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आयुर्वेद से मातृत्व सुख: भोपाल में खुशीलाल अस्पताल ने तीन साल में 24 महिलाओं को दी संतान सुख की खुशी
Tue, 25 Mar 2025 07:07 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, भोपाल, मध्य प्रदेश
न्यूज डेस्क, भोपाल, मध्य प्रदेश
Published by: आनंद पवार
Updated Tue, 25 Mar 2025 07:07 PM IST
सार
आयुर्वेदिक उपचार ने न केवल रितिका बल्कि कई महिलाओं की मातृत्व की इच्छा पूरी की है। यह उपचार न सिर्फ पारंपरिक चिकित्सा का एक विकल्प है बल्कि यह बताता है कि सही दिनचर्या, खानपान और मानसिक संतुलन से भी संतान सुख प्राप्त किया जा सकता है।
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पंडित खुशीलाल आयुर्वेदिक कॉलेज भोपाल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भोपाल की 37 वर्षीय रितिका (बदला हुआ नाम) पिछले 12 साल से मां बनने की कोशिश कर रही थीं। उन्होंने आईवीएफ का सहारा लिया, लेकिन वह भी असफल रहा। हारकर, उन्होंने खुशीलाल आयुर्वेदिक अस्पताल का रुख किया। यहां उनके और उनके पति की पूरी जांच की गई और आयुर्वेदिक उपचार शुरू हुआ। मात्र तीन महीने के इलाज के बाद वे अब सात माह की गर्भवती हैं। रितिका अकेली नहीं हैं जिन्होंने आयुर्वेद से मातृत्व सुख प्राप्त किया। पिछले तीन साल में खुशीलाल अस्पताल में 24 महिलाओं ने आयुर्वेदिक उपचार के जरिए गर्भधारण किया, जिनमें से 16 ने स्वस्थ शिशुओं को जन्म दिया। इनमें से अधिकतर महिलाएं विभिन्न कारणों से गर्भधारण नहीं कर पा रही थीं।
मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का संतुलन जरूरी
खुशीलाल अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मौसमी कुल्हारे ने बताया कि मां न बन पाने की अलग-अलग वजहें होती हैं।कुछ को ट्यूब ब्लॉकेज, कुछ को थायराइड, तो कुछ को सर्वाइकल या यूटेराइन संबंधी समस्याएं होती हैं। आयुर्वेद में हर समस्या के लिए अलग उपचार उपलब्ध है। डॉ. कुल्हारे कहती हैं, "सबसे पहले, हम पति-पत्नी दोनों के सभी जरूरी टेस्ट कराते हैं और फिर काउंसिलिंग करते हैं। मानसिक तनाव भी गर्भधारण में बाधा बन सकता है, इसलिए हम मानसिक और शारीरिक संतुलन पर विशेष ध्यान देते हैं।"
जीवनशैली में परिवर्तन से मिलती है सफलता
डॉक्टरों के अनुसार इलाज के दौरान दंपत्ति की दिनचर्या को व्यवस्थित किया जाता है। इसमें समय पर सोना-जागना, योग, प्राणायाम और व्यायाम करना शामिल है। इसके अलावा दिन में सोने से बचना, पंचकर्म थैरेपी अपनाना और आयर्वेदिक दवाएं समय पर लेना शामिल है।
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भोजन की आदतों में सुधार बेहद जरूरी
डॉ. कुल्हारे ने बताया कि भोजन की आदतों में सुधार बेहद जरूरी है। इसमें जंक फूड पूरी तरह बंद करना, मैदे से बनी चीजें जैसे पिज्जा, समोसा, ब्रेड आदि त्यागना और तीखा, मिर्च-मसाले वाला भोजन कम करना जरूरी होता है। साथ ही मोटे अनाज, सलाद, स्प्राउट्स और मौसमी फल अधिक मात्रा में खाना शामिल होता है।
एमपीसीएसटी की मदद से मुफ्त इलाज
खुशीलाल अस्पताल में बांझपन के इलाज के लिए एक विशेष कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसका संचालन डॉ. निशा भालेराव कर रही हैं। इस कार्यक्रम को मध्य प्रदेश काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (एमपीसीएसटी) द्वारा वित्तीय सहायता दी गई है। इसके तहत दो महीने तक महिलाओं का उपचार किया जाता है और दवाएं पूरी तरह मुफ्त दी जाती हैं।
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मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का संतुलन जरूरी
खुशीलाल अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मौसमी कुल्हारे ने बताया कि मां न बन पाने की अलग-अलग वजहें होती हैं।कुछ को ट्यूब ब्लॉकेज, कुछ को थायराइड, तो कुछ को सर्वाइकल या यूटेराइन संबंधी समस्याएं होती हैं। आयुर्वेद में हर समस्या के लिए अलग उपचार उपलब्ध है। डॉ. कुल्हारे कहती हैं, "सबसे पहले, हम पति-पत्नी दोनों के सभी जरूरी टेस्ट कराते हैं और फिर काउंसिलिंग करते हैं। मानसिक तनाव भी गर्भधारण में बाधा बन सकता है, इसलिए हम मानसिक और शारीरिक संतुलन पर विशेष ध्यान देते हैं।"
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जीवनशैली में परिवर्तन से मिलती है सफलता
डॉक्टरों के अनुसार इलाज के दौरान दंपत्ति की दिनचर्या को व्यवस्थित किया जाता है। इसमें समय पर सोना-जागना, योग, प्राणायाम और व्यायाम करना शामिल है। इसके अलावा दिन में सोने से बचना, पंचकर्म थैरेपी अपनाना और आयर्वेदिक दवाएं समय पर लेना शामिल है।
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भोजन की आदतों में सुधार बेहद जरूरी
डॉ. कुल्हारे ने बताया कि भोजन की आदतों में सुधार बेहद जरूरी है। इसमें जंक फूड पूरी तरह बंद करना, मैदे से बनी चीजें जैसे पिज्जा, समोसा, ब्रेड आदि त्यागना और तीखा, मिर्च-मसाले वाला भोजन कम करना जरूरी होता है। साथ ही मोटे अनाज, सलाद, स्प्राउट्स और मौसमी फल अधिक मात्रा में खाना शामिल होता है।
एमपीसीएसटी की मदद से मुफ्त इलाज
खुशीलाल अस्पताल में बांझपन के इलाज के लिए एक विशेष कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसका संचालन डॉ. निशा भालेराव कर रही हैं। इस कार्यक्रम को मध्य प्रदेश काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (एमपीसीएसटी) द्वारा वित्तीय सहायता दी गई है। इसके तहत दो महीने तक महिलाओं का उपचार किया जाता है और दवाएं पूरी तरह मुफ्त दी जाती हैं।
