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अद्भुत खगोलीय घटना: मून पर अर्थशाइन आज, पृथ्वी की चमक से चमकेगा चंद्रमा, हंसियाकार चांद भी दिखेगा पूरा
Sun, 23 Apr 2023 11:34 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Sun, 23 Apr 2023 11:34 AM IST
सार
अर्थशाईन तब होता है जब सूरज की रोशनी, पृथ्वी की सतह से परावर्तित होती है और चंद्रमा की सतह के अंधेरे वाले भाग को भी रोशन करती है। आज जब आप चंद्रमा को देखें तो याद रखें उसे चमकाने में उस पृथ्वी का भी योगदान है जिस पर आप खड़े हैं।
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मून पर अर्थशाइन आज
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
रविवार शाम को पश्चिम आकाश में अद्भुत खगोलीय नज़ारा दिखाई देगा। सूरज के डूबते ही खगोलीय पिंडों की चमचमाती जोड़ी आकाश में लोगों को ध्यान आकर्षित करेगी। नेशनल अवार्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने विद्या विज्ञान के अंतर्गत बताया कि आज चमकते वीनस की हंसियाकार चंद्रमा के साथ जोड़ी दिखने जा रही है । पिछले महीने दिखी जोड़ी में वीनस, चंद्रमा के नीचे था, इस बार वीनस चंद्रमा के बगल में होगा।
सारिका ने बताया कि आज यानि रविवार को खास यह होगा कि चंद्रमा हंसियाकार होते हुये भी पूरे गोलाकार दिखने का आभास करा सकता है, इसमें लगभग 11 प्रतिशत चमकदार भाग के अलावा चंद्रमा का बाकी भाग भी हल्के प्रकाश के साथ दिखेगा । खगोल विज्ञान में इसे अर्थशाईन कहते हैं। इस घटना को लियोनार्डो द विंची चमक भी कहा जाता है । लियोनार्डो द विंची ने पहली बार स्केच के साथ 1510 के आसपास अर्थशाईन की अवधारणा को रखा था।
सारिका ने बताया कि अर्थशाईन तब होता है जब सूरज की रोशनी, पृथ्वी की सतह से परावर्तित होती है और चंद्रमा की सतह के अंधेरे वाले भाग को भी रोशन करती है। आज जब आप चंद्रमा को देखें तो याद रखें उसे चमकाने में उस पृथ्वी का भी योगदान है जिस पर आप खड़े हैं। सारिका ने बताया कि विदेशों में इस खगोलीय घटना को अशेन ग्लो या नये चंद्रमा की बांहों में पुराना चंद्रमा भी नाम दिया जा रहा है । अगर बादल बाधा न बने तो शाम को आप भी इस जोड़ी को निहार सकते हैं।
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सारिका ने बताया कि आज यानि रविवार को खास यह होगा कि चंद्रमा हंसियाकार होते हुये भी पूरे गोलाकार दिखने का आभास करा सकता है, इसमें लगभग 11 प्रतिशत चमकदार भाग के अलावा चंद्रमा का बाकी भाग भी हल्के प्रकाश के साथ दिखेगा । खगोल विज्ञान में इसे अर्थशाईन कहते हैं। इस घटना को लियोनार्डो द विंची चमक भी कहा जाता है । लियोनार्डो द विंची ने पहली बार स्केच के साथ 1510 के आसपास अर्थशाईन की अवधारणा को रखा था।
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सारिका ने बताया कि अर्थशाईन तब होता है जब सूरज की रोशनी, पृथ्वी की सतह से परावर्तित होती है और चंद्रमा की सतह के अंधेरे वाले भाग को भी रोशन करती है। आज जब आप चंद्रमा को देखें तो याद रखें उसे चमकाने में उस पृथ्वी का भी योगदान है जिस पर आप खड़े हैं। सारिका ने बताया कि विदेशों में इस खगोलीय घटना को अशेन ग्लो या नये चंद्रमा की बांहों में पुराना चंद्रमा भी नाम दिया जा रहा है । अगर बादल बाधा न बने तो शाम को आप भी इस जोड़ी को निहार सकते हैं।
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