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Bhopal: BMHRC में शुरू होगा आई बैंक, 90% कार्य पूरा, कर्मचारी के प्रयास से 61 वर्षीय बुजुर्ग का हुआ नेत्रदान
Sat, 07 Sep 2024 05:16 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Sat, 07 Sep 2024 05:16 PM IST
सार
बीएमएचआरसी मे जल्द ही नेत्र बैंक की शुरुआत की जाएगी। इसका 90 प्रतिशत कार्य हो चुका है। नेत्र रोग विभाग के एक कर्मचारी नरेश तीर्थानी के अथक प्रयास से 61 वर्षीय नामदेव गायकवाड़ का नेत्रदान संभव हुआ है।
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नेत्र दान करने वाले कर्मचारी का सम्मान
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गैस पीड़ित मरीजों के लिए बनाए गए भोपाल मेमोरियल अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (बीएमएचआरसी) में जल्द ही नेत्र बैंक की शुरुआत की जाएगी। बीएमएचआरसी के नेत्र रोग विभाग में प्रोफेसर डॉ अंजली शर्मा ने बताया कि अस्पताल में जल्द ही आई बैंक शुरू हो जाएगा। 90 प्रतिशत कार्य हो चुका है। सिर्फ एक जरूरी मशीन आनी बाकी है। उम्मीद है कि बहुत जल्द आई बैंक शुरू करने की अनुमति मिल जाएगी। इधर भोपाल मेमोरियल अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (बीएमएचआरसी) में, जहां नेत्र रोग विभाग के एक कर्मचारी नरेश तीर्थानी के अथक प्रयास से स्वर्गलोकवासी 61 वर्षीय नामदेव गायकवाड़ का नेत्रदान संभव हुआ और उनकी आंखें एक अन्य जरूरतमंद दष्टिहीन व्यक्ति को प्रत्यारोपित की गईं। इस पुण्य कार्य में सहयोग देने के लिए बीएमएचआरसी द्वारा शनिवार को स्व. गायकवाड़ के परिवार को सम्मानित किया गया।
कर्मचारी के अथक प्रयास ने दो लोगों के जीवन में भर दी रोशनी
नरेश तीर्थानी ने बताया कि 4 सितंबर को सुबह 9 बजे के दरम्यान जब वे अस्पताल के मॉर्चुरी के सामने से गुजर रहे थे, उन्हें एक शव वाहन खड़ा नजर आया। उसके पास ही शोक में डूबे हुए 39 वर्षीय गौतम गायकवाड़ खड़े थे। जब गौतम से बातचीत की तो पता चला कि सुबह सुबह उनके पिता नामदेव गायकवाड़ का हार्ट से संंबंधित बीमारी के कारण निधन हुआ है और अब वह मृत शरीर को अपने घर ले जा रहे हैं। जब उनसे नेत्रदान के बारे में पूछा गया नेत्रदान तो उन्होंने ने इस बारे में अनभिज्ञता जाहिर की। नरेश ने उन्हे नेत्रदान के महत्व को समझते हुए काउंसिल किया और बताया कि इस तरह उनके पिताजी की आंखें अमर हो सकती हैं। ये आंखे कम से कम दो लोगों को प्रत्यारोपित की जा सकती हैं और उनकी जिंदगी में रोशनी ला सकती हैं। गौतम ने कहा कि वह इस बारे में अपने परिवारजनों से विमर्श करके बताएंगे।
दो अलग-अलग नेत्रहीन व्यक्तियों को किया प्रत्यारोपित
नरेश तीर्थानी ने बताया कि इस बीच नरेश ने नेत्रदान के लिए की जाने वाली औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए सेवासदन नेत्र अस्पताल में फोन किया तथा अपनी विभागाध्यक्ष डॉ हेमलता यादव को भी जानकारी दी और बीच के इस एक घंटे के समय में पुनः परिवारजनों को फोन कर काउंसिल करने समझाने की कोशिश की। इस पर स्व. गायकवाड़ के बड़े बेटे संतोष गायकवाड़ ने बड़े बुजुर्गों से सलाह मशविरा कर लगभग 15 मिनट बाद नेत्रदान के लिए तैयार हो गए। डॉ हेमलता यादव ने बताया कि समय रहते नेत्रदान हो जाए, इसके लिए हमने सेवासदन अस्पताल प्रबंधन एवं नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ प्रेरणा उपाध्याय से संपर्क किया। उनके सहयोग से सेवासदन अस्पताल की टीम 1 घंटे से भी कम समय में उनके घर पहुंच गई और दोनों नेत्रों के कॉर्निया को सुरक्षित तरीके से निकाल लिया। स्व. गायकवाड़ की दोनों आंख दो अलग-अलग नेत्रहीन व्यक्तियों को प्रत्यारोपित हो चुकी हैं।
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नेत्रदान के बारे में लोगों को और जागरूक करने की आवश्यकता
बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक डॉ मनीषा श्रीवास्तव ने बताया कि इस असाधारण कार्य के लिए नेत्र रोग विभाग बधाई का पात्र है। नेत्रदान के बारे में लोगों को और जागरूक करने की आवश्यकता है। एक प्रशिक्षित व अनुभवी टीम द्वारा नेत्र से कॉर्निया निकाला जाता है और इससे चेहरा बिल्कुल नहीं बिगड़ता। बम एचआरसी में जल्द ही नेत्र बैंक भी शुरू हो रहा है जिससे नेत्र स्टोर करना संभव हो जाएगा। नेत्रदान के जागरूकता के लिए हम अलग-अलग कार्यक्रम चला रहे हैं।
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कर्मचारी के अथक प्रयास ने दो लोगों के जीवन में भर दी रोशनी
नरेश तीर्थानी ने बताया कि 4 सितंबर को सुबह 9 बजे के दरम्यान जब वे अस्पताल के मॉर्चुरी के सामने से गुजर रहे थे, उन्हें एक शव वाहन खड़ा नजर आया। उसके पास ही शोक में डूबे हुए 39 वर्षीय गौतम गायकवाड़ खड़े थे। जब गौतम से बातचीत की तो पता चला कि सुबह सुबह उनके पिता नामदेव गायकवाड़ का हार्ट से संंबंधित बीमारी के कारण निधन हुआ है और अब वह मृत शरीर को अपने घर ले जा रहे हैं। जब उनसे नेत्रदान के बारे में पूछा गया नेत्रदान तो उन्होंने ने इस बारे में अनभिज्ञता जाहिर की। नरेश ने उन्हे नेत्रदान के महत्व को समझते हुए काउंसिल किया और बताया कि इस तरह उनके पिताजी की आंखें अमर हो सकती हैं। ये आंखे कम से कम दो लोगों को प्रत्यारोपित की जा सकती हैं और उनकी जिंदगी में रोशनी ला सकती हैं। गौतम ने कहा कि वह इस बारे में अपने परिवारजनों से विमर्श करके बताएंगे।
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दो अलग-अलग नेत्रहीन व्यक्तियों को किया प्रत्यारोपित
नरेश तीर्थानी ने बताया कि इस बीच नरेश ने नेत्रदान के लिए की जाने वाली औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए सेवासदन नेत्र अस्पताल में फोन किया तथा अपनी विभागाध्यक्ष डॉ हेमलता यादव को भी जानकारी दी और बीच के इस एक घंटे के समय में पुनः परिवारजनों को फोन कर काउंसिल करने समझाने की कोशिश की। इस पर स्व. गायकवाड़ के बड़े बेटे संतोष गायकवाड़ ने बड़े बुजुर्गों से सलाह मशविरा कर लगभग 15 मिनट बाद नेत्रदान के लिए तैयार हो गए। डॉ हेमलता यादव ने बताया कि समय रहते नेत्रदान हो जाए, इसके लिए हमने सेवासदन अस्पताल प्रबंधन एवं नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ प्रेरणा उपाध्याय से संपर्क किया। उनके सहयोग से सेवासदन अस्पताल की टीम 1 घंटे से भी कम समय में उनके घर पहुंच गई और दोनों नेत्रों के कॉर्निया को सुरक्षित तरीके से निकाल लिया। स्व. गायकवाड़ की दोनों आंख दो अलग-अलग नेत्रहीन व्यक्तियों को प्रत्यारोपित हो चुकी हैं।
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नेत्रदान के बारे में लोगों को और जागरूक करने की आवश्यकता
बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक डॉ मनीषा श्रीवास्तव ने बताया कि इस असाधारण कार्य के लिए नेत्र रोग विभाग बधाई का पात्र है। नेत्रदान के बारे में लोगों को और जागरूक करने की आवश्यकता है। एक प्रशिक्षित व अनुभवी टीम द्वारा नेत्र से कॉर्निया निकाला जाता है और इससे चेहरा बिल्कुल नहीं बिगड़ता। बम एचआरसी में जल्द ही नेत्र बैंक भी शुरू हो रहा है जिससे नेत्र स्टोर करना संभव हो जाएगा। नेत्रदान के जागरूकता के लिए हम अलग-अलग कार्यक्रम चला रहे हैं।
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