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MP News: भोपाल में अगस्त में आएगी तीन डिब्बे की मेट्रो, पांच में से डेढ़ किमी ट्रेक पर पटरी बिछाने का काम पूरा
Fri, 30 Jun 2023 06:41 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Fri, 30 Jun 2023 06:41 PM IST
सार
मेट्रों के मॉक अप यानी डमी को स्मार्ट सिटी पार्क में रखा जाना प्रस्तावित है। यह जुलाई माह में भोपाल पहुंच जाएगी। यह मेट्रो की सभी सुविधा वाला डिब्बा होगा, जिसमें जनता बैठ कर मेट्रो का अनुभव ले सकेगी।
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भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भोपाल मेट्रो को पटरी पर दौड़ाने के लिए तेज गति से काम हो रहा है। सुभाष नगर से एम्स तक प्रायोरिटी कॉरिडोर में पटरी बिछाने के काम तेजी से किया जा रहा है। वहीं, ट्रायल के लिए मेट्रो के तीन डिब्बों का सेट अगस्त तक भोपाल आ जाएगा। मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने सितंबर में ट्रायल रन करने की समयसीमा तय की है।
मेट्रो रेल कॉपोरेशन ने सुभाष नगर से रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के बीच पांच किमी में ट्रायल रन करने की योजना बनाई है। शुरुआत में ट्रेन इन स्टेशनों के बीच दौड़ने की उम्मीद है। इस ट्रेक पर डेढ़ किलो मीटर में पटरी बिछाने का काम पूरा हो गया है। कॉपोरेशन के अधिकारियों का कहना है कि जुलाई में पटरी बिछाने का काम पूरा कर लिया जाएगा। बारिश से काम प्रभावित नहीं होगा। वहीं, उन्होंने बताया कि गुजरात के बड़ोदरा में बन रहे मेट्रो के डिब्बों का पहला सेट अगस्त तक भोपाल आ जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि मेट्रो का ट्रायल शुरुआत में सुभाष नगर से रानी कमलापति रेलवे स्टेशन तक पांच किलोमीटर में होगा। इसके बाद इसे एम्स तक पूरे 7.5 किमी रूट को जोड़ दिया जाएगा।
मॉक-अप स्मार्ट सिटी पार्क में रखा जाएगा
मेट्रों के मॉक अप यानी डमी को स्मार्ट सिटी पार्क में रखा जाना प्रस्तावित है। यह जुलाई माह में भोपाल पहुंच जाएगी। यह मेट्रो की सभी सुविधा वाला डिब्बा होगा, जिसमें जनता बैठ कर मेट्रो का अनुभव ले सकेगी। इसमें एलईडी, अनाउसमेंट, सीसीटीवी, सीटिंग अरेंजमेंट, इमरजेंसी अलार्म समेत सभी सुविधाएं होगी। मॉक-अप का उद्देश्य लोगों को मेट्रो के प्रति जागरूक करना है। इसे देखकर लोग मेट्रो की सुविधाओं को समझ और जान सकेंगे।
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मेट्रो को पटरी से मिलेगा करंट
भोपाल मेट्रो में करंट के लिए थर्ड टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जा रहा है। दरअसल, रेल में पावर सप्लाई दो तरीके से दी जाती है। पहला ओएचई, जिसमें रेलवे लाइन के ऊपर कैबल से पावर मिलता है। दूसरा पटरियों के बराबर से एक पटरी बिछाई जाती है। इससे करंट प्रवाहित होता है। इससे ही मेट्रो को पावर मिलती है। इसे ही थर्ड टेक्नोलॉजी कहते है। इस टेक्नोलॉजी की लागत कम होने के साथ ही मेंटेनेंस भी कम आता है। इसमें फाॅल्ट की संभावना भी कम हो जाती है।
यहां बन रहे आठ मेट्रो स्टेशन
भोपाल में 30.95 किमी का मेट्रो ट्रेक प्रस्तावित है। इसमें से साढ़े सात किमी का प्राॅयारिटी ट्रेक बनाया जा रहा है। इसमें सुभाष नगर से एम्स तक आठ मेट्रो स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इसमें से सुभाष नगर, केंद्रीय विद्यालय, बोर्ड ऑफिस चौराहा, एमपी नगर जोन.2, रानी कमलापति, डीआरएम ऑफिस, अल्कापुरी और एम्स में आठ स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इसमें से सुभाष नगर, बोर्ड ऑफिस चौराहा, एमपी नगर, रानी कमलापति रेलवे स्टेशन का सिविल कार्य करीब-करीब पूरा हो गया है। रेलवे स्ट्रेशन को 6 डिब्बों के अनुसार तैयार किया जा रहा है। हालांकि, शुरुआत में तीन-तीन डिब्बों के साथ ही मेट्रो दौड़ेगी।
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मेट्रो रेल कॉपोरेशन ने सुभाष नगर से रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के बीच पांच किमी में ट्रायल रन करने की योजना बनाई है। शुरुआत में ट्रेन इन स्टेशनों के बीच दौड़ने की उम्मीद है। इस ट्रेक पर डेढ़ किलो मीटर में पटरी बिछाने का काम पूरा हो गया है। कॉपोरेशन के अधिकारियों का कहना है कि जुलाई में पटरी बिछाने का काम पूरा कर लिया जाएगा। बारिश से काम प्रभावित नहीं होगा। वहीं, उन्होंने बताया कि गुजरात के बड़ोदरा में बन रहे मेट्रो के डिब्बों का पहला सेट अगस्त तक भोपाल आ जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि मेट्रो का ट्रायल शुरुआत में सुभाष नगर से रानी कमलापति रेलवे स्टेशन तक पांच किलोमीटर में होगा। इसके बाद इसे एम्स तक पूरे 7.5 किमी रूट को जोड़ दिया जाएगा।
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मॉक-अप स्मार्ट सिटी पार्क में रखा जाएगा
मेट्रों के मॉक अप यानी डमी को स्मार्ट सिटी पार्क में रखा जाना प्रस्तावित है। यह जुलाई माह में भोपाल पहुंच जाएगी। यह मेट्रो की सभी सुविधा वाला डिब्बा होगा, जिसमें जनता बैठ कर मेट्रो का अनुभव ले सकेगी। इसमें एलईडी, अनाउसमेंट, सीसीटीवी, सीटिंग अरेंजमेंट, इमरजेंसी अलार्म समेत सभी सुविधाएं होगी। मॉक-अप का उद्देश्य लोगों को मेट्रो के प्रति जागरूक करना है। इसे देखकर लोग मेट्रो की सुविधाओं को समझ और जान सकेंगे।
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मेट्रो को पटरी से मिलेगा करंट
भोपाल मेट्रो में करंट के लिए थर्ड टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जा रहा है। दरअसल, रेल में पावर सप्लाई दो तरीके से दी जाती है। पहला ओएचई, जिसमें रेलवे लाइन के ऊपर कैबल से पावर मिलता है। दूसरा पटरियों के बराबर से एक पटरी बिछाई जाती है। इससे करंट प्रवाहित होता है। इससे ही मेट्रो को पावर मिलती है। इसे ही थर्ड टेक्नोलॉजी कहते है। इस टेक्नोलॉजी की लागत कम होने के साथ ही मेंटेनेंस भी कम आता है। इसमें फाॅल्ट की संभावना भी कम हो जाती है।
यहां बन रहे आठ मेट्रो स्टेशन
भोपाल में 30.95 किमी का मेट्रो ट्रेक प्रस्तावित है। इसमें से साढ़े सात किमी का प्राॅयारिटी ट्रेक बनाया जा रहा है। इसमें सुभाष नगर से एम्स तक आठ मेट्रो स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इसमें से सुभाष नगर, केंद्रीय विद्यालय, बोर्ड ऑफिस चौराहा, एमपी नगर जोन.2, रानी कमलापति, डीआरएम ऑफिस, अल्कापुरी और एम्स में आठ स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इसमें से सुभाष नगर, बोर्ड ऑफिस चौराहा, एमपी नगर, रानी कमलापति रेलवे स्टेशन का सिविल कार्य करीब-करीब पूरा हो गया है। रेलवे स्ट्रेशन को 6 डिब्बों के अनुसार तैयार किया जा रहा है। हालांकि, शुरुआत में तीन-तीन डिब्बों के साथ ही मेट्रो दौड़ेगी।
