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Bhopal Gas Tragedy: भोपाल गैस कांड की आई 39वीं बरसी; मगर पीड़ितों को आज भी है न्याय की आस
Sat, 02 Dec 2023 07:47 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Sat, 02 Dec 2023 07:47 PM IST
सार
Bhopal Gas Tragedy Anniversary: तीन दिसंबर को भोपाल गैस कांड की बरसी है। इस दर्दनाक घटना के पीड़ित आज भी न्याय की आस लगाए बैठे हैं। दरअसल, मध्य प्रदेश की राजधानी में 39 साल पहले घटित दुनिया की सबसे दर्दनाक घटना को याद कर लोग आज भी सहम जाते हैं।
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भोपाल गैस त्रासदी
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदियों में से एक भोपाल गैस कांड की 39वीं बरसी तीन दिसंबर को मनाई जाएगी। पीड़ितों के लिए काम करने वाले संगठनों ने इसके लिए जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित किए हैं। प्रशासन की ओर से भी सद्भावना सभा होगी। दरअसल, 1984 में दो और तीन दिसंबर की दरम्यानी रात यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में जहरीली गैस मिथाइल आइसोसायनाइड के रिसाव से 15 हजार से अधिक लोगों की जान चली गई थी।
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लगभग 30 मीट्रिक टन गैस का हुआ था रिसाव
जानकारी के मुताबिक, एमपी की राजधानी भोपाल की यूनियन कार्बाइड फैक्टरी में करीब 45 मिनट के अंदर ही लगभग 30 मीट्रिक टन गैस का रिसाव हुआ, जो पूरे शहर में फैल गया। इससे प्रभावित लोग और उनके परिजन आज भी इसका दंश झेल रहे हैं। इस त्रासदी के पीड़ितों को आज भी न्याय का इंतजार है। इधर, आरोपी कंपनी डाव केमिकल्स पर भोपाल कोर्ट में केस चल रहा है। जबकि मुख्य आरोपी एंडरसन की मौत हो चुकी है। भोपाल की इस गैस त्रासदी पर बॉलीवुड और हॉलीवुड में कई फिल्में भी बन चुकी हैं। हाल ही में ओवर द टॉप (OTT) प्लेटफॉर्म पर भी बेब सीरीज ‘द रेलवे मेन’ रिलीज है।
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भोपाल गैस कांड की 39वीं बरसी पर दो दिसंबर की शाम छह बजे से सिंधी कॉलोनी से मशाल रैली यूनियन कार्बाइड कारखाने के पास गैस मूर्ति तक निकाली गई। रैली के उपरांत मूर्ति पर श्रद्धांजली भी दी गई।
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न्याय के लिए लड़ाई अब भी जारी
भोपाल गैस कांड के जिम्मेदारों को सजा दिलाने के लिए मामला आज भी अदालतों की तारीख में झूल रहा है। सुनवाई के लिए अगली तारीख छह जनवरी की दी गई है। 39 साल में पहली बार ऐसा हुआ जब आरोपी कंपनी की ओर से प्रतिनिधि कोर्ट में पक्ष रखने के लिए उपस्थित हुए थे। उन्हें इसके लिए सात बार समन भेजे गए थे। कंपनी के प्रतिनिधियों का तर्क है कि डाव केमिकल्स एक अमेरिकन कंपनी है। भारतीय कोर्ट में उस पर केस नहीं चल सकता है।
