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Damoh News: बदली गई भगवान जागेश्वरनाथ शिवलिंग की जलहरी, दो दिन गर्भ गृह में नहीं मिलेगा प्रवेश
Tue, 25 Mar 2025 10:47 AM IST
दमोह ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
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Published by: दमोह ब्यूरो
Updated Tue, 25 Mar 2025 10:47 AM IST
सार
जलहरी बदलने के दौरान श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश नहीं दिया गया और केवल बाहर से ही दर्शन किए गए। इस काम के लिए बनारस से आए कारीगरों ने सावधानी से पुरानी जलहरी को निकाला और नई जलहरी स्थापित की।
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शिवलिंग के चारों ओर लगी नई जलहरी।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दमोह जिले सहित बुंदेलखंड के प्रसिद्ध तीर्थ क्षेत्र बांदकपुर में विराजमान भगवान जागेश्वरनाथ शिवलिंग की जलहरी दस साल बाद बदली गई है। रविवार की रात 11 बजे से भगवान की शयन आरती के बाद बनारस से आए कारीगरों द्वारा जलहरी बदलने का काम शुरू हुआ। जो सोमवार सुबह 6 बजे तक चला। इसमें सात घंटे का समय लगा। सोमवार और मंगलवार को श्रद्धालु गर्भ गृह में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। जलहरी बदलने के बाद भगवान का विधि-विधान से पूजन हुआ। इस दौरान श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश नहीं दिया गया। केवल बाहर से ही भगवान जागेश्वरनाथ के दर्शन हुए।
वहीं सोमवार की रात पुनः भगवान की शयन आरती के बाद नई जलहरी स्थापित करने का काम शुरू हुआ जो मंगलवार की सुबह तक चला। मंगलवार को भी श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश नहीं मिलेगा और बाहर से ही भगवान के दर्शन मिलेंगे। इस दौरान जलाभिषेक भी नहीं कर पाएंगे।
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मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधक रामकृपाल पाठक का कहना है कि शिवलिंग हर साल बढ़ता है। शिवलिंग की मोटाई बढ़ने का प्रमाण शिवलिंग की जलहरी है। जिसे दस वर्ष में बदलनी पड़ती है। इसके पहले वर्ष 2014 में जलहरी बदली गई थी। मंदिर समिति के सदस्य अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि भगवान जागेश्वरनाथ शिवलिंग की जलहरी बदलने का काम शुरू हो गया है। कारीगरों द्वारा पूरी सावधानी के साथ रात भर पुरानी जलहरी को निकाला गया। इसके बाद नई जलहरी लगाई जाएगी। ये काम मंगलवार की सुबह तक पूरा होगा। इस कारण मंगलवार को भी श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश नहीं मिलेगा और बाहर से ही दर्शन होंगे। कारीगरों के अनुसार जलहरी को पूरी तरह से स्थापित होने में 24 घंटे का समय लगेगा। इस श्रद्धालुओं को बुधवार से ही गर्भगृह में प्रवेश मिलेगा।
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बनारस से तैयार हुई 55 किलो वजनी जलहरी
भगवान जागेश्वरनाथ महादेव की जलहरी बदलने के लिए काशी बनारस के कारीगरों को बुलाया गया है। उन्हीं के द्वारा 55 किलो वजनी चांदी की जलहरी तैयार की गई है। जिसे बनारस में ही तैयार किया गया है, जबकि पहले वाली जलहरी का वजन 45 किलो था। इसके पहले वर्ष 2014 में जलहरी बदली गई थी। मंदिर प्रबंधन द्वारा जलहरी बदलने के लिए जिला न्यायाधीश से अनुमति ली गई है। यह कार्य ट्रस्ट के सदस्यों एवं मंदिर के पुजारियों की देखरेख में चल रहा है।
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वहीं सोमवार की रात पुनः भगवान की शयन आरती के बाद नई जलहरी स्थापित करने का काम शुरू हुआ जो मंगलवार की सुबह तक चला। मंगलवार को भी श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश नहीं मिलेगा और बाहर से ही भगवान के दर्शन मिलेंगे। इस दौरान जलाभिषेक भी नहीं कर पाएंगे।
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मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधक रामकृपाल पाठक का कहना है कि शिवलिंग हर साल बढ़ता है। शिवलिंग की मोटाई बढ़ने का प्रमाण शिवलिंग की जलहरी है। जिसे दस वर्ष में बदलनी पड़ती है। इसके पहले वर्ष 2014 में जलहरी बदली गई थी। मंदिर समिति के सदस्य अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि भगवान जागेश्वरनाथ शिवलिंग की जलहरी बदलने का काम शुरू हो गया है। कारीगरों द्वारा पूरी सावधानी के साथ रात भर पुरानी जलहरी को निकाला गया। इसके बाद नई जलहरी लगाई जाएगी। ये काम मंगलवार की सुबह तक पूरा होगा। इस कारण मंगलवार को भी श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश नहीं मिलेगा और बाहर से ही दर्शन होंगे। कारीगरों के अनुसार जलहरी को पूरी तरह से स्थापित होने में 24 घंटे का समय लगेगा। इस श्रद्धालुओं को बुधवार से ही गर्भगृह में प्रवेश मिलेगा।
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बनारस से तैयार हुई 55 किलो वजनी जलहरी
भगवान जागेश्वरनाथ महादेव की जलहरी बदलने के लिए काशी बनारस के कारीगरों को बुलाया गया है। उन्हीं के द्वारा 55 किलो वजनी चांदी की जलहरी तैयार की गई है। जिसे बनारस में ही तैयार किया गया है, जबकि पहले वाली जलहरी का वजन 45 किलो था। इसके पहले वर्ष 2014 में जलहरी बदली गई थी। मंदिर प्रबंधन द्वारा जलहरी बदलने के लिए जिला न्यायाधीश से अनुमति ली गई है। यह कार्य ट्रस्ट के सदस्यों एवं मंदिर के पुजारियों की देखरेख में चल रहा है।
