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MP News: ये युवक पुरोहित का काम करने गया था अमेरिका, फिर ऐसा फंसा कि 13 साल बाद PM मोदी की मदद से लौटा भारत
Tue, 08 Oct 2024 08:47 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुुर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Tue, 08 Oct 2024 08:47 PM IST
सार
मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में रहने वाले कृष्ण कुमार द्विवेदी को पता नहीं था कि भारत से अमेरिका जाना तो आसान होगा पर लौटने में उन्हें 14 साल लग जाएंगे। इस अमरीकी वनवास की वजह से वे न तो अपनी मां की अर्थी को कंधा दे पाए और न ही अपने भाई-बहन की शादी में शामिल हो सके।
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कृष्ण कुमार द्विवेदी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छतरपुर के जुझार नगर थाना क्षेत्र में रहने वाले कृष्ण कुमार द्विवेदी को पता नहीं था कि भारत से अमेरिका जाना तो हो जाएगा, लेकिन लौटना कितना मुश्किल होगा। यह उन्होंने बीते 14 साल में महसूस किया। वीजा की समय अवधि खत्म होने के कारण वह वह शिकांगो में ही फंसकर रह गए थे।जहां से वह 14 साल बाद अपने स्वदेश आ सके हैं। अपने गांव पहुंचकर उन्होंने राहत की सांस ली।
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कृष्ण कुमार द्विवेदी पुत्र बाबूराम द्विवेदी जो अपने घर से साल 2008 में स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती चैरिटेबल ट्रस्ट नैनी इलाहाबाद गए थे, जिनका अच्छा कार्य होने पर संस्था की तरफ से उन्हें 26 जनवरी 2011 को 50 महर्षि वैदिक पंडितों के साथ अमेरिका शिकागो भेजा गया।
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अलग होकर शिकागो सिटी घूमने चले गए
शिकागो में संस्था के नियम अनुसार, जिस वैदिक पंडित का आचरण अच्छा हुआ, तो उसे दो साल की जगह तीन साल वैदिक महर्षि आश्रम शिकागो में रहने को मिल जाता था। लेकिन कृष्ण कुमार द्विवेदी उन 50 वैदिक पंडितों में से कुछ वैदिक पंडितों के साथ अलग होकर शिकागो सिटी घूमने चले गए, जहां वो उस संस्था से छह दिन बाहर रहे।
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कृष्ण कुमार कहते हैं, मैंने इस दौरान बहुत कुछ खोया है। माताजी का देहांत हो गया, उसमें भी मैं शामिल नहीं हो सका। बड़ी बहन, बड़े भाई की शादी में भी नहीं आ पाया। वहीं, वह अपने लिए नौकरी की तलाश करने लगे, जबकि उन्हें यह मालूम नहीं था कि शिकागो में रुकने के लिए एक समय सीमा निर्धारित होती है। लवकुश नगर जिले के जुझारनगर थाना क्षेत्र में रहने वाले कृष्ण कुमार द्विवेदी को नहीं पता था कि भारत से अमेरिका जाना तो हो जाएगा, लेकिन लौटना कितना मुश्किल होगा। यह उन्होंने बीते 13 साल में महसूस किया।
13 साल सात माह तक किया इंतजार
वीजा की समय अवधि खत्म होने के कारण वह वह शिकागो में ही फंसकर रह गए थे, जहां से वह 13 साल सात माह की लंबी अवधि के बाद शनिवार को गांव लौट सके। दरअसल, कृष्ण कुमार द्विवेदी पुत्र बाबूराम द्विवेदी 2008 में स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती चैरिटेबल ट्रस्ट नैनी इलाहाबाद गए थे।
फिर काम आई पीएम मोदी की लोकप्रियता
हाल ही में छतरपुर अपने गांव लौटे कृष्ण कुमार ने बताया कि इस बुरे वक्त में जब उन्होंने हार मान ली तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का उन्हें फायदा मिला। कृष्ण के मुताबिक, पीएम मोदी के प्रभाव से अमेरिका सरकार ने वीजा खत्म होने के बाद भी उन्हें रहने की अनुमति दी। इसके साथ ही वहां के लोग भारतीय होने के कारण उनका सम्मान करते रहे। इसके बाद उन्हें लगातार मदद मिलने लगी और वे आखिरकार स्वेदेश लौटने में कामयाब रहे। रविवार को जब उन्हें अपने गांव अपने घर आने का मौका मिला तो गांव मोहल्ले के लोगों ने ढोल-नगाड़े गाजे बजाकर कृष्ण कुमार का स्वागत सम्मान किया।
