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हैरानी: दर्द से तड़पती थी बुजुर्ग महिला, डॉक्टरों ने जांच की तो चौंके; नाक में मिले जिंदा कीड़े
Sun, 01 Nov 2026 02:41 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sun, 01 Nov 2026 02:41 PM IST
सार
दमोह जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने 70 वर्षीय महिला की नाक से एंडोस्कोपिक तकनीक की मदद से मक्खी के 60 जीवित लार्वा निकाले। महिला नाक से खून बहने और तेज दर्द से परेशान थीं। सफल उपचार के बाद उनकी हालत में सुधार हुआ और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
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दमोह जिला अस्पताल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दमोह जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने एंडोस्कोपिक तकनीक का उपयोग करके एक 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला की नाक से मक्खी के 60 लार्वा निकाले हैं। महिला नाक से लगातार खून बहने और तेज दर्द से पीड़ित थीं। जब वह इलाज के लिए अस्पताल पहुंचीं तो नाक-कान-गला विशेषज्ञ डॉ. विशाल शुक्ला ने उनकी एंडोस्कोपिक जांच की। जांच के दौरान महिला की नाक के भीतर बड़ी संख्या में जीवित लार्वा चलते हुए दिखाई दिए। महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों की टीम ने उन्हें तत्काल ऑपरेशन थिएटर में भर्ती कराया।
एंडोस्कोपिक विधि से दो बार में निकाले लार्वा
ऑपरेशन थिएटर में एंडोस्कोपिक तकनीक की मदद से महिला का उपचार शुरू किया गया। पहली बार में डॉक्टरों ने नाक के अंदर से करीब 45 लार्वा बाहर निकाले। इसके बाद दूसरी प्रक्रिया चलाकर लगभग 10 से 15 लार्वा और निकाले गए। इस तरह दो चरणों में चली इस प्रक्रिया से कुल 60 लार्वा बाहर निकाले जा सके। सफल उपचार के बाद बुजुर्ग महिला की हालत में सुधार आया, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी।
ये भी पढ़ें- प्रदेश के सभी सरकारी अस्पताल आज से कागज-रहित, सेहत का रिकॉर्ड अब डिजिटल
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मक्खी के अंडों से नाक में बने लार्वा
नाक-कान-गला विशेषज्ञ डॉ. विशाल शुक्ला ने बताया कि मक्खी ने महिला की नाक में अंडे दिए थे, जिनसे ये लार्वा विकसित हो गए थे। यदि सही समय पर जांच और इलाज नहीं मिलता तो महिला की स्थिति अत्यंत गंभीर हो सकती थी। उन्होंने कहा कि सितंबर से दिसंबर के महीनों के बीच इस प्रकार की स्वास्थ्य समस्या होने की आशंका अधिक बनी रहती है। ऐसे मौसम में बुजुर्गों की देखरेख का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है।
बुजुर्गों के बचाव और सावधानी के उपाय
डॉक्टर ने सलाह दी है कि बुजुर्गों को मच्छरदानी में सुलाना चाहिए और उनकी साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। यदि किसी बुजुर्ग की नाक से दुर्गंध आए, खून निकले या कोई अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें तो परिजनों को तत्काल डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
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एंडोस्कोपिक विधि से दो बार में निकाले लार्वा
ऑपरेशन थिएटर में एंडोस्कोपिक तकनीक की मदद से महिला का उपचार शुरू किया गया। पहली बार में डॉक्टरों ने नाक के अंदर से करीब 45 लार्वा बाहर निकाले। इसके बाद दूसरी प्रक्रिया चलाकर लगभग 10 से 15 लार्वा और निकाले गए। इस तरह दो चरणों में चली इस प्रक्रिया से कुल 60 लार्वा बाहर निकाले जा सके। सफल उपचार के बाद बुजुर्ग महिला की हालत में सुधार आया, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी।
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मक्खी के अंडों से नाक में बने लार्वा
नाक-कान-गला विशेषज्ञ डॉ. विशाल शुक्ला ने बताया कि मक्खी ने महिला की नाक में अंडे दिए थे, जिनसे ये लार्वा विकसित हो गए थे। यदि सही समय पर जांच और इलाज नहीं मिलता तो महिला की स्थिति अत्यंत गंभीर हो सकती थी। उन्होंने कहा कि सितंबर से दिसंबर के महीनों के बीच इस प्रकार की स्वास्थ्य समस्या होने की आशंका अधिक बनी रहती है। ऐसे मौसम में बुजुर्गों की देखरेख का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है।
बुजुर्गों के बचाव और सावधानी के उपाय
डॉक्टर ने सलाह दी है कि बुजुर्गों को मच्छरदानी में सुलाना चाहिए और उनकी साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। यदि किसी बुजुर्ग की नाक से दुर्गंध आए, खून निकले या कोई अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें तो परिजनों को तत्काल डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
