा के लिए फंडिंग की गई थी। मामले की छानबीन के बाद शनिवार को इंटेलीजेंस आईजी मकरंद देउसकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए बताया कि ग्वालियर, बालाघाट, मुरैना, भिंड, सागर आदि जिलों में उपद्रवियों के लिए फंडिंग की गई थी।
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उन्होंने बताया कि यह फंडिंग राजनीतिक संगठन और कारोबारियों द्वारा की गई थी। जिसके बाद उपद्रवी हिंसा पर उतर आए थे। उनके मुताबिक यह सब एक योजना के तहत किया गया। जिसमें हिंसा का प्रयोग अफसरों को उकसाने के लिए भी किया गया था। उन्होंने फंडिंग में शामिल लोगों के नाम का खुलासा तो नहीं किया लेकिन कहा कि पुख्ता सबूतों के साथ ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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देउसकर ने आगे कहा कि हिंसा भड़काने और हिंसा को समर्थन करने वाले मैसेजों को वाट्सएप के जरिए फैलाया गया था। जिसमें शामिल लोगों की पहचान की जा चुकी है। इसमें ग्वालियर में आईटी एक्ट के तहत चार एफआईआर दर्ज की गई हैं। साथ ही चंबल और ग्वालियर संभाल में कलेक्टरों ने शस्त्रों के लाइसेंस भी सस्पेंड कर दिए हैं। इसके अलावा ग्वालियर में 2900, भिंड में 4000 और मुरैना में 1900 शस्त्र थानों में जमा हो चुके हैं। हिंसा में इस्तेमाल हुए श्स्त्रों में अभी आधे ही जमा हो पाए हैं जबकि बाकी शस्त्रों को जमा करने का प्रयास किया जा रहा है।
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