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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Forest Guard Exam 2012: CBI convicted three in Vyapam scam

वनरक्षक परीक्षा वर्ष 2012: व्यापमं घोटाले में सीबीआई कोर्ट ने तीन दोषियों को सुनाई तीन महीने की सजा, 10-10 हजार का जुर्माना

Mon, 28 Mar 2022 03:48 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: दिनेश शर्मा Updated Mon, 28 Mar 2022 03:48 PM IST
सार

मध्यप्रदेश व्यापमं घोटाले में एक और निर्णय पारित किया गया। मप्र वनरक्षक परीक्षा वर्ष 2012 मामले में सीबीआई ने तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है। इसमें दो अभ्यर्थी और एक मध्यस्थ शामिल है। मामले में तीनों दोषियों को तीन-तीन महीने का सश्रम कारावास और 10-10 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है। इस मामले में सात अन्य आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया है। 

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Forest Guard Exam 2012: CBI convicted three in Vyapam scam
मध्यप्रदेश व्यापम की बिल्डिंग

विस्तार

सीबीआई की विशेष अदालत के विशेष न्यायाधीश नीतिराज सिंह सिसोदिया ने वनरक्षक भर्ती परीक्षा 2012 में सोमवार को फैसला सुनाया है। इसके अनुसार एसटीएफ को शिकायतें प्राप्त हुईं कि 15 अप्रैल 2012 को आयोजित मध्य प्रदेश वन रक्षक भर्ती परीक्षा में देवेंद्र कुमार जाटव अनुचित तरीके से परीक्षा पास कर चयनित हुआ है। थाना एसटीएफ ने देवेंद्र कुमार जाटव के संबंध में वन विभाग सतपुड़ा भोपाल एवं व्यापमं भोपाल से जानकारी प्राप्त की। संदेही देवेंद्र कुमार को तलब कर नमूना लिखावट व निशानी अंगूठा की जांच कराई गई। देवेंद्र जाटव ने परीक्षा में दूसरे व्यक्तियों को बैठाने के लिए रिंकू शर्मा से संपर्क किया था। मगर रिंकू शर्मा द्वारा आत्महत्या कर लेने के कारण देवेंद्र जाटव के एवज में परीक्षा देने वाले का नाम सामने नहीं आ सका। किंतु हस्तलिपि विशेषज्ञ एवं निशानी अंगूठा पर विशेषज्ञ अभिमत से यह साबित हो गया कि देवेन्द्र जाटव के स्थान पर अन्य व्यक्ति ने परीक्षा दी थी।
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इसी तरह उक्त परीक्षा में पास होने वाले अभ्यार्थी पदम सिंह खरे के संबंध में भी जांच पर पाया गया कि आरोपी अवैध तरीके से वनरक्षक के पद पर भर्ती हुए हैं। अनुसंधान में यह भी पाया गया कि मध्यस्थ योगेंद्र यादव, वासुदेव चंदेल, कुंवर इंद्रासन उर्फ इंद्रेश सिंह अनुज यादव के साथ मिलकर पद्म सिंह खरे के स्थान पर आनंद सागर से संपर्क कर परीक्षा दिलवाई गई।
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विशेष लोक अभियोजक सीबीआई सतीश दिनकर द्वारा पैरवी की गई। विवेचना एसटीएफ के उप पुलिस अधीक्षक अरुण कश्यप एवं सीबीआई के निरीक्षक अनुज कुमार द्वारा की गई थी। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ने प्रकरण के निर्णय पारित करते समय दोनों पक्षों पर विचार करते हुए तीन लोगों को दोषी पाया। इनमें देवेंद्र कुमार जाटव, पद्मसिंह खरे और आनंद सागर शामिल हैं। इन्हें तीन-तीन महीने का सश्रम कारावास और 10-10 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है। प्रकरण में सात अन्य आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया।
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