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बीयू का दीक्षांत समारोह: 85 शोधार्थियों को PHD , 27 को गोल्ड मेडल, राज्यपाल ने बताई शिक्षा की जिम्मेदारी

Fri, 18 Sep 2026 05:10 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Fri, 18 Sep 2026 05:10 PM IST
सार

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में 85 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि और 27 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया। राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने विद्यार्थियों से उपलब्धि के बाद माता-पिता, शिक्षकों और विश्वविद्यालय को न भूलने की बात कही। समारोह की थीम हरित ऊर्जा से विकसित भारत बनाने की पहल रही।

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BU Convocation: 85 scholars awarded PhDs, 27 receive gold medals; Governor highlights the responsibility of ed
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह शुक्रवार को कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित हुआ। समारोह में राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति मंगू भाई पटेल शामिल हुए। उन्होंने विद्यार्थियों को उपाधियां और स्वर्ण पदक प्रदान किए। समारोह में 85 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि और 27 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया। समारोह की थीम हरित ऊर्जा से विकसित भारत बनाने की पहल रखी गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में प्रस्तावित थे, लेकिन वे कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए।
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राज्यपाल बोले- उपलब्धि के बाद माता-पिता और गुरु को न भूलें
राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह वर्षों की मेहनत, अनुशासन और लगन का परिणाम है। उपाधि मिलने के बाद विद्यार्थियों के जीवन में नई जिम्मेदारियां और अवसर आते हैं। उन्होंने कहा कि उपलब्धि पर गर्व करने के साथ माता-पिता के त्याग और शिक्षकों के सहयोग को हमेशा याद रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज अब विद्यार्थियों के ज्ञान और प्रतिभा का सार्थक उपयोग करने की अपेक्षा करेगा। जहां भी जाएं, अपने विश्वविद्यालय और परिवार की गरिमा बढ़ाने का प्रयास करें।
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दीक्षांत के बाद विश्वविद्यालय को भूल जाते हैं
राज्यपाल ने कहा कि दीक्षांत समारोह हो गया, प्लेसमेंट अच्छा हो गया, पैसा ज्यादा हो गया और बाद में लोग सब भूल जाते हैं। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा केवल सूचना और ज्ञान हासिल करने का माध्यम नहीं है, बल्कि सत्य की खोज, चरित्र निर्माण और लोक कल्याण का रास्ता भी है। उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा का उदाहरण देते हुए कहा कि यह समानता, अनुशासन और चरित्र निर्माण पर आधारित थी। भारतीय ज्ञान परंपरा को केवल गौरव की स्मृति तक सीमित रखने के बजाय वर्तमान चुनौतियों के समाधान और भविष्य के नवाचार से जोड़ने की जरूरत है।
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बेटियों की उपलब्धि और पर्यावरण पर भी बोले
राज्यपाल ने समारोह में छात्राओं की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए इसे महिला सशक्तीकरण से भी जोड़ा। उन्होंने हरित ऊर्जा आधारित थीम का जिक्र करते हुए पर्यावरण संरक्षण की जरूरत बताई। कहा कि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन की चुनौती के बीच प्रकृति के अत्यधिक दोहन को रोकना जरूरी है। बढ़ते तापमान और पर्यावरणीय बदलावों के बीच हरित ऊर्जा की भूमिका महत्वपूर्ण है।

गोल्ड मेडल पाकर विद्यार्थियों के चेहरे खिले
समारोह में स्वर्ण पदक पाने वाले विद्यार्थियों में भी खास उत्साह रहा। शिक्षा विभाग की गोल्ड मेडलिस्ट साक्षी मेहरा ने कहा कि वह आगे पीएचडी करना चाहती हैं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के विश्वास और अपनी मेहनत को दिया। साक्षी की मां ने कहा कि वह अपनी बेटी को आगे बढ़ते देखना चाहती हैं और चाहती हैं कि वह परिवार के साथ समाज और देश के लिए भी अच्छा काम करे। आर्ट्स की गोल्ड मेडलिस्ट जीनत मंसूरी नसरुल्लागंज से समारोह में पहुंचीं। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि गोल्ड मेडल मिलेगा। पिता मुबारिक मंसूरी ने बेटी की सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि उसका सपना शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़कर देश के लिए बेहतर काम करना है। एमकॉम की गोल्ड मेडलिस्ट नैना काकर ने बताया कि करीब एक साल पहले उन्होंने गोल्ड मेडल हासिल करने का लक्ष्य तय किया था। अब लक्ष्य पूरा होने पर वह खुश हैं। उन्होंने असिस्टेंट प्रोफेसर की परीक्षा भी दी है और परिणाम का इंतजार है। इसके बाद पीएचडी करने की योजना है।


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इन संकायों के विद्यार्थियों को मिले स्वर्ण पदक
27 स्वर्ण पदक विभिन्न संकायों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को दिए गए। इनमें आर्ट्स, कॉमर्स, एजुकेशन, इंजीनियरिंग, लाइफ साइंस, मैनेजमेंट, फार्मेसी, फिजिकल एजुकेशन, साइंस और सोशल साइंस सहित अन्य संकाय शामिल हैं। कुल 27 गोल्ड मेडल में पांच प्रायोजित हैं। सीताराम जिंदल फाउंडेशन की ओर से तीन स्वर्ण पदक दिए गए। एक पदक दिलीप सूर्यवंशी ने अपने पिता की स्मृति में और एक लॉ विभागाध्यक्ष मोना पुरोहित ने अपने दिवंगत पति के.के. शुक्ल की स्मृति में प्रदान किया।



 
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