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Mp:वनरक्षकों ने CM को खून से लिखा पत्र बोले- विभाग की गलती की सजा हमें क्यों दे रहे, 165 करोड़ वसूली के निर्देश
Sat, 05 Oct 2024 07:09 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Sat, 05 Oct 2024 07:09 PM IST
सार
वनरक्षकों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को खून से पत्र लिखकर अपनी पीड़ा बताई है। उनका कहना है कि वन और वित्त विभाग की गलती की सजा उन्हें क्यों दी जा रही है। सरकार ने वन रक्षकों से 165 करोड़ रुपए की वसूली करने के निर्देश जारी किए हैं।
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वनरक्षकों द्वारा मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश के वनरक्षकों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को खून से पत्र लिखकर अपनी पीड़ा बताई है। उनका कहना है कि वन और वित्त विभाग की गलती की सजा उन्हें क्यों दी जा रही है। क्या वेतन बैंड देना है यह तो इन दोनों विभागों ने तय किया है। फिर 12 प्रतिशत ब्याज के साथ वनरक्षकों से अतिरिक्त राशि की वसूली करना गलत है। दअरसल सरकार ने वन रक्षकों से 165 करोड़ रुपए की वसूली करने के निर्देश जारी किए हैं।
जाने क्या है मामला
जानकारी के लिए बता दें कि प्रदेश के 6592 वनरक्षकों से 165 करोड़ रुपए की वसूली की जा रही है। मैदानी अधिकारियों ने वसूली की कार्यवाही शुरू भी कर दी है। यह राशि 1 जनवरी 2006 से 8 सितंबर 2014 के बीच वनरक्षकों के वेतन में 480 रुपए प्रतिमाह अधिक दी गई है। ऐसा वेतन बैंड अधिक (5680+1900) तय करने से हुआ है। वित्त विभाग कहता है कि इस अवधि में नियुक्त हुए वनरक्षकों को 5200+1800 का वेतन बैंड दिया जाना था और 5680+1900 दे दिया गया है। जबकि वनरक्षक का पद सीधी भर्ती का नहीं है।जबकि वनरक्षक वित्त विभाग के अधिकारियों के इन तर्कों को झुठलाते हैं। वे बताते हैं कि छठा वेतनमान लागू करते हुए वित्त विभाग ने साल 2009 में वन विभाग से वेतन का पुनर्निर्धारण करने को कहा था। एक रिमाइंडर के बाद वन विभाग ने वेतन निर्धारण किया और शासन को भेज दिया। शासन ने सितंबर 2014 में इसे लागू किया, पर वित्त विभाग से अनुमति नहीं ली, जो 2018 में ली गई। उन्हें 1900 ग्रेड-पे भी दे दिया गया। 1900 का ग्रेड-पे 5680 वेतन बैंड पर दिया जाता है। इसलिए वन विभाग के मैदानी अधिकारियों ने 5680 वेतन बैंड दे दिया, जिसे सभी जिला कोषालय अधिकारियों से स्वीकार किया।
वेतन बैंड में संशोधन करने को कहा
वित्त विभाग ने इसे गलत ठहराते हुए वेतन बैंड में संशोधन करने को कहा है। इस आदेश के बाद वन विभाग ने वनरक्षकों पर रिकवरी निकाल दी, जो करीब 165 करोड़ रुपए होती है। इसमें वनरक्षकों से 1.50 लाख से 5 लाख रुपए तक वसूले जाएंगे। इस राशि पर 12 प्रतिशत का ब्याज भी है। अचानक सामने आए इस संकट से वनरक्षक परेशान हैं और विभाग के अधिकारियों से लेकर मंत्री तक से गुहार लगा चुके हैं। उधर, मप्र कर्मचारी मंच के अध्यक्ष अशोक पांडे सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट का हवाला देते हुए कहते हैं कि वनरक्षकों के वेतन से वसूली करना विधि सम्मत नहीं है।
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पदोन्नति का पद मानकर वसूली के आदेश
वनरक्षक सीधी भर्ती का पद है फिर भी वित्त विभाग ने उसे पदोन्नति का पद मानकर वसूली के आदेश जारी किए हैं। वन विभाग का वनरक्षक 1900 ग्रेड-पे एवं 5680 का वेतन पाने की पात्रता रखता है। वनरक्षकों ने वेतन से वसूली के आदेश पर रोक लगाने और मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग मुख्यमंत्री से की है।
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जाने क्या है मामला
जानकारी के लिए बता दें कि प्रदेश के 6592 वनरक्षकों से 165 करोड़ रुपए की वसूली की जा रही है। मैदानी अधिकारियों ने वसूली की कार्यवाही शुरू भी कर दी है। यह राशि 1 जनवरी 2006 से 8 सितंबर 2014 के बीच वनरक्षकों के वेतन में 480 रुपए प्रतिमाह अधिक दी गई है। ऐसा वेतन बैंड अधिक (5680+1900) तय करने से हुआ है। वित्त विभाग कहता है कि इस अवधि में नियुक्त हुए वनरक्षकों को 5200+1800 का वेतन बैंड दिया जाना था और 5680+1900 दे दिया गया है। जबकि वनरक्षक का पद सीधी भर्ती का नहीं है।जबकि वनरक्षक वित्त विभाग के अधिकारियों के इन तर्कों को झुठलाते हैं। वे बताते हैं कि छठा वेतनमान लागू करते हुए वित्त विभाग ने साल 2009 में वन विभाग से वेतन का पुनर्निर्धारण करने को कहा था। एक रिमाइंडर के बाद वन विभाग ने वेतन निर्धारण किया और शासन को भेज दिया। शासन ने सितंबर 2014 में इसे लागू किया, पर वित्त विभाग से अनुमति नहीं ली, जो 2018 में ली गई। उन्हें 1900 ग्रेड-पे भी दे दिया गया। 1900 का ग्रेड-पे 5680 वेतन बैंड पर दिया जाता है। इसलिए वन विभाग के मैदानी अधिकारियों ने 5680 वेतन बैंड दे दिया, जिसे सभी जिला कोषालय अधिकारियों से स्वीकार किया।
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वेतन बैंड में संशोधन करने को कहा
वित्त विभाग ने इसे गलत ठहराते हुए वेतन बैंड में संशोधन करने को कहा है। इस आदेश के बाद वन विभाग ने वनरक्षकों पर रिकवरी निकाल दी, जो करीब 165 करोड़ रुपए होती है। इसमें वनरक्षकों से 1.50 लाख से 5 लाख रुपए तक वसूले जाएंगे। इस राशि पर 12 प्रतिशत का ब्याज भी है। अचानक सामने आए इस संकट से वनरक्षक परेशान हैं और विभाग के अधिकारियों से लेकर मंत्री तक से गुहार लगा चुके हैं। उधर, मप्र कर्मचारी मंच के अध्यक्ष अशोक पांडे सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट का हवाला देते हुए कहते हैं कि वनरक्षकों के वेतन से वसूली करना विधि सम्मत नहीं है।
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पदोन्नति का पद मानकर वसूली के आदेश
वनरक्षक सीधी भर्ती का पद है फिर भी वित्त विभाग ने उसे पदोन्नति का पद मानकर वसूली के आदेश जारी किए हैं। वन विभाग का वनरक्षक 1900 ग्रेड-पे एवं 5680 का वेतन पाने की पात्रता रखता है। वनरक्षकों ने वेतन से वसूली के आदेश पर रोक लगाने और मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग मुख्यमंत्री से की है।
