फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   cm shivraj singh chouhan jibe congress candidate arun yadav budhni seat fight

मध्य प्रदेश चुनाव: शिवराज को अपने विरोधी अरुण यादव पर अचानक इतना प्यार क्यों आ गया?

Fri, 09 Nov 2018 01:36 PM IST
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 09 Nov 2018 01:36 PM IST
विज्ञापन
cm shivraj singh chouhan jibe congress candidate arun yadav budhni seat fight
शिवराज के सामने बुधनी में हैं अरुण यादव
मध्यप्रदेश चुनाव की सबसे वीआईपी सीट, यानी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विधानसभा क्षेत्र बुधनी पर घमासान अब तय हो चुका है। इसका कुछ अंदाजा आज शिवराज सिंह के बयानों की लड़ी से लगा जिसका मकसद दिवाली बाद चुनावी पटाखों से विरोधी खेमे में चिंगारी सुलगाना था।
विज्ञापन


शिवराज ने बुधनी से कांग्रेस उम्मीदवार अरुण यादव पर 'प्यार और सहानुभूति' बरसाने के बहाने विरोधियों को कई मोर्चों पर घेरने की कोशिश की। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, "तीन महीने में अरुण यादव के साथ दो बार अन्याय हुआ है। पहले अध्यक्ष पद से हटाया फिर बुधनी से टिकट दे दिया।"
विज्ञापन


शिवराज ने एक बयान से कई निशाने साधने की कोशिश की है। दरअसल, कांग्रेस ने काफी विचार मंथन के बाद बुधनी से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव को शिवराज के सामने खड़ा किया है। अरुण यादव कुछ वक्त पहले तक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे। लेकिन अप्रैल में उनकी जगह कद्दावर नेता कमलनाथ के हाथों में पार्टी ने प्रदेश की कमान सौंपना मुनासिब समझा। अंदरखाने कहा गया कि इससे अरुण यादव आहत हुए हैं। यादव ने यहां तक कहा कि वो अब कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे। न विधानसभा, न लोकसभा। आपको बता दें कि यादव दो बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं। लेकिन, बाद में सब ठीक हो गया। अरुण यादव ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी का हर फैसला मान्य है। कमलनाथ पर भरोसा है और प्रदेश में बदलाव की जरूरत थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


शिवराज, अरुण यादव की पुरानी दुखती रग को टटोल कर दर्द उठने का इंतजार कर रहे हैं, जो ताजा घटनाक्रम देखते हुए दूर की कौड़ी ही दिखती है। दूसरा, बुधनी से यादव के लड़ने की बात करते हुए वो जताना चाहते है कि ये शायद अरुण यादव के लिए 'राजनीतिक आत्महत्या' का मामला साबित होने जा रहा है। शिवराज कहना चाहते हैं कि बुधनी के मैदान में उनके सामने कोई नहीं टिक सकता। ये मनोवैज्ञानिक जीत हासिल करने का पैंतरा है। 


शिवराज यहीं नहीं रुके। उन्होंने तो ओबीसी कार्ड भी खेल दिया। उन्होंने कहा, " हम सीधे सादे पिछड़े लोग हैं। कई बार शिकार होते रहते हैं।"

माना जा रहा है कि ओबीसी वोट अपने पाले में खींचने के लिए ही कांग्रेस ने अरुण यादव पर दांव खेला है। बता दें कि शिवराज सिंह भी ओबीसी के किरार समुदाय से आते हैं। बुधनी कहने को शिवराज का गढ़ है। अपना पहला चुनाव शिवराज ने सीहोरी जिले की इसी सीट से 1990 में जीता था। 2006 के उपचुनाव में सीएम पद पर रहते हुए उन्होंने यहां जीत हासिल की। जिसके बाद 2008 और 2013 के चुनावों में भी वो बुधनी से विजयी हुए। इस बार देखना दिलचस्प होगा कि शिवराज जीत की परंपरा कायम रख पाते हैं या नहीं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed