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MP News: गैस का रिसाव हुआ तो मोबाइल पर आ जाएगा मैसेज, जानें कैसे काम करती है आईआईटी इंदौर के छात्र की डिवाइस

Tue, 23 Jan 2024 01:38 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Tue, 23 Jan 2024 01:38 PM IST
सार

दमोह निवासी आईआईटी इंदौर के छात्र ने बनाई ऐसी डिवाइस, जो एप के माध्यम से मोबाइल पर गैस रिसाव की जानकारी देगी।

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MP News: Damoh student made a device to give information about gas leakage
आईआईटी छात्र चंद्रभान और उसकी बनाई डिवाइस। - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

दमोह जिले की बटियागढ़ तहसील के ग्राम रियाना निवासी किसान के बेटे ने एक ऐसी डिवाइस बनाई है, जिससे जहरीली गैसों के रिसाव की जानकारी तत्काल हमारे मोबाइल पर मिल जाएगी और बड़ी जनहानि की घटना बच जाएगी। 
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रियाना गांव के रहने वाले किसान तुलसीराम पटेल के 30 वर्षीय बेटे चंद्रभान पटेल ने आईआईटी इंदौर में यह डिवाइस बनाई है। सबसे बड़ी बात ये है कि इस डिवाइस को बनाने में दो साल लग गया। इसकी कीमत भी 15 से 20 हजार है, जबकि बाजार में यह डेढ़ लाख रुपये कीमत की है।
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इस डिवाइस के बारे में चंद्रभान ने बताया कि उद्योगों, सीवरेज और कोयला खदानों में निकलने वाली जहरीली गैसों से बड़े हादसे हो चुके हैं।भोपाल गैस कांड भी जहरीली गैस लीक होने से हुआ था,लेकिन इसके बाद भी कोई ऐसी डिवाइज नहीं बन पाई थी जिससे इन जहरीली गैसों की जानकारी मिल सके। भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान आईआईटी इंदौर में उन्होंने यह डिवाइज तैयार की है जो जहरीली गैसों के रिसाव होने पर एलर्ट करेगी।
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एप के माध्यम से चलती है डिवाइस
इस डिवाइस को तैयार करने वाले चंद्रभान और उनकी टीम का कहना है कि यह औद्योगिक परिसर, सीवरेज के 20 मीटर के दायरे में गैस का रिसाव होने पर तत्काल सूचित करेगी।चंद्रभान पटेल ने बताया कि हमने ई नोज डिवाइस फोर गैस सेंसर जहरीली गैसों की निगरानी के लिए तैयार की है।इस डिवाइस को मोबाइल एप क्वांटेक एल 2 से जोड़ा गया है।इससे गैसों के स्तर की सही टाइमिंग की जानकारी मिलेगी। गैस लीक होने पर एप तुरंत एलर्ट जारी करेगा और डिवाइस में लगा अलार्म बजने लगेगा।डिवाइस में फीड मोबाइल नंबरों पर पहले मैसेज जाएगा और कोई रिप्लाई न मिलने पर लगातार काल जायेगा।इस तरह से जहरीली गैस से होने वाला बड़ा हादसा टल जायेगा। इसकी कीमत से 15 से 20 हजार रुपये है।उद्योगों, खदानों और सीवरेज में हाइड्रोजन सल्फाइड, कार्बन मोनोआक्साइड, कार्बन डाईआक्साइड और नाईट्रोजन डाईआक्साइड गैस पाई जाती है। इन गैसों की मात्रा जब निर्धारित मापदंड से अधिक हो जाती है तो यह इंसानों के लिए खतरनाक हो जाती है।


युवा वैज्ञानिक की मिल चुकी है उपाधि
चंद्रभान पटेल आईआईटी इंदौर में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग में पीएचडी की डिग्री कर रहे हैं। उन्हें मध्य प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2022 के लिए युवा वैज्ञानिक की उपाधि मिली है। उन्होंने 15 रिसर्च पेपर और 5 भारतीय पेटेंट की खोज की है। उनके काम के लिए आईआईटी इंदौर के द्वारा बेस्ट टेक्नोलॉजी अवार्ड 2023 भी दिया गया हैं। चंद्रभान पटेल के स्टार्टअप के लिए आईआईटी मुंबई द्वारा दस लाख रुपये और आई आईटी इंदौर के द्वारा दो लाख रुपये प्रदान किये हैं।उनकी इस खोज के लिए भारत सरकार द्वारा पेटेंट ग्रांट भी हो चुका हैं। इस खोज में इनकी पूरी टीम चंद्रभान पटेल, डॉक्टर पल्लबी मुखर्जी, मयंक दुबे एंड सुमित चौधरी ने प्रोफेसर शैबाल मुख़र्जी के मार्गदर्शन में काम किया है। प्रोफेसर शैवाल मुखर्जी इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग आइआइटी इंदौर ने बताया की हम सुरक्षित और टिकाऊ भविष्य व आत्मनिर्भर भारत के विकास में सक्रिय रूप से योगदान करते हैं। आइआइटी इंदौर के शोधार्थियों द्वारा विकसित की गई यह तकनीक हानिकारक गैसों के रिसाव के संबंध में समय रहते अलर्ट करके हादसे रोकने में कारगर साबित होगी।
 
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