फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Bhopal News ›   Madhya Pradesh government will settle wild buffalo in Kanha Tiger Reserve

MP News: कान्हा टाइगर रिजर्व में जंगली भैंसे बसाएगी सरकार, MP में 40 साल पहले पाए जाते थे

Sat, 03 Dec 2022 03:45 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: अरविंद कुमार Updated Sat, 03 Dec 2022 03:45 PM IST
सार

मध्यप्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में राज्य सरकार जंगली भैंसे बसाएगी। सरकार का वन विभाग असम सरकार को पत्र लिखकर जंगली भैंसो की मांग करेगा। अगर सब कुछ ठीक रहा तो कान्हा टाइगर रिजर्व में पर्यटक जंगली भैंसो का दीदार कर सकेंगे।

विज्ञापन
Madhya Pradesh government will settle wild buffalo in Kanha Tiger Reserve
(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मध्यप्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में राज्य सरकार जंगली भैंसे बसाएगी। सरकार का वन विभाग असम सरकार को पत्र लिखकर जंगली भैंसो की मांग करेगा। सब कुछ ठीक रहा तो कान्हा टाइगर रिजर्व में पर्यटक जंगली भैंसों का दीदार कर सकेंगे। कान्हा में जंगली भैंसों के अनुकूल वातावरण है या नहीं, वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया ने इसका अध्ययन भी कराया है।

विज्ञापन


बता दें कि वन विभाग ने अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर वन मंत्री को प्रस्ताव भेजा है। प्रदेश में 40 साल पहले जंगली भैंसे़ कान्हा के जंगलों में पाए जाते थे। अब राज्य सरकार एक बार फिर प्रदेश के जंगल को जंगली भैंसों से आबाद करने का प्रयास कर रही है।
विज्ञापन


चार हजार एशियाई भैंसा बचे, एमपी में 40 साल पहले पाए जाते थे...
एशियाई जंगली भैंसों की संख्या वर्तमान में चार हजार से भी कम रह गई है। एक सदी पहले तक पूरे दक्षिण पूर्व एशिया में बड़ी तादाद में पाए जाने वाला जंगली भैंसें आज केवल भारत, नेपाल, बर्मा और थाईलैंड में ही पाए जाते हैं। भारत में असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में यह पाए जाते हैं। मध्य भारत में यह छत्तीसगढ़ में रायपुर संभाग और बस्तर में पाया जाता है। जंगली भैंसो की एक प्रजाति, जिसके मस्तक पर सफेद निशान होता है। पहले मध्यप्रदेश के वनों में भी पाई जाती थी, लेकिन अब विलुप्त है।
विज्ञापन
विज्ञापन


जंगली भैंसो में यह होती है विशेष बातें...
मादा जंगली भैंस अपने जीवन काल में पांच बच्चों को जन्म देती है। इनकी जीवन अवधि नौ साल की होती है। नर बच्चें दो साल की उम्र में झुंड छोड़ देते हैं। जंगली भैंसा का जन्म अक्सर बारिश के मौसम के अंत में होता है। आमतौर पर मादा जंगली भैंसे और उनके बच्चे झुंड बना कर रहती हैं और नर झुंड से अलग रहते हैं। लेकिन यदि झुंड की कोई मादा गर्भ धारण के लिए तैयार होती है तो सबसे ताकतवर नर उसके पास किसी और नर को नहीं आने देता। यह नर आम तौर पर झुंड के आसपास ही बना रहता है। यदि किसी बच्चे की मां मर जाए तो दूसरी मादाएं उसे अपना लेती हैं। जंगली भैंसों को सबसे बड़ा खतरा पालतू मवेशियों की संक्रमित बीमारियों से ही है, इनमें प्रमुख बीमारी फुट एंड माउथ है। रिडंर्पेस्ट नाम की बीमारी ने एक समय इनकी संख्या में बहुत कमी ला दी थी।


पीसीसीएफ वन्यप्राणी, जेएस चौहान ने कहा, मध्यप्रदेश के कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में जंगली भैंसे आज से 40 साल पहले पाए जाते थे। धीरे-धीरे वे विलुप्त हो गए। उन्हें अब दोबारा बसाने की तैयारी है। इसके लिए अध्ययन करा लिया है। असम सरकार से जंगली भैंसो की मांग को लेकर जल्द ही पत्र लिखेंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed