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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Bhopal News ›   In ENC office, two clerks were made superintendents in 18 months, now investigation is going on for 5 years

PHE BHOPAL: ईएनसी ऑफिस में 18 महीने में दो बाबुओं को बना दिया अधीक्षक, अब 5 साल से चल रही जांच पर जांच

Wed, 10 Jul 2024 06:21 PM IST
Sandeep Tiwari संदीप तिवारी
Updated Wed, 10 Jul 2024 06:21 PM IST
सार


PHE विभाग के ENC कार्यालय भोपाल में महज 18 महीने में दो बाबुओं को ग्रेड ए अधीक्षक बना दिया गया, जिसकी 5 साल से केवल जांच चल रही है कार्रवाई नहीं हुई।

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In ENC office, two clerks were made superintendents in 18 months, now investigation is going on for 5 years
ईएनसी कार्यालय भोपाल - फोटो : amar ujala

विस्तार

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग के ईएनसी ऑफिस में कार्यरत दो बाबुओं को नियमों को ताक पर रख कर महज 18 महीने के भीतर ए ग्रेड अधीक्षक बना दिया गया था, जबकि कि नियम के अनुसार एक प्रमोशन के लिए कम से कम पांच साल का समय लगता है। शिकायत के बाद 5 साल से जांच पर जांच चल रही है और कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। खास बात यह है कि एक बाबू संदीप सक्सेना का रिटायरमेंट भी हो गया और उन्हें दोबारा संविदा नियुक्ति पर मंत्रालय में पदस्थ कर दिया गया है। वहीं दूसरा बाबू गोपाल खोटपाल अभी भी ईएनसी कार्यालय में काम कर रहे हैं। 
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जांच रिपोर्ट ENC के पास पहुंची नहीं ले रहे कोई एक्शन

जानकारी के लिए बता दें कि जब यह मामला सामने आया तो कुछ कर्मचारियों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। जिसके बाद जांच शुरू हुई और छानबीन कमेटी को तथ्य जांचने कि जिम्मेदारी दी गई, और कमेटी ने अपने रिपोर्ट में शिकायत को सही बताया लेकिन इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। दोबारा से शिकायत हुई तो फिर से निरीक्षण करने के लिए कुछ अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई। अधिकारियों ने एक माह पहले निरीक्षण करके सीएनसी केके सोनगरिया को रिपोर्ट सौंप दी है लेकिन अभी तक उन्होने कोई निर्णय नहीं लिया है।
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18 वरिष्ठों को छोड़कर दिया था प्रमोशन 
 केके सोनगरिया ने इस मामले में आरटीआई लगाए जाने के बाद इस डीपीसी की जांच के आदेश दिए थे और मामले की जांच के लिए राजेश दुबे को जांच अधिकारी बनाया था। इस मामले में जांच के दौरान पाया गया कि गोविंद खोट पाल को अपने से 18 वरिष्ठों को छोड़कर प्रमोशन दिया गया और इसी आधार पर उन्हें सहायक ग्रेड वन का प्रमोशन भी मिल गया। इसी तरह का मामला संदीप सक्सेना का है जो कि लेखापाल थे और उन्हें प्रमोशन की पात्रता नहीं थी लेकिन तत्कालीन डीपीसी करने वाली कमेटी ने सारे नियमों को ताक में रखकर उन्हें पहले सहायक ग्रेड दो बनाया गया और बाद में सहायक ग्रेड एक के पद पर पदोन्नति दे दी। हैरानी की बात यह है कि यह पदोन्नति एक ही साल में हुई यानी सहायक ग्रेड दो से सहायक ग्रेड वन बनने में दो माह का अंतर है।
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सेवानिवृत्ति होने के बाद अब संविदा नियुक्ति
खास बात यह है गोविंद खोटपाल, सदीप सक्सेना की नियम विरुद्ध डीपीसी और सहायक ग्रेड वन तक प्रमोशन देने के मामले की जांच चल रही है और अब संदीप सक्सेना सेवानिवृत्त हो गए हैं, और उन्हें मंत्रालय में संविदा नियुक्ति दोबारा रख लिया गया है। ईएनसी ऑफिस के कर्मचारियों की माने तो गोविंद खोटपाल, सदीप सक्सेना की नियम विरुद्ध डीपीसी और सहायक ग्रेड वन तक प्रमोशन देने के मामले की जांच को प्रभावित करने की कोशिश की गई है।


ENC को सौंप दी है निरीक्षण रिपोर्ट
छानबीन कमेटी द्वारा की गई जांच की रिपोर्ट का पुन निरीक्षण करने वाले मुख्य अभियंता सीके सिंह ने बताया कि हमारा काम रिपोर्ट का निरीक्षण करना था हमने निरीक्षण करके रिपोर्ट ईएनसी केके सोनगरिया को सौंप दी है। कार्रवाई करना या नहीं करना उनके अधिकार क्षेत्र में आता है। हमारा काम रिपोर्ट का निरीक्षण करना था जो हम ने कर दिया है।
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