{"_id":"66b6dd76c9d7fcb1f5083cfa","slug":"damoh-the-forest-department-caught-more-than-10-snake-charmers-who-were-cruel-to-snakes-and-released-them-into-the-forest-damoh-news-c-1-1-noi1223-1982056-2024-08-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Damoh News: 10 से ज्यादा सपेरों को वन विभाग की टीम ने पकड़ा, सांपों को जंगल में छोड़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Damoh News: 10 से ज्यादा सपेरों को वन विभाग की टीम ने पकड़ा, सांपों को जंगल में छोड़ा
Sat, 10 Aug 2024 10:54 AM IST
दमोह ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
Published by: दमोह ब्यूरो
Updated Sat, 10 Aug 2024 10:54 AM IST
सार
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के अंतर्गत यह कानूनी अपराध है। नाग पंचमी पर सांपों की पूजा करने का मतलब उन्हें संरक्षित करना है। सपेरों से पूछताछ करने के बाद हिदायत देकर छोड़ दिया गया है।
विज्ञापन
वन विभाग द्वारा पकड़े गए सपेरे
विस्तार
दमोह में नाग पंचमी पर्व के दिन वन विभाग ने ऐसे सपेरों को पकड़ा जो सांपों को क्रूरता पूर्वक टोकनी में रखकर लोगों के घरों पर जा रहे थे। सूचना मिलने के बाद वन अमला मौके पर पहुंचा और दस से अधिक सपेरों के पास से सापों को मुक्त कराकर उन्हें जंगल में छोड़ा और सपेरों को समझाइश दी गई।
बता दें कि नाग पंचमी पर सांपों को इस तरह से लेकर घूमना प्रतिबंधित है। इसके बाद भी सपेरे नहीं मानते और चोरी छिपे सांपों को जंगल से पकड़कर उनके साथ क्रूरता करते हुए टोकनी में रख लेते हैं और घरों में जाकर लोगों से दूध पिलाते हैं।शुक्रवार को इसी तरह के कई सपेरे शहर में घूम रहे थे। जिसकी जानकारी 'हमारे दमोह' नाम से बने एक ग्रुप को लगी।
टीम में नेतृत्व कर्ता एनीमल राइट्स एक्टिविस्ट प्रांशुल पारोचे, स्वेता श्रीवास्तव, हर्षवर्धन नेमा ने जानकारी जुटाई और वन विभाग को सूचित किया। किल्लाई नाके पर दस से अधिक सपेरों को पकड़ा और उसके बाद उन्हें रेंज कार्यालय लाया गया।
विज्ञापन
कई सपेरों ने सांप के मुंह को सिल दिया था, किसी ने दांत तोड़ दिए थे और सांप की विष ग्रंथि को गर्म लोहे के सरिया से जलाया गया था। ताकि, वे लोगों के स्पर्श करते समय उन पर हमला न करें। इन सांपों को सपेरों ने लोगों के घरों से पकड़ा था। जिन्हें जंगल में न छोड़कर नाग पंचमी के लिए अपने पास रख लिया।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के अंतर्गत यह कानूनी अपराध है। नाग पंचमी पर सांपों की पूजा करने का मतलब उन्हें संरक्षित करना है। उनके साथ इस तरह की क्रूरता नहीं की जानी चाहिए। वन विभाग की टीम ने सपेरों से पूछताछ की उन्हें हिदायत देकर छोड़ दिया गया है। डीएफओ महेंद्र सिंह उईके ने सपेरों को चेतावनी दी कि अगर, दोबारा ऐसा करते हुए पकड़े गए तो कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
बता दें कि नाग पंचमी पर सांपों को इस तरह से लेकर घूमना प्रतिबंधित है। इसके बाद भी सपेरे नहीं मानते और चोरी छिपे सांपों को जंगल से पकड़कर उनके साथ क्रूरता करते हुए टोकनी में रख लेते हैं और घरों में जाकर लोगों से दूध पिलाते हैं।शुक्रवार को इसी तरह के कई सपेरे शहर में घूम रहे थे। जिसकी जानकारी 'हमारे दमोह' नाम से बने एक ग्रुप को लगी।
विज्ञापन
टीम में नेतृत्व कर्ता एनीमल राइट्स एक्टिविस्ट प्रांशुल पारोचे, स्वेता श्रीवास्तव, हर्षवर्धन नेमा ने जानकारी जुटाई और वन विभाग को सूचित किया। किल्लाई नाके पर दस से अधिक सपेरों को पकड़ा और उसके बाद उन्हें रेंज कार्यालय लाया गया।
विज्ञापन
कई सपेरों ने सांप के मुंह को सिल दिया था, किसी ने दांत तोड़ दिए थे और सांप की विष ग्रंथि को गर्म लोहे के सरिया से जलाया गया था। ताकि, वे लोगों के स्पर्श करते समय उन पर हमला न करें। इन सांपों को सपेरों ने लोगों के घरों से पकड़ा था। जिन्हें जंगल में न छोड़कर नाग पंचमी के लिए अपने पास रख लिया।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के अंतर्गत यह कानूनी अपराध है। नाग पंचमी पर सांपों की पूजा करने का मतलब उन्हें संरक्षित करना है। उनके साथ इस तरह की क्रूरता नहीं की जानी चाहिए। वन विभाग की टीम ने सपेरों से पूछताछ की उन्हें हिदायत देकर छोड़ दिया गया है। डीएफओ महेंद्र सिंह उईके ने सपेरों को चेतावनी दी कि अगर, दोबारा ऐसा करते हुए पकड़े गए तो कार्रवाई की जाएगी।
