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एमपी में बिजली संकट पर सरकार का दावा: अगले सप्ताह 3 से 4 हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलने की उम्मीद
Fri, 16 Oct 2026 08:10 AM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Fri, 16 Oct 2026 08:10 AM IST
सार
मध्यप्रदेश में बिजली की बढ़ती मांग और उत्पादन में कमी के बीच अगले सप्ताह से राहत मिलने की उम्मीद है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के मुताबिक, बंद बिजली इकाइयों को शुरू करने और दूसरे स्रोतों से बिजली जुटाने के प्रयासों से 3 से 4 हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिल सकती है।
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बिजली संयंत्र (सांकेतिक)
- फोटो : एएनआई / रॉयटर्स
विस्तार
मध्यप्रदेश में बिजली की बढ़ती मांग और उत्पादन में कमी के बीच अलग-अलग जगह विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। जनप्रतिनिधि भी सरकार को पत्र लिखकर अघोषित कटौती बंद करने की मांग कर रहे हैं। साथ ही ग्रामीण इलाकों में बिजली उपलब्ध कराने को कह रहे हैं। इस बीच सरकार ने अगले सप्ताह से राहत मिलने की उम्मीद जताई है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के कहा कि प्रदेश को अगले सप्ताह तक 3 से 4 हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली उपलब्ध हो सकती है। इससे मौजूदा कमी दूर होने की संभावना है। सरकार का कहना है कि बिजली की मांग में पिछले साल के मुकाबले करीब 5 हजार मेगावाट की बढ़ोतरी हुई है। कम बारिश, ताप बिजली इकाइयों में तकनीकी खराबी और देशभर में बिजली की कमी के कारण आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है।
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एक साल में बिजली की मांग 11,874 से बढ़कर 17,124 मेगावाट
ऊर्जा मंत्री ने बताया कि 14 अक्टूबर 2025 को प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग 11,874 मेगावाट थी, जो 14 अक्टूबर 2026 को बढ़कर 17,124 मेगावाट हो गई। यानी एक साल में मांग करीब 5,250 मेगावाट बढ़ी है। कृषि क्षेत्र में भी बिजली की जरूरत तेजी से बढ़ी है। पिछले साल 1 अक्टूबर को खेती के लिए 1,752 मेगावाट बिजली की मांग थी, जबकि इस साल 1 अक्टूबर को यह बढ़कर 3,701 मेगावाट हो गई। कम बारिश वाले क्षेत्रों में सिंचाई और धान की फसल के लिए पलेवा को इसकी प्रमुख वजह बताया गया है। मांग बढ़ने के बावजूद इस साल 14 अक्टूबर तक पिछले साल की तुलना में 38.6 प्रतिशत अधिक बिजली दी गई। पिछले साल इस दिन 2,423 लाख यूनिट बिजली की आपूर्ति हुई थी, जबकि इस साल 3,310 लाख यूनिट बिजली दी गई।
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कम बारिश से जलविद्युत उत्पादन में 1,500 मेगावाट की कमी
प्रदेश में कम बारिश का असर जलविद्युत उत्पादन पर भी पड़ा है। गांधीसागर, ओंकारेश्वर, इंदिरा सागर, राजघाट और सरदार सरोवर परियोजनाओं से मिलने वाली बिजली में करीब 1,500 मेगावाट की कमी बताई गई है। इसके अलावा कोयले की कमी और तकनीकी समस्याओं के कारण ताप विद्युत इकाइयों के बंद होने से भी उत्पादन प्रभावित हुआ। ऊर्जा मंत्री के अनुसार, ताप विद्युत गृहों में तकनीकी दिक्कतों के चलते करीब 1,000 मेगावाट उत्पादन प्रभावित हुआ है।
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बिजली एक्सचेंज में भी महंगी बिजली
ऊर्जा मंत्री ने बताया कि 13 अक्टूबर को पीक आवर्स में इंडियन एनर्जी एक्सचेंज में बिजली खरीदने की अधिकतम बोली करीब 70 हजार मेगावाट रही, जबकि बेचने के लिए लगभग 500 मेगावाट बिजली उपलब्ध थी। इसकी दर भी करीब 10 रुपये प्रति यूनिट थी। प्रदेश में आपूर्ति बनाए रखने के लिए पीक आवर्स में उत्तर प्रदेश से 500 मेगावाट बिजली ली जा रही है। इसके साथ ही बिजली एक्सचेंज से खरीदने के प्रयास किए जा रहे हैं और वार्षिक रखरखाव के कारण बंद इकाइयों को जल्द शुरू करने की कोशिश की जा रही है।
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इन इकाइयों से बढ़ेगी बिजली की उपलब्धता
ऊर्जा मंत्री के मुताबिक, खंडवा के श्री सिंगाजी ताप विद्युत गृह और बिरसिंहपुर के संजय गांधी ताप विद्युत गृह की इकाइयों में रखरखाव के बाद उत्पादन दोबारा शुरू हो गया है। इससे करीब 1,000 मेगावाट बिजली की उपलब्धता बढ़ी है। 20 अक्टूबर 2026 तक लैंको पावर और एनटीपीसी गाडरवाड़ा की इकाइयों से भी करीब 600 मेगावाट बिजली मिलने की उम्मीद है। तकनीकी कारणों से बंद करीब 1,200 मेगावाट क्षमता की इकाइयों को भी एक से दो दिन में चालू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अलावा 16 अक्टूबर से बैंकिंग व्यवस्था के जरिए 500 मेगावाट बिजली मिलने की बात कही गई है। इन सभी उपायों से अगले सप्ताह तक 3 से 4 हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली उपलब्ध होने की उम्मीद जताई गई है।
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रबी सीजन के लिए भी बिजली जुटाने की तैयारी
सरकार ने रबी सीजन में बिजली की उपलब्धता बनाए रखने के लिए भी इंतजाम किए हैं। ऊर्जा मंत्री के अनुसार, पिछले साल 3,600 मिलियन यूनिट की तुलना में करीब 225 मिलियन यूनिट अतिरिक्त बिजली की अग्रिम बैंकिंग की गई है। इससे 1 नवंबर 2026 से 10 मार्च 2027 तक अलग-अलग अवधि में 407 से 3,900 मेगावाट बिजली मिलने की बात कही गई है। नवंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच 300 से 800 मेगावाट बिजली की अल्पकालिक खरीद के लिए निविदाएं भी आमंत्रित की गई हैं।
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एक साल में बिजली की मांग 11,874 से बढ़कर 17,124 मेगावाट
ऊर्जा मंत्री ने बताया कि 14 अक्टूबर 2025 को प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग 11,874 मेगावाट थी, जो 14 अक्टूबर 2026 को बढ़कर 17,124 मेगावाट हो गई। यानी एक साल में मांग करीब 5,250 मेगावाट बढ़ी है। कृषि क्षेत्र में भी बिजली की जरूरत तेजी से बढ़ी है। पिछले साल 1 अक्टूबर को खेती के लिए 1,752 मेगावाट बिजली की मांग थी, जबकि इस साल 1 अक्टूबर को यह बढ़कर 3,701 मेगावाट हो गई। कम बारिश वाले क्षेत्रों में सिंचाई और धान की फसल के लिए पलेवा को इसकी प्रमुख वजह बताया गया है। मांग बढ़ने के बावजूद इस साल 14 अक्टूबर तक पिछले साल की तुलना में 38.6 प्रतिशत अधिक बिजली दी गई। पिछले साल इस दिन 2,423 लाख यूनिट बिजली की आपूर्ति हुई थी, जबकि इस साल 3,310 लाख यूनिट बिजली दी गई।
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कम बारिश से जलविद्युत उत्पादन में 1,500 मेगावाट की कमी
प्रदेश में कम बारिश का असर जलविद्युत उत्पादन पर भी पड़ा है। गांधीसागर, ओंकारेश्वर, इंदिरा सागर, राजघाट और सरदार सरोवर परियोजनाओं से मिलने वाली बिजली में करीब 1,500 मेगावाट की कमी बताई गई है। इसके अलावा कोयले की कमी और तकनीकी समस्याओं के कारण ताप विद्युत इकाइयों के बंद होने से भी उत्पादन प्रभावित हुआ। ऊर्जा मंत्री के अनुसार, ताप विद्युत गृहों में तकनीकी दिक्कतों के चलते करीब 1,000 मेगावाट उत्पादन प्रभावित हुआ है।
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बिजली एक्सचेंज में भी महंगी बिजली
ऊर्जा मंत्री ने बताया कि 13 अक्टूबर को पीक आवर्स में इंडियन एनर्जी एक्सचेंज में बिजली खरीदने की अधिकतम बोली करीब 70 हजार मेगावाट रही, जबकि बेचने के लिए लगभग 500 मेगावाट बिजली उपलब्ध थी। इसकी दर भी करीब 10 रुपये प्रति यूनिट थी। प्रदेश में आपूर्ति बनाए रखने के लिए पीक आवर्स में उत्तर प्रदेश से 500 मेगावाट बिजली ली जा रही है। इसके साथ ही बिजली एक्सचेंज से खरीदने के प्रयास किए जा रहे हैं और वार्षिक रखरखाव के कारण बंद इकाइयों को जल्द शुरू करने की कोशिश की जा रही है।
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इन इकाइयों से बढ़ेगी बिजली की उपलब्धता
ऊर्जा मंत्री के मुताबिक, खंडवा के श्री सिंगाजी ताप विद्युत गृह और बिरसिंहपुर के संजय गांधी ताप विद्युत गृह की इकाइयों में रखरखाव के बाद उत्पादन दोबारा शुरू हो गया है। इससे करीब 1,000 मेगावाट बिजली की उपलब्धता बढ़ी है। 20 अक्टूबर 2026 तक लैंको पावर और एनटीपीसी गाडरवाड़ा की इकाइयों से भी करीब 600 मेगावाट बिजली मिलने की उम्मीद है। तकनीकी कारणों से बंद करीब 1,200 मेगावाट क्षमता की इकाइयों को भी एक से दो दिन में चालू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अलावा 16 अक्टूबर से बैंकिंग व्यवस्था के जरिए 500 मेगावाट बिजली मिलने की बात कही गई है। इन सभी उपायों से अगले सप्ताह तक 3 से 4 हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली उपलब्ध होने की उम्मीद जताई गई है।
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रबी सीजन के लिए भी बिजली जुटाने की तैयारी
सरकार ने रबी सीजन में बिजली की उपलब्धता बनाए रखने के लिए भी इंतजाम किए हैं। ऊर्जा मंत्री के अनुसार, पिछले साल 3,600 मिलियन यूनिट की तुलना में करीब 225 मिलियन यूनिट अतिरिक्त बिजली की अग्रिम बैंकिंग की गई है। इससे 1 नवंबर 2026 से 10 मार्च 2027 तक अलग-अलग अवधि में 407 से 3,900 मेगावाट बिजली मिलने की बात कही गई है। नवंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच 300 से 800 मेगावाट बिजली की अल्पकालिक खरीद के लिए निविदाएं भी आमंत्रित की गई हैं।
