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मियां भोपाली के झोले-बतोले: लस्सन में पियाज सी सियासी ताकत कहां ?

Sat, 17 Sep 2022 04:04 PM IST
अजय बोकिल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: अजय बोकिल Updated Sat, 17 Sep 2022 04:04 PM IST
सार

मध्य प्रदेश में इन दिनों लहसुन के भाव नहीं मिलने और लहसुन फेंके जाने की खबरें चर्चा में हैं। किसान परेशान हैं। भोपाली मियां ने इसी परेशानी को अपने अंदाज में बयां किया है। 

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Miya Bhopali Slang Satire On lahsun rate in Madhya Pradesh
अमर उजाला ग्राफिक्स - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

को खां, इस साल मधपिरदेश के किसान लस्सन उगाके रो रिए हें। कसम से इत्ती बंपर पेदावार हुई हेगी के माल की लागत तक नई निकल रई। लस्सन पेदा करने वाले किसान रो रिए हेंगे। एक ने तो सीधे किरषी मंतरी को फोन लगा के मंडी में लस्सन का भाव पूछ लिया तो मंतरीजी भी अकबका गए। बोले भई लस्सन उगाने वाला महकमा मेरा नई हे। बागबानी वाले से पूछो। किसान फिर भी नई माना तो मंतरीजी बोले के मियां, एसी फसल क्यों नई उगाते जिसके भाव ज्यादा मिलें। किसान ने सर पीट लिया। 
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मियां, अपना एमपी किरषी में इत्ता आगे निकल गया हे के अब फसलों का वाजिब भाव तक नई मिल रिया। लस्सन उगाने में मधपिरदेश ने तमाम पिरदेशों को पीछे छोड़ दिया हे। पूरे पिरदेश में किसानों ने 1 लाख 93 हजार हेक्टेयर से ज्यादा में लस्सन इस भरोसे पे उगाई के अच्छी कमाई होगी। नतीजा ये रिया के 20 लाख टन से ज्यादा लस्सन पेदा हुई हे। समझ नई आ रिया के कहां रखें। मंडी का आलम ये हेगा के दो रुपिए किलो का दाम भी नई मिल रिया। इससे चार गुनी तो उगाने की लागत आई हेगी। किसान परेशान हें। पिरदेश का मंदसोर जिला तो लस्सन जिला बन चुका हेगा।
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आलम ये हेगा कि मियां किसान माल मंडी में ले जाने की जगह लस्सन बोरो में भरकर नदी नालो में फेंक रिए हेंगे। उसे निकलवाने तक का खर्चा नई निकल रिया। एसा ई एक ऑडियो इन दिनो वाइरल हो रिया हेगा।  हालात से परेशान एक किसान ने सीधे पिरदेश के किरषी मंतरी कमल पटेल को फोन लगा लिया। कमल भाई खुद भी किसान हेंगे। किसानों से हमदर्दी रखते हेंगे। मगर मंतरी बनने के बाद उत्ता टेम  नई मिल पाता। जब किसान ने सीधे उनसे लस्सन का रेट पूछ लिया। मंतरीजी ने दिलासा दी के खां, दो चार महीने रुक जाओ लस्सन के भाव चोगुने होंगे। मगर किसान भी भोत परेशान लग रिया था। बोला तब तक क्या करेंगे। इस पे मंतरीजी बोले के मियां, लस्सन का डिपार्टमेंट अपना नई हे। बागबानी वाले मंतरीजी से बात करो। फिर बोले के मूंग की फसल उगा लो। किसान बोला के खां, हमारे इलाके में मूंग नई होती। क्या करें?  
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खां, किसानों का केना हेगा कि इस साल लस्सन की बंपर फसल हुई हे। हालांकि 25-30 परसेंट खराब भी हुई हेगी। तो भी माल मंडी में इत्ता इफरात में आ रिया हेगा के कोई लेवाल नई हे। किसानों को लग रिया के खेत में लस्सन लगा के निपट गए। पिछले सालों में ये ई पियाज उगाने वालों का रिया था। एमपी में पियाज के दाम इत्ते गिर गए के किसानों को खेत में फसल फेंकनी पड़ गई। अब लस्सन ने मारा हेगा। कुछ ने तो कसम खा ली के कुछ भी हो जाए पियाज लस्सन उगाना बंद। भोत से किसानों की मांग हेगी के सरकार लस्सन एक्सपोर्ट करने की इजाजत दे तो कुछ मदद हो। मगर सरकार अभी कुछ भी ते नई कर पा रई। 

मियां, ये हकीकत हे के मधपिरदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ने से कई फसलों की पेदावार भोत बढ़ गई हेगी पर बाजार नदारद हे। नेता पिरतीपक्ष गोविंद सिंह ने शिवराज सरकार पे ये केह के हमला करा के पिरदेश में खेती घाटे का धंधा बन गई हे। अब खां, पियाज में तो सरकारें बदलने की ताकत हे मगर मुआ लस्सन क्या करें? वो इलाज ओर सुवाद के काम भले आता हो, लेकिन सियासी ताकत कहां से लाए के सरकार पियाज की माफिक उसकी भी सुने!   


- बतोलेबाज


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw।co।in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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