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गोलगप्पे बेच रही है स्पेशल ओलंपिक पदक विजेता

Thu, 11 Apr 2013 04:38 PM IST
जबलपुर/अमर उजाला नेटवर्क
जबलपुर/अमर उजाला नेटवर्क Updated Thu, 11 Apr 2013 04:38 PM IST
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Bronze medallist Paralympian making 'panipuri' to survive

वर्ष 2011 में एथेंस में हुए स्पेशल ओलंपिक में दो कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन करने वाली भारत की सीता साहू गोलगप्पे बेचने को मजबूर हैं।

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15 साल की इस मेंटली चैलेंज्ड एथलीट ने देश के लिए अपने गले में पदक पहनते हुए सपने में भी ऐसे दिनों की कल्पना नहीं की होगी।

जबलपुर स्थित रीवा की सीता साहू का उभरता कैरियर खेल प्रशासन द्वारा नजरअंदाज किए जाने से समय से पहले ही दम तोड़ता नजर आ रहा है।

यही वजह है कि इस बहुमूल्य प्रतिभा की धनी एथलीट को अब गोलगप्पे बेचने के काम में अपनी मां का हाथ बंटाना पड़ रहा है।  

सीता की परियों सरीखी कहानी में दो खूबसूरत मोड़ आए। पहला तब जब उसे 7 अन्य बच्चों के साथ 8 जून 2011 को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के घर जाकर चाय पीने का मौका मिला।
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और दूसरा तब जब वह एथेंस से जुलाई 2011 में स्पेशल ओलंपिक से दो कांस्य पदक जीतकर लौटी।

कामयाबी की यह कहानी उसने 200 मीटर और 1600 मीटर के स्पेशल गेम में लिखी। मगर अब तकदीर उसे सपनों की उस दुनिया से खींचकर धरातल की कठोर सच्चाई तक खींच लाई है।
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