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Cough Syrup: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का एक्शन, मध्य प्रदेश समेत तीन राज्यों और DCGI को जारी किया नोटिस
Mon, 06 Oct 2025 08:40 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Mon, 06 Oct 2025 08:40 PM IST
सार
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सख्त रुख अपनाते हुए मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों को नोटिस जारी किया है। साथ ही, भारतीय औषधि महानियंत्रक (DCGI) सहित कई केंद्रीय एजेंसियों को भी जांच के निर्देश दिए हैं।
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कफ सिरप
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कफ सिरप से कथित रूप से बच्चों की मौत के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सख्त रुख अपनाते हुए मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों को नोटिस जारी किया है। साथ ही, भारतीय औषधि महानियंत्रक (DCGI) सहित कई केंद्रीय एजेंसियों को भी जांच के निर्देश दिए हैं। NHRC ने इन राज्यों में कथित रूप से दूषित और नकली कफ सिरप के सेवन से बच्चों की जान जाने की खबरों का संज्ञान लेते हुए संबंधित राज्यों से तथ्यात्मक रिपोर्ट और तत्काल कार्रवाई की जानकारी मांगी है।
नकली दवाओं पर तत्काल रोक के निर्देश
आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य औषधि नियंत्रकों को निर्देश दिए हैं कि वे नकली दवाओं की बिक्री पर तुरंत रोक लगाएं और संबंधित रिपोर्ट सौंपें। साथ ही, CDSCO, DGHS और स्वास्थ्य मंत्रालय को भी यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि नकली दवाओं की आपूर्ति पर सख्ती से रोक लगाई जाए और उनकी जांच के लिए नमूने एकत्र कर जल्द रिपोर्ट दी जाए।
यह भी पढ़ें- दो और कफ सिरप में मिला जहरीला केमिकल, जांच में री-लाइफ और रेस्पिफ्रेश TR में पाई गई गड़बड़ी
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मध्यप्रदेश और राजस्थान में सबसे गंभीर हालात
NHRC के अनुसार, उसे मिली शिकायतों में बताया गया है कि मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा और विदिशा जिले, और राजस्थान के कुछ हिस्सों में कफ सिरप पीने से अब तक कम से कम 12 बच्चों की मौत हो चुकी है। इन मामलों को गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन की श्रेणी में रखते हुए आयोग ने कहा है कि यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह बच्चों के स्वास्थ्य और जीवन के अधिकार का घोर उल्लंघन होगा। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि राज्यों में स्थित सभी क्षेत्रीय दवा परीक्षण प्रयोगशालाएं (Drug Testing Labs) नकली या संदिग्ध दवाओं के सैंपल एकत्र करें और फॉरेंसिक परीक्षण के बाद रिपोर्ट सौंपें।
यह भी पढ़ें- कफ सिरप कांड में CM का एक्शन; मप्र के ड्रग कंट्रोलर हटाए गए, डिप्टी डायरेक्टर समेत तीन अफसर निलंबित
क्या है मामला?
हाल ही में मध्यप्रदेश फूड एंड ड्रग विभाग की रिपोर्ट में पाया गया कि कुछ कफ सिरप ब्रांड्स में मानक से कई गुना ज्यादा डायएथिलीन ग्लायकॉल (DEG) की मात्रा थी, जो कि किडनी और दिमाग को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। सबसे ज्यादा असर छोटे बच्चों पर देखा गया है, जिससे मौतें भी हुई हैं। इस मामले में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय पर भी सवाल उठ रहे हैं कि कैसे ऐसे खतरनाक सिरप बाजार में बिना सख्त जांच के पहुंच गए। आयोग की सख्ती के बाद अब केंद्र सरकार पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।
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नकली दवाओं पर तत्काल रोक के निर्देश
आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य औषधि नियंत्रकों को निर्देश दिए हैं कि वे नकली दवाओं की बिक्री पर तुरंत रोक लगाएं और संबंधित रिपोर्ट सौंपें। साथ ही, CDSCO, DGHS और स्वास्थ्य मंत्रालय को भी यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि नकली दवाओं की आपूर्ति पर सख्ती से रोक लगाई जाए और उनकी जांच के लिए नमूने एकत्र कर जल्द रिपोर्ट दी जाए।
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मध्यप्रदेश और राजस्थान में सबसे गंभीर हालात
NHRC के अनुसार, उसे मिली शिकायतों में बताया गया है कि मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा और विदिशा जिले, और राजस्थान के कुछ हिस्सों में कफ सिरप पीने से अब तक कम से कम 12 बच्चों की मौत हो चुकी है। इन मामलों को गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन की श्रेणी में रखते हुए आयोग ने कहा है कि यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह बच्चों के स्वास्थ्य और जीवन के अधिकार का घोर उल्लंघन होगा। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि राज्यों में स्थित सभी क्षेत्रीय दवा परीक्षण प्रयोगशालाएं (Drug Testing Labs) नकली या संदिग्ध दवाओं के सैंपल एकत्र करें और फॉरेंसिक परीक्षण के बाद रिपोर्ट सौंपें।
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क्या है मामला?
हाल ही में मध्यप्रदेश फूड एंड ड्रग विभाग की रिपोर्ट में पाया गया कि कुछ कफ सिरप ब्रांड्स में मानक से कई गुना ज्यादा डायएथिलीन ग्लायकॉल (DEG) की मात्रा थी, जो कि किडनी और दिमाग को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। सबसे ज्यादा असर छोटे बच्चों पर देखा गया है, जिससे मौतें भी हुई हैं। इस मामले में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय पर भी सवाल उठ रहे हैं कि कैसे ऐसे खतरनाक सिरप बाजार में बिना सख्त जांच के पहुंच गए। आयोग की सख्ती के बाद अब केंद्र सरकार पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।
