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Mp: सरकारी अस्पतालों में तैनात 12 हजार आउटसोर्स कर्मचारी जल सत्याग्रह करने को मजबूर, स्वास्थ्य सेवाओं पर असर

Sun, 29 Sep 2024 06:00 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Sun, 29 Sep 2024 06:00 PM IST
सार

आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए शासन द्वारा कोई ठोस नीति नहीं बनाई गई। उनके मांगों पर कोई भी विचार नहीं किया जा रहा है। प्रदेश भर के शासकीय अस्पतालों में 12000 से अधिक कार्यरत सभी आउटसोर्स कर्मचारी दो अक्टूबर को भोपाल में जलसत्याग्रह करेगे।

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MP: 12 thousand outsourced employees posted in government hospitals forced to do water satyagraha, health serv
आउटसोर्स कर्मचारी - फोटो : SOCIAL MEDIA

विस्तार

 एनएचएम सविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ विगत कई वर्षों से अपनी मांगों के सर्मथन में शासन स्तर पर कई बार मंत्रियों एवं विधायकों एवं वरिष्ठ अधिकारीयों से निवेदन कर चुके है लेकिन आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए शासन द्वारा कोई ठोस नीति नहीं बनाई गई। उनकी मांगों पर कोई भी विचार नहीं किया जा रहा है। अब शासन प्रशासन का ध्यान आकष्ट करने के लिए प्रदेश भर के शासकीय अस्पतालों में 12000 से अधिक कार्यरत कर्मचारी दो अक्टूबर को राजधानी भोपाल के श्यामला हिल्स के पास  शीतल दास की बगिया घाट पर हजारों की संख्या में एकत्रित होंगे और 11 बजे से गांधीवादी तरीके से जलसत्याग्रह करेगे एवं शासन प्रशासन की गलत नीतियों खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे।
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इन प्रमुख मांगो को लेकर जलसत्याग्रह

1.  नेशनल हेल्थ मिशन के अधीन विगत कई वर्षों तक संविदा कर्मचारियों के रूप में सेवाएं दे चुके संविदा सपोर्ट स्टाफ कर्मचारियों को शासन प्रशासन की दोहरी नीति के कारण  आउटसोर्स ठेका प्रथा में शामिल किए  कर्मचारियों  विभाग में समक्ष रिक्त पदों पर नियमित किया जाए।
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 2.  विगत कई वर्षों से आउटसोर्स कर्मचारी के रूप में सेवाएं दे रहे सपोर्ट स्टाफ डाटा ,एंट्री ऑपरेटर , वार्ड आया, वार्ड बॉय, सफाई कर्मी,सिक्योरिटी गार्ड, (चौकीदार) ऑक्सीजन टेक्नीशियन, अन्य सभी आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए नीति बनाई जाए एवं उन्हें न्यूनतम 21000 वेतन दिया जाए।
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3. आउटसोर्स कर्मचारी के लिए शासन द्वारा16132 रुपए प्रतिमाह  अनुसार बजट दिया जाता है लेकिन अधिकारियों एवं आउटसोर्स कंपनियों की कमीशन खीरी के वजह से पिछले वर्षों से मात्रा 5500-9000 तक दिए जा रहे है जिससे  आउटसोर्स कर्मचारी की आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है

4. प्रदेश के कई जिलों में 3 _4 माह से वेतन भुगतान नहीं किया जाने के कारण आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है एवं रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है।


5. संघ द्वारा पत्रों के माध्यम से सरकार का ध्यान आकर्षित कराया गया इतने बड़े की घोटाले की जांच किसी उपयुक्त एजेंसी से सभी जिला हेडक्वार्टर पर जाकर जांच करवाए।

6. अधिकारियों एवं आउटसोर्स एजेंसियों द्वारा करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार किया जा रहा है उस पर रोक लगाई जाए।

7. विभाग में विगत कई वर्षों से चतुर्थ श्रेणी के हजारों पद रिक्त हैं जैसे वार्ड बॉय, चौकीदार, वायरमैन, माली, कुली, आया, दाई, भत्य एवं डाटा एंट्री ऑपरेटर/निम्न श्रेणी लिपिक के हजारों पद रिक्त  पदों पर आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित किया जाए।
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