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देवास: नाराज किसानों ने कर्मचारियों को दफ्तर में बंद कर बाहर से लगा दिया ताला

Fri, 10 Dec 2021 11:37 AM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवास
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवास Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा Updated Fri, 10 Dec 2021 11:37 AM IST
सार

मध्य प्रदेश के देवास में किसानों ने बिजली कंपनी के कर्मचारियों को उनके ही कार्यालय में कैद कर दिया। गेट पर ताला लगा दिया। दो घंटे में जैसे-तैसे किसानों को समझाइश दी, तब जाकर गेट खुला।  

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Dewas: Angry farmers locked the employees in the office and locked them from outside, got angry and shouted slogans
देवास में बिजली कंपनी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते किसान। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मध्यप्रदेश के देवास में बिजली कंपनी के कर्मचारी शुक्रवार रात को उस समय घबरा गए जब किसानों ने उन्हें कार्यालय में ही बंद कर दिया। गेट पर ताला लगा दिया गया। जैसे-तैसे किसानों को समझाया गया और करीब दो घंटे बाद स्थिति सामान्य हुई। किसानों का आक्रोश इस बात पर था कि उन्हें सिंचाई के लिए रात को बिजली दी जाती है।
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जानकारी के मुताबिक राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के नेतृत्व में शुक्रवार रात को किसानों ने भोपाल रोड स्थित बिजली कंपनी के दफ्तर का घेराव किया। कार्यालय के गेट पर ताला लगा दिया और कर्मचारी अंदर ही कैद हो गए। किसानों ने बाहर बैठकर धरना दिया। नारेबाजी भी की। काफी देर तक हंगामा चला। अंदर से बिजली कंपनी के अधिकारी समझाने आए तो किसान उन पर भड़क गए। बाद में पुलिस और तहसीलदार को सूचना दी। वे भी मौके पर गए। किसानों का कहना था कि दिन के समय खेत पर काम करते हैं और रात के समय बिजली मिलने पर फसलों को पानी देना पड़ता है। हमें ज्यादातर रात में बिजली दी जाती है। इसका हम विरोध कर रहे हैं।
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किसान आक्रोशित लहजे में कह रहे थे कि हमको भी नींद आती है। हम भी घरवालों के साथ रहना चाहते हैं। हमको भी दूसरे काम रहते हैं लेकिन रात में तेज ठंड में सिंचाई के लिए जाना पड़ता है। तीन से चार घंटे हम खेत पर रहते हैं और अधिकारी अगर पांच मिनट भी घर पहुंचने में देर हो जाए तो गुस्सा आ जाता है। क्या हम इंसान नहीं है। 
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हम किसान हैं, रोबोट नहीं
हंगामे के बीच अधीक्षण यंत्री ने किसानों से बात की। समझाइश के बाद किसान माने। राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के जिलाध्यक्ष ठाकुर गगनसिंह पटेल का कहना था कि रबी सीजन में उन्हें दिन और रात मिलाकर 10 घंटे बिजली मिलती है। हम किसान हैं, कोई रोबोट नहीं। बिजली का शैड्यूल जब तक बदला नहीं जाता या हमें कोई वरिष्ठ अधिकारी ठोस आश्वासन नहीं देता, तब तक यहीं बैठे रहेंगे। हमने पहले भी कलेक्टर कार्यालय में आवेदन देकर बिजली शैड्यूल बदलने की मांग की थी।  
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