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एमपी में अर्नब का तांडव अभी बाकी: तापमान में गिरावट, 33 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, कब तक बरसेंगे बादल?

Fri, 30 Oct 2026 07:08 AM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Fri, 30 Oct 2026 07:08 AM IST
सार

चक्रवात अर्नब के कारण मध्य प्रदेश में 2 नवंबर तक बारिश और तेज हवाओं का असर बने रहने की संभावना है। 33 जिलों में अलर्ट के बीच तापमान में गिरावट आई है। बेमौसम बारिश से मंडियों में रखी उपज और खेतों में खड़ी धान की फसल पर खतरा बढ़ गया है।
 

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More turbulence ahead in MP: Temperatures drop, storm and rain alert issued for 33 districts—how long will the
मौसम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी बारिश पीछा नहीं छोड़ रही है। बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवात अर्नब ने प्रदेश के मौसम का मिजाज बदल दिया है। कहीं तेज हवाओं के साथ बारिश हो रही है तो कहीं बादलों के कारण धूप गायब है। मौसम विभाग ने 2 नवंबर तक प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई है। शुक्रवार को ग्वालियर, जबलपुर और रीवा समेत 33 जिलों में आंधी और हल्की बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। बारिश और ठंडी हवाओं का असर तापमान पर भी दिखने लगा है। गुरुवार को प्रदेश के कई शहरों में दिन का तापमान 2 डिग्री तक नीचे आ गया। इससे दोपहर में भी ठंडक महसूस होने लगी है। मौसम का यह बदलाव आने वाले दिनों में रात की ठंड बढ़ने के संकेत दे रहा है।
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इन 33 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग ने राजगढ़, विदिशा, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में अलर्ट जारी किया है। वहीं भोपाल, रायसेन, सीहोर, नरसिंहपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बैतूल, नर्मदापुरम, हरदा, शाजापुर, देवास, इंदौर, उज्जैन, रतलाम, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, खंडवा और बुरहानपुर में मौसम साफ रहने और धूप निकलने की संभावना है।
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बेमौसम बारिश ने बढ़ाई किसानों की चिंता
चक्रवात के कारण हो रही बारिश अब किसानों के लिए परेशानी बन रही है। पांढुर्णा की मंडी में खुले में रखे मक्के के ढेर बारिश में भीग गए। इससे हजारों क्विंटल मक्का खराब होने की आशंका है। छिंदवाड़ा सहित कई जिलों में धान की फसल खेतों में खड़ी है। ऐसे में बारिश से दानों की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा है। रायसेन के दशहरा मैदान में धान लेकर करीब 200 ट्रॉलियों से पहुंचे किसानों को भी अपनी उपज बचाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी। गुरुवार को भोपाल, सागर, सिंगरौली, पांढुर्णा, मैहर, दमोह, सीहोर और नर्मदापुरम सहित कई जिलों में बारिश दर्ज की गई। हालांकि, इस बारिश से तुअर, कपास और संतरे की फसलों को फायदा मिलने की उम्मीद भी है।
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पचमढ़ी में रात का पारा 15.2 डिग्री, कई शहरों में बढ़ी ठंडक
बारिश और बादलों के कारण दिन के तापमान में गिरावट आई है। गुरुवार रात पचमढ़ी में न्यूनतम तापमान 15.2 डिग्री दर्ज किया गया। नौगांव में 15.6, अमरकंटक में 16.1, खरगोन और दमोह में 17, जबकि धार में 17.1 डिग्री तापमान रहा।

3 अक्टूबर को विदा हो चुका मानसून, फिर क्यों बरस रहे बादल?
मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई 3 अक्टूबर को हो चुकी है। इसके बाद भी बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवात और अन्य मौसमी गतिविधियों के कारण बारिश हो रही है। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान बारिश, गर्मी और ठंड का मिला-जुला असर देखने को मिला है। इस बार भी अक्टूबर की शुरुआत में तेज धूप रही, जबकि रात के समय ठंडक और बीच-बीच में बारिश का दौर जारी है।

मानसून में सामान्य से 4 प्रतिशत कम बारिश
प्रदेश में जून से सितंबर के बीच कुल 908.4 मिलीमीटर यानी 35.8 इंच बारिश दर्ज की गई। सामान्य आंकड़ा 949.5 मिलीमीटर यानी 37.3 इंच है। इस तरह पूरे सीजन में सामान्य से करीब 4 प्रतिशत कम बारिश हुई।पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक, जबकि पश्चिमी हिस्से में 12 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। जून में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश होने के कारण पूरे सीजन का आंकड़ा प्रभावित हुआ। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश हुई, लेकिन बाद में मानसून की सक्रियता दो बार कमजोर पड़ गई।

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25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा, 30 अब भी पीछे
मानसून सीजन के दौरान प्रदेश के 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा हो गया, जबकि 30 जिले सामान्य बारिश के आंकड़े से पीछे रह गए। पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश की कमी ज्यादा रही
आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9 से 51 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई। पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में कुल मिलाकर सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक बारिश हुई, हालांकि इस क्षेत्र के कुछ जिलों में भी बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा।
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