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TET विवाद पर एमपी सरकार का बड़ा दांव: सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका, शिक्षकों को राहत की उम्मीद

Fri, 17 Apr 2026 09:09 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Fri, 17 Apr 2026 09:09 PM IST
सार

मध्यप्रदेश सरकार ने टीईटी विवाद में सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल की है। इससे प्रदेश के लाखों शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

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MP government's big move on TET controversy: Review petition in Supreme Court, teachers hope for relief
सीएम के साथ शिक्षक संघों के पदाधिकारी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर चल रहे विवाद के बीच राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल कर मामले पर पुनर्विचार की मांग की है। इस फैसले के बाद प्रदेश के लाखों शिक्षकों के बीच राहत की उम्मीद जगी है, जिनकी सेवा और पात्रता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार ने 17 अप्रैल को शाम के समय सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका प्रस्तुत की। ई-फाइलिंग के माध्यम से दाखिल इस याचिका की आधिकारिक पुष्टि भी हो चुकी है। सरकार के इस कदम को मामले को गंभीरता से लेने और समाधान की दिशा में प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
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इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर सकारात्मक संकेत दिए थे। अब रिव्यू पिटीशन दाखिल होने से यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार इस मुद्दे को प्राथमिकता दे रही है और शिक्षकों के हित में कानूनी विकल्प तलाश रही है। हालांकि, इस फैसले पर शिक्षकों के संगठनों की मिश्रित प्रतिक्रिया सामने आई है। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने इसे एक जरूरी कदम बताया, लेकिन साथ ही कहा कि इससे शिक्षकों की मूल समस्याएं अभी हल नहीं हुई हैं। उनका कहना है कि जब मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, तब भी TET परीक्षा को लेकर दबाव बनाए रखना उचित नहीं है। दूसरी ओर, मप्र शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। संघ ने इसे शिक्षकों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा की दिशा में सकारात्मक पहल बताया।   
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बता दें  विवाद का एक अहम पहलू सेवा अवधि की गणना को लेकर भी है। शिक्षक संगठन लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि सेवा की गणना पहली नियुक्ति की तारीख से की जाए। उनका कहना है कि वर्षों की सेवा को नजरअंदाज करने से शिक्षकों को आर्थिक और पद संबंधी नुकसान हुआ है। संघ की तरफ से यह भी मांग की है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन पर अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक TET से जुड़े आदेशों को स्थगित किया जाए। उनका मानना है कि इससे शिक्षकों में फैली असमंजस की स्थिति खत्म होगी। 

 
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