फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Bhopal News ›   Forest department launched Jatayu conservation campaign to save the lives of vultures.

मिशन जटायु: प्रतिबंधित दवाओं के इस्तेमाल से जा रही गिद्धों की जान, बिक्री रोकने को वन विभाग ने चलाया अभियान

Fri, 22 Dec 2023 02:46 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रीवा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रीवा Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Fri, 22 Dec 2023 02:46 PM IST
सार

कुछ ऐसी प्रतिबंधित दवाइयां का उपयोग इंसानों ने शुरू कर दिया है, जिसे खाने से गिद्धों की मौत होने लगी है। इसको रोकने के लिए वन विभाग ने जटायु संरक्षण अभियान चलाया हुआ है।

विज्ञापन
Forest department launched Jatayu conservation campaign to save the lives of vultures.
जटायु अभियान की जानकारी देते अधिकारी। - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

गिद्धों की जान बचाने के लिए वन विभाग अब मैदान पर उतर आया है। जटायु संरक्षण अभियान चलाया जा रहा है। प्रतिबंधित दवाइयां गिद्धों की जान ले रही हैं। इन दवाइयों पर रोक लगाने के लिए वन विभाग का अमला दवा दुकानों, अस्पतालों पर पहुंचकर उनके उपयोग से दूरी बनाने की सलाह दे रहा है।

विज्ञापन


बता दें कि कुछ दशक पहले तक यदि गांव या आसपास में कोई जानवर मृत होता था, तो उसके आसपास गिद्ध मंडराने लगते थे। गिद्धों की भीड़ लग जाती थी, लेकिन अब वह विलुप्तप्राय होने लगे। गिद्ध नजर नहीं आते हैं। इन गिद्धों के विलुप्त होने की वजह इंसान ही बना है। कुछ ऐसी प्रतिबंधित दवाइयां का उपयोग इंसानों ने शुरू कर दिया है, जिसे खाने से गिद्धों की मौत होने लगी है। 
विज्ञापन


भारत सरकार ने हालांकि इन दवाइयां पर प्रतिबंध लगा दिया है फिर भी पूरी तरह से सफल नहीं हो पाया है। चोरी छिपे अब भी इनका उपयोग हो रहा है। यही वजह है कि वन विभाग ने इन घातक दवाइयों के उपयोग पर रोक लगाने के लिए डीएफओ ने जटायु अभियान की शुरुआत की है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस अभियान में वन मंडल अंतर्गत आने वाले सभी रेंज अफसर और कर्मचारियों को अभियान से जोड़ा गया है। वन विभाग की टीम अस्पताल, गांव और दवा दुकानों पर पहुंचकर लोगों को इन प्रतिबंधित दवाइयां के उपयोग से दूरी बनाने की सलाह दी जा रही है। 

दवाओं का विकल्प भी मौजूद
इन प्रतिबंधित दवाइयां की जगह पर विकल्प भी बताया जा रहे हैं। वन विभाग का यह अभियान काफी सराहनीय है। रीवा में कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां गिद्धों की संख्या बढ़ रही है। यदि वन विभाग का यह प्रयास सफल रहा तो आने वाले दिनों में यह दोबारा से हमें नजर आने लगेंगे।

प्रकृति के सफ़ाईकर्मी होते हैं गिद्ध
गिद्ध मुर्दाखोर पक्षी होते हैं, जो सड़े गले मांस को खाते हैं। उसमें असंख्य घातक जीवाणु होते हैं। इस तरह गिद्ध प्रकृति के सफ़ाईकर्मी होते हैं। ये जहां मौजूद होते हैं, वहां के पारिस्थितिकी तंत्र को स्वच्छ व स्वस्थ करते हैं। परंतु बीते कुछ दशकों में गिद्धों की संख्या काफी हद तक कम हुई है। इसके प्रमुख कारणों में से एक डाइक्लोफेनेक दवा का मवेशी के उपचार हेतु उपयोग है। उपचारित बीमार मवेशी के मरने के बाद, जब गिद्ध उसके मांस को खाते हैं, तो यह दवा गिद्ध के गुर्दों को खराब कर देती है, जिससे कुछ ही दिनों में गिद्ध की मृत्यु हो जाती है। भारत सरकार ने वर्ष 2008 में डाइक्लोफेनेक का जानवरो मवेशी के उपचार हेतु उपयोग प्रतिबंधित एवं किया था।


इसी वर्ष इस जैसी हानिकारक दवाओं का भी जानवरों/मवेशी के उपचार के लिए उपयोग प्रतिबंधित किया गया है। इनके अलावा नीमूसुलाइड प्रतिबंधित तो नहीं है पर गिद्धों के लिए हानिकारक है। परंतु अज्ञानतावश कई लोग अभी भी इन दवाओं का उपयोग कर रहे हैं। इन हानिकारक दवाओं के बारे में संबंधितों को जागरूक करने के लिए रीवा वन विभाग ने जटायु संरक्षण अभियान की शुरुआत की है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed