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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Dhar News ›   MP Election 2023: BJP is desperate to make a dent in Congress stronghold Kukshi, Jamuna Devi has been MLA

MP Election 2023: कांग्रेस के मजबूत गढ़  कुक्षी में भाजपा सेंध लगाने को बेताब, जमुना देवी पांच बार रहीं विधायक

Tue, 07 Nov 2023 09:53 AM IST
Kamlesh Sen कमलेश सेन
Updated Tue, 07 Nov 2023 09:53 AM IST
सार

MP Election 2023: 1993 से 2008 तक जमुनादेवी कुक्षी से चुनी जाती रहीं। 2013 और 2018 से कांग्रेस के सुरेंद्र सिंह हनी बघेल रिकॉर्ड तोड़ मतों से विजयी हुए।
 

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MP Election 2023: BJP is desperate to make a dent in Congress stronghold Kukshi, Jamuna Devi has been MLA
MP Election 2023 - फोटो : अमर उजाला,

विस्तार

धार जिले की सात विधानसभा सीटों में से पांच अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। यह आदिवासी बहुल क्षेत्र है। प्रदेश में सर्वाधिक अनुसूचित जनजाति के क्षेत्र भी मालवा निमाड़ में हैं। सभी प्रमुख दलों की नजरें इन क्षेत्रों पर केंद्रित हैं, क्योंकि सत्ता प्राप्ति में बहुमत के लिए मालवा निमाड़ की महती भूमिका रहती है। धार जिले की कुक्षी विधानसभा सीट मध्य भारत की 79 सीटों के वक्त से प्रदेश में है और 1952 से ही आरक्षित है। यहां अब तक हुए 15 चुनावों में से 13 बार कांग्रेस और एक बार जनसंघ व एक बार भाजपा विजयी रही। इस सीट से पूर्व सीएम स्व. जमुना देवी पांच बार विधायक रहीं। कुक्षी में आदिवासी क्षेत्र और साक्षरता प्रतिशत बहुत की कम रहा है। 1957 में जमुना बाई कुक्षी से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में थीं और उन्हें 2197 मत प्राप्त हुए थे। 1952 एवं 1957 में कांग्रेस के रातु सिंह विजयी रहे थे। 1962 में जनसंघ के बाबू ने रातु सिंह को 872 मतों से पराजित किया था।
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1967 में कांग्रेस के छीतूसिंह ने विजय हासिल की, 1972 से 1980 तक कांग्रेस के प्रतापसिंह बघेल का कब्जा रहा। 1977 की जनता लहर से कुक्षी अछूता रहा और यहां कांग्रेस का कब्जा रहा। 1984 में प्रतापसिंह बघेल धार से सांसद चुने गए थे, 1985 में कांग्रेस की जमुना देवी विजयी रहीं, 1990 में भाजपा की रंजना बघेल से जमुना देवी पराजित हो गईं। 1993 से 2008 तक जमुनादेवी कुक्षी से चुनी जाती रहीं। 2013 और 2018 से कांग्रेस के सुरेंद्र सिंह हनी बघेल रिकॉर्ड तोड़ मतों से विजयी हुए।
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भाजपा को जीत का लंबा इंतजार
विधानसभा चुनाव में भाजपा को 1990 के बाद से विजय का इंतजार है, एक उप चुनाव जरूर भाजपा को विजय हासिल हुई थी। कुक्षी कांग्रेस का मजबूत किला है, जिसे भाजपा अभी तक भेद नहीं पाई है। 1962 में जनसंघ और 1990 में भाजपा की रंजना बघेल के बाद मुख्य चुनाव में भाजपा को विजय का इंतजार है। अभी तक 15 चुनावों में में 13 बार कांग्रेस को और 2 बार भाजपा को विजय हासिल हुई है। प्रतापसिंह बघेल, जमुनादेवी अब सुरेन्द्रसिंह हनी बघेल का कुक्षी पर सर्वाधिक अधिकार रहा है। कुक्षी से अभी तक आठ बार कांग्रेस के उम्मीदवारों की 10 हजार से अधिक मतों से विजय हासिल हुई है, वर्ष 2013 और 2018 में सुरेंद्र सिंह हनी बघेल की क्रमश: 42,768 और 62,930 मतों से जीत रिकॉर्ड मतों से जीत रही यही।
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इस बार चुनाव में कांग्रेस ने विधायक सुरेंद्र सिंह हनी बघेल और भाजपा ने जयदीप पटेल को उम्मीदवार बनाया है। सुरेंद्रसिंह बघेल की क्षेत्र में मजबूत पकड़ है और अनुभवी हैं, जबकि जयदीप पटेल का यह पहला चुनाव है, पटेल पूर्व विधायक रंजना बघेल के रिश्तेदार हैं। इस बार कुक्षी में छह उम्मीदवार मैदान में हैं। क्या भाजपा कांग्रेस के गढ़ कुक्षी में सेंध लगा पाएगी, यह मतदाता ही तय करेंगे। लोकसभा में अंतर: विधानसभा और लोकसभा में वोट के ट्रेंड में अंतर रहता है, 2014 में लोकसभा में कुक्षी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा की बढ़त 21,040 से और 2019 में 35,351 से मतों की रही। जाहिर है विधानसभा क्षेत्र में स्थानीय को ज्यादा मत हासिल होते हैं।

नोटा का प्रयोग: 2013 और 2018 के विधानसभा चुनावों में यहां नोटा में मत क्रमशः 3964 और 3016 डाले गए थे।
मतदाता : कुल मतदाता- 2,46,685, पुरुष -1,22,011 महिला-1,24,670 एवं थर्ड जेंडर 4

कुक्षी चुनाव की रोचक जानकारी :
  •  2023 में कुक्षी में पुरुषों के बजाए महिला मतदाता की संख्या अधिक है।
  •  चुनाव मैदान में 1952 से 2023 तक के चुनाव में उम्मीदवारों की संख्या 3 से 7 के मध्य रही है।
  •  सर्वाधिक मतदान वर्ष 2018 में हुआ था।
  •  सर्वाधिक मतों से विजयी सुरेंद्र सिंह हनी बघेल रहे। सबसे कम मतों से जीत जनसंघ के बाबू की रही।
  •  करीब ढ़ाई दशक तक पिता—पुत्र कुक्षी विधानसभा सीट पर काबिज रहे।
  •  2013 में सभी निर्दलीय उम्मीदवारों को 1000 से अधिक मत प्राप्त हुए थे।

चुनाव में रोचक नाम के उम्मीदवार: पिछले चुनावों के उम्मदीवारों के नामों में लालू भाला, भीम, चतरू, भूरा भगत ,जयराम, अंतराबाई और अर्जुनसिंह जैसे नाम के स्वतंत्र उम्मीदवार मैदान में रहे हैं।
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