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पिता को मृत मानने के लिए तैयार नहीं है यह आईपीएस अधिकारी, करवा रहा आयुर्वेदिक इलाज

Thu, 14 Mar 2019 03:42 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Sneha Baluni Updated Thu, 14 Mar 2019 03:42 PM IST
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from last two months senior IPS officer is treating his dead father by claiming he is alive
आईपीएस अधिकारी राजेंद्र मिश्रा - फोटो : Social Media

पिछले दो महीनों से मध्यप्रदेश के एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अपने मृत पिता का बंद कमरे में इलाज कर रहे हैं। उनका दावा है कि उनके आधिकारिक बंगले में उनके पिता का इलाज चल रहा है और वो ठीक हो रहे हैं लेकिन उनकी मां, बच्चों और पारंपरिक हीलर (नाड़ी वैद्य) के अलावा उनसे कोई नहीं मिल सकता है। पारंपरिक हीलर पचमढ़ी की जड़ी-बूटियों से उनका इलाज कर रहा है।

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मध्यप्रदेश के इस अधिकारी का नाम राजेंद्र मिश्रा है। उनके 84 साल के पिता को 14 जनवरी को निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था। इसी दिन उन्हें अस्पताल प्रशासन ने मृत्यु प्रमाणपत्र भी सौंप दिया था। लेकिन 55 साल के मिश्रा ने इसे नहीं माना। उन्होंने डॉक्टरों के एक दल को उनके निवास पर भेजने के राज्य मानवाधिकार आयोग के प्रयास का विरोध किया है। वह अपनी वरिष्ठता का फायदा उठा रहे हैं।
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मिश्रा ने कहा, 'एलोपैथी मेडिसिन में आखिरी नहीं होती है। विज्ञान के इतर भी बहुत सी चीजे हैं। मेरे पिता जिंदा हैं। उनका इलाज जारी है। वह पिछले 6 दशकों से योगा कर रहे हैं। वह योग निद्रा में हैं। क्या होगा यदि डॉक्टर उन्हें उठाने की कोशिश करें और कुछ गलत हो जाए? क्या इस कार्य को हत्या नहीं माना जाएगा?'
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मिश्रा ने आगे कहा, 'यदि मेरे पिता की मौत हो गई होती तो क्या अब तक शव सड़ नहीं गया होता? आप एक मृत शरीर का इलाज नहीं कर सकते हैं। आप एक मरी हुई छिपकली या चूहे के साथ एक घंटे तक नहीं रह सकते हैं। मुझे यह बात समझ में नहीं आती है कि बाहरी लोग हमारे निजी मामले में हस्तक्षेप क्यों कर रहे हैं। अपने पिता का इलाज करवाना मेरा मौलिक अधिकार है। मैं किसी अपराध या भ्रष्टाचार में लिप्त नहीं हूं।'

23 फरवरी को डॉक्टरों का एक छह सदस्यीय दल मिश्रा के बंगले में उनके पिता कुलमणि मिश्रा को देखने के लिए गया था। इस दल में तीन एलोपैथी के और तीन आयुर्वेद के डॉक्टर थे। कुलमणि ओडिशा के एक सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी थे। लेकिन बंगले के बाहर मौजूद पुलिस ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया। 

पिछले महीने राजेंद्र मिश्रा की मां शशिमणि ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दाखिल की थी ताकि अदालत इस मामले में हस्तक्षेप करे। उन्होंने मानवाधिकार आयोग को भी पत्र लिखकर दावा किया था कि उनके जीवन, सम्मान और स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन किया जा रहा है। जिसके बाद अदालत ने राज्य सरकार और आयोग को नोटिस जारी किया था लेकिन अभी तक कोई आदेश जारी नहीं किया गया है।


कुलमणि मिश्रा बंसल अस्पताल में भर्ती थे। अस्पताल के प्रवक्ता लोकेश झा ने कहा कि मरीज की अगले दिन मौत हो गई थी। उन्होंने कहा, 'शव को अगले दिन सौंप दिया गया था और मृत्यु प्रमाणपत्र भी परिवार को दे दिया गया था।'

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