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पदोन्नति: जनजातीय विभाग ने 264 शिक्षकों को बनाया व्याख्याता, 32 हजार शिक्षक को इंतजार, शिक्षक संगठन नाराज

Mon, 12 Oct 2026 03:12 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Mon, 12 Oct 2026 03:12 PM IST
सार

जनजातीय कार्य विभाग ने 264 शिक्षकों को व्याख्याता पद पर पदोन्नति दी है, जबकि स्कूल शिक्षा विभाग के 32 हजार से अधिक शिक्षकों की पदोन्नति लंबित होने का दावा शिक्षक संगठन ने किया है। संगठन ने दो विभागों में अंतर पर सवाल उठाते हुए नियमित पदोन्नति और लंबित मामलों के जल्द निराकरण की मांग की है।

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Promotion: Tribal Department promotes 264 teachers to the post of Lecturer; 32,000 teachers still waiting; tea
डीपीआई - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 मध्यप्रदेश में शिक्षकों की पदोन्नति को लेकर दो सरकारी विभागों की अलग-अलग तस्वीर सामने आई है। जनजातीय कार्य विभाग ने 264 उच्च श्रेणी शिक्षकों और प्रधानपाठकों को व्याख्याता के पद पर पदोन्नति दे दी, जबकि स्कूल शिक्षा विभाग के 32 हजार से अधिक शिक्षकों की पदोन्नति अब भी अटकी हुई है। लंबे समय से इंतजार कर रहे शिक्षकों के बीच इस अंतर को लेकर नाराजगी बढ़ रही है। शिक्षक संगठन का सवाल है कि जब एक ही प्रदेश में पदोन्नति के आदेश जारी हो सकते हैं, तो स्कूल शिक्षा विभाग में पात्र शिक्षकों को इसका लाभ क्यों नहीं मिल रहा?
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264 शिक्षकों को पदोन्नति, हजारों के मामले लंबित
शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल के मुताबिक, जनजातीय कार्य विभाग में पिछले कुछ महीनों के दौरान सहायक शिक्षकों को उच्च श्रेणी शिक्षक और उच्च श्रेणी शिक्षकों को व्याख्याता के पद पर पदोन्नति दी गई है। हाल ही में 264 उच्च श्रेणी शिक्षकों और प्रधानपाठकों को व्याख्याता बनाया गया है। इसके उलट, स्कूल शिक्षा विभाग में प्राथमिक शिक्षक, सहायक शिक्षक, माध्यमिक शिक्षक और उच्च श्रेणी शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया लंबित है। संगठन का कहना है कि इससे हजारों पात्र कर्मचारियों को सेवा में आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिल पा रहा है।
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दो साल से उच्च पद का प्रभार, नियमित पदोन्नति का इंतजार
पदोन्नति में देरी का असर उन शिक्षकों पर भी पड़ रहा है, जो करीब दो साल से उच्च पद का प्रभार संभाल रहे हैं। संगठन के अनुसार, इन शिक्षकों को जिम्मेदारी तो उच्च पद की दी गई, लेकिन नियमित पदोन्नति के आदेश अब तक जारी नहीं हुए हैं। शिक्षक संगठन का कहना है कि लंबे समय तक उच्च पद का दायित्व निभाने के बाद भी नियमित पदोन्नति नहीं मिलने से कर्मचारियों के सेवा हित प्रभावित हो रहे हैं। संगठन ने ऐसे मामलों का भी जल्द निराकरण करने की मांग की है।
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मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद भी देरी क्यों?
संगठन ने मुख्यमंत्री के निर्देशों के बावजूद स्कूल शिक्षा विभाग में पदोन्नति के आदेश जारी नहीं होने पर सवाल उठाए हैं। उपेंद्र कौशल का कहना है कि दोनों विभागों में शिक्षकों की योग्यता, अर्हता और सेवा शर्तें समान होने के बावजूद पदोन्नति के मामले में अलग-अलग स्थिति बनी हुई है।संगठन ने शासन और स्कूल शिक्षा विभाग से लंबित मामलों पर जल्द निर्णय लेने की मांग की है। साथ ही, पदोन्नति प्रक्रिया पूरी करने के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय करने की बात कही है, ताकि पात्र शिक्षकों को अनिश्चितकाल तक इंतजार न करना पड़े।


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अब फैसले का इंतजार
स्कूल शिक्षा विभाग के 32 हजार से अधिक शिक्षकों की पदोन्नति का मामला केवल प्रशासनिक देरी तक सीमित नहीं है। इससे कर्मचारियों के सेवा में आगे बढ़ने के अवसर और उच्च पदों पर नियमित नियुक्ति का सवाल भी जुड़ा है। शिक्षक संगठन चाहता है कि पात्रता के आधार पर लंबित मामलों का निराकरण किया जाए और प्रभार संभाल रहे शिक्षकों को भी नियमानुसार पदोन्नति का लाभ मिले। अब सवाल यह है कि जनजातीय कार्य विभाग में पदोन्नति के आदेश जारी होने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग कब निर्णय लेगा और हजारों शिक्षकों का इंतजार खत्म करने के लिए क्या समय-सीमा तय की जाएगी।

 
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