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Damoh: जिस मार्ग से निकले आचार्यश्री, उसके बाद पता लगा यहां से जा सकते हैं कुंडलपुर, हथकरघा की रखी गई थी नींव
Mon, 19 Feb 2024 09:57 AM IST
शबाहत हुसैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
Published by: शबाहत हुसैन
Updated Mon, 19 Feb 2024 09:57 AM IST
सार
Damoh: जिले के जबेरा ब्लाक अंतर्गत आने वाले घटेरा, गड़िया, चंदपुरा, घाट पिपरिया जैसे जंगली मार्ग से जब आचार्य विद्यासागर जी महाराज का विहार हुआ, तब पता चला कि इस रास्ते से होते हुए भी कुंडलपुर पहुंचा जा सकता है। उसके पहले किसी को भी इस बात का अंदेशा नहीं था की यह मार्ग सीधे कुंडलपुर को जोड़ेगा। आचार्यश्री का 1990 से लेकर 2021 तक तीन बार बनवार अंचल से पद बिहार हुआ था। जिसमें तीनों बार बनवार ग्राम में उनकी आहारचर्या हुई।
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आचार्य विद्यासागर जी महाराज
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
1990 में पहली बार बनवार से घटेरा, गढ़िया, चंदपुरा, घाट पिपरिया होते हुए कुंडलपुर के लिए उनका बिहार हुआ था। इसके पहले इस रास्ते से भी कुंडलपुर जाया जा सकता है इसकी जानकारी किसी को नहीं थी। जब आचार्यश्री का बिहार इस रास्ते से 1990 से लेकर 2016 में दो बार हुआ तो लोगों को इस बहु उपयोगी रास्ते की जानकारी लगी।
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आचार्यश्री का बिहार बनवार से होते हुए घटेरा, गढ़िया, चंदपुरा, घाट पिपरिया से कुंडलपुर को हुआ तो इस रास्ते की अहमियत क्षेत्र वासियों को पता लगी और इस मार्ग की खोज आचार्यश्री के द्वारा की गई। उनकी देन होने की वजह मार्ग निर्माण भी किया गया जो आज क्षेत्र वासियों के लिए दमोह- कटनी मार्ग से जोड़ने वाला बहु उपयोगी मार्ग साबित हो रहा है।
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आचार्यश्री के द्वारा रखी गई हथकरघा की नींव
परस्वाहा गांव में संचालित गले मिले हथकरघा केंद्र की नींव से लेकर शुभारंभ भी आचार्यश्री के कार्यक्रमों से हुआ।वर्ष 2016 में जब आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का बिहार बनवार गांव के लिए हुआ था। इस दौरान बनवार गांव से गले मिले हथकरघा केंद्र की नींव आचार्यश्री की प्रेरणा से रखी गई थी। जिसके 4 साल बाद 30 नवंबर 2021 को आचार्यश्री के द्वारा गले मिले हथकरघा का शुभारंभ किया गया था। नोहटा, रोंड़, बनवार मार्ग पर धुंनगी एवं शून्य नदी पर बने महादेव घाट सेतु पर 30 नवंबर 2021 को आचार्यश्री के चरण पड़ते ही इन दोनों सेतु का लोकार्पण हो गया था।
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