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MP News: सीएम डॉ. यादव बोले- एमपी को शोध और नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने हमारी सरकार प्रतिबद्ध
Thu, 12 Feb 2026 05:22 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Thu, 12 Feb 2026 05:22 PM IST
सार
भोपाल में राष्ट्रीय शोधार्थी समागम 2026 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शोध को समाज और राष्ट्र की दिशा बदलने वाली ताकत बताया। उन्होंने ‘महाकाल’ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की वेबसाइट लॉन्च की और शोधार्थियों से नवाचार में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय शोधार्थी समागम - 2026 में सहभागिता कर अपने विचार साझा किए।कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ‘International Conference on Mahakal – The Master of Times’ की आधिकारिक वेबसाइट एवं ब्रोशर का लोकार्पण किया तथा दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान द्वारा प्रकाशित पुस्तकों का विमोचन भी किया। राष्ट्रीय शोधार्थी समागम में देशभर से आए शोधार्थियों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों की सहभागिता रही। आगामी 14 फरवरी तक चलने वाले इस समागम में शोध, विज्ञान और नवाचार के विविध आयामों पर विमर्श होगा।
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शोध ऐसा हो, जो बदल दें सबकी सोच
मुख्यमंत्री ने कहा है कि शोध अकादमिक गतिविधि मात्र नहीं, यह समाज और राष्ट्र की दिशा बदलने वाली शक्ति है। कोई भी शोध इतना उच्च कोटि का होना चाहिए जो हम सबकी सोच को एक नई दृष्टि, नई दिशा भी दे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी शोधार्थियों से आह्वान किया कि वे देश के विकास के लिए अपनी जिज्ञासा और रुचि के अनुसंधान क्षेत्रों में निर्भीक होकर आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि जैसे आवश्यकता आविष्कार की जननी है, वैसे ही शोध विज्ञान और सभी वैज्ञानिक पद्धतियों का जनक है। मानवीय प्रज्ञा में जब वैज्ञानिक ज्ञान का समावेश हो जाता है, तब वह ‘प्रज्ञान’ का रूप ले लेती है।
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एमपी को शोध और नवाचार में अग्रणी राज्य बनाएंगे
मुख्यमंत्री ने कहा कि विज्ञान के विकास में ही देश का समग्र विकास निहित है। मध्यप्रदेश को शोध और नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि शोध समाज के विकास का आधार है और इसे आधुनिक, परिष्कृत तथा परिमार्जित दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
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हमारी संस्कृति में एकल शोध की परंपरा कभी नहीं रही
मुख्यमंत्री ने शोधार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे परंपरागत धारणाओं तक सीमित न रहें, बल्कि नवीन विचारों और वैज्ञानिक दृष्टि के साथ ऐसे शोध प्रस्तुत करें, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकें।मुख्यमंत्री ने कहा कि शोध सिर्फ़ एक शैक्षणिक आवश्यकता नहीं, सामाजिक परिवर्तन और विकास का सशक्त माध्यम भी है। दुनिया के ज्ञान पर पश्चिम का प्रभाव पड़ा है। भारतीय संस्कृति भी इससे प्रभावित हुई। हमारी संस्कृति में एकल शोध की परंपरा कभी नहीं रही। शोध समाज आधारित होना चाहिए, जिसमें राष्ट्र के कल्याण की बात कही जाए। दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान राष्ट्रीय शोधार्थी समागम के माध्यम से देश के शोधार्थियों को नई दिशा प्रदान कर रहा है।
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शोध ऐसा हो, जो बदल दें सबकी सोच
मुख्यमंत्री ने कहा है कि शोध अकादमिक गतिविधि मात्र नहीं, यह समाज और राष्ट्र की दिशा बदलने वाली शक्ति है। कोई भी शोध इतना उच्च कोटि का होना चाहिए जो हम सबकी सोच को एक नई दृष्टि, नई दिशा भी दे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी शोधार्थियों से आह्वान किया कि वे देश के विकास के लिए अपनी जिज्ञासा और रुचि के अनुसंधान क्षेत्रों में निर्भीक होकर आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि जैसे आवश्यकता आविष्कार की जननी है, वैसे ही शोध विज्ञान और सभी वैज्ञानिक पद्धतियों का जनक है। मानवीय प्रज्ञा में जब वैज्ञानिक ज्ञान का समावेश हो जाता है, तब वह ‘प्रज्ञान’ का रूप ले लेती है।
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एमपी को शोध और नवाचार में अग्रणी राज्य बनाएंगे
मुख्यमंत्री ने कहा कि विज्ञान के विकास में ही देश का समग्र विकास निहित है। मध्यप्रदेश को शोध और नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि शोध समाज के विकास का आधार है और इसे आधुनिक, परिष्कृत तथा परिमार्जित दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
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हमारी संस्कृति में एकल शोध की परंपरा कभी नहीं रही
मुख्यमंत्री ने शोधार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे परंपरागत धारणाओं तक सीमित न रहें, बल्कि नवीन विचारों और वैज्ञानिक दृष्टि के साथ ऐसे शोध प्रस्तुत करें, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकें।मुख्यमंत्री ने कहा कि शोध सिर्फ़ एक शैक्षणिक आवश्यकता नहीं, सामाजिक परिवर्तन और विकास का सशक्त माध्यम भी है। दुनिया के ज्ञान पर पश्चिम का प्रभाव पड़ा है। भारतीय संस्कृति भी इससे प्रभावित हुई। हमारी संस्कृति में एकल शोध की परंपरा कभी नहीं रही। शोध समाज आधारित होना चाहिए, जिसमें राष्ट्र के कल्याण की बात कही जाए। दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान राष्ट्रीय शोधार्थी समागम के माध्यम से देश के शोधार्थियों को नई दिशा प्रदान कर रहा है।
