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एमपी: 2.75 करोड़ की फर्जी एफडीआर से शराब ठेका लेने का मामला, दीपम रायचूरा और ठेकेदार पर लोकायुक्त की FIR

Sat, 24 Oct 2026 04:32 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Sat, 24 Oct 2026 04:32 PM IST
सार

भोपाल में वर्ष 2024-25 के शराब ठेके के लिए 2.75 करोड़ रुपये से अधिक की कथित फर्जी एफडीआर जमा कराने के मामले में लोकायुक्त ने तत्कालीन सहायक आबकारी आयुक्त दीपम रायचूरा और ठेकेदार जसवंत सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पहले ही निलंबित हो चुके रायचूरा के मामले में अब अन्य सरकारी कर्मचारियों और निजी लोगों की भूमिका की भी जांच होगी।

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MP: Lokayukta FIR Against Deepam Raichura, Contractor Over Alleged Fake ₹2.75 Crore FDR
दीपम रायचूरा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार
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मध्यप्रदेश में भोपाल के शराब ठेके से जुड़े कथित फर्जीवाड़े में डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के पूर्व ओएसडी और तत्कालीन सहायक आबकारी आयुक्त दीपम रायचूरा और हरियाणा के झज्जर निवासी शराब ठेकेदार जसवंत सिंह के खिलाफ लोकायुक्त ने एफआईआर दर्ज की है। मामला वर्ष 2024-25 में शराब ठेके के लिए प्रतिभूति के रूप में जमा कराई गई 2 करोड़ 75 लाख 33 हजार 335 रुपये की कथित फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद (एफडीआर) और उसके सत्यापन से जुड़ा है। लोकायुक्त संगठन ने मामले की जानकारी के बाद जांच में दोनों के कृत्य प्रथम दृष्टया भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दंडनीय पाए जाने के बाद प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए गए। लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार पाटीदार के माध्यम से भोपाल स्थित विशेष पुलिस स्थापना थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
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बैंक ने एफडीआर जारी करने से किया था इनकार
बता दें भोपाल के शराब ठेके के लिए जमा कराई गई 2.75 करोड़ रुपये से अधिक की ई-एफडीआर की जांच में अनियमितताएं सामने आईं। संबंधित बैंक ने लिखित जवाब में कहा था कि एफडीआर उसकी ओर से जारी नहीं की गई थी। इसके बाद आबकारी विभाग ने मामले की विभागीय जांच कराई। विभागीय जांच में प्रतिभूति जमा करने की प्रक्रिया, एफडीआर के सत्यापन और निर्धारित समयसीमा के पालन को लेकर भी सवाल उठे थे। अब लोकायुक्त में एफआईआर दर्ज होने के बाद इन तथ्यों की आपराधिक जांच की जाएगी। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि कथित फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए, उनका सत्यापन किस आधार पर स्वीकार किया गया और ठेके की प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही। 
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पहले निलंबित हो चुके हैं रायचूरा
दीपम रायचूरा को इस मामले से जुड़ी विभागीय जांच में प्रथम दृष्टया अनियमितताएं सामने आने के बाद 12 अक्टूबर 2026 को निलंबित किया गया था। इससे पहले उन्हें उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के ओएसडी के अतिरिक्त प्रभार से भी मुक्त किया गया था। विभागीय जांच में प्रतिभूति स्वीकार करने और लाइसेंस हस्तांतरण की प्रक्रिया से संबंधित कई बिंदुओं पर सवाल उठाए गए थे। हालांकि, निलंबन विभागीय कार्रवाई है और एफआईआर आपराधिक जांच की शुरुआत। दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी है।
 
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