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Bhopal: आयुर्वेद की महंगी दवाओं से मिलेगा छुटकारा, प्रदेश की दूसरी आयुर्वेद फार्मेसी भोपाल में जल्द होगी शुरू
Tue, 17 Jun 2025 06:04 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Tue, 17 Jun 2025 06:04 PM IST
सार
पंडित खुशीलाल आयुर्वेद हॉस्पिटल में प्रदेश की दूसरी आयुर्वेद फार्मेसी बनाई जा रही है। उम्मीद है कि इसी साल के आखिरी महीने में यह फार्मेसी शुरू हो जाएगी। अब मरीजों को गुणवत्तापूर्ण दवाएं सस्ती दरों पर उपलब्ध होंगी।
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खुशीलाल आयुर्वेद हॉस्पिटल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोरोना काल से देश भर में आयुर्वेद दवाओं का चलन तेजी से बढ़ा है। आयुर्वेद अस्पतालों में मरीजों की भीड़ लग रही है, लेकिन आयुर्वेद दवाई काफी महंगी होने के कारण मरीज के जेब पर भारी असर पड़ता है। अब मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मरीजों को सस्ती और गुणवत्ता युक्त औषधि मिल पाएगी।
सारी प्रक्रिया एक ही परिसर में करने का प्लान
आयुर्वेद खुशीलाल मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ उमेश शुक्ला ने बताया कि फार्मेसी बानाने का उद्देश्य आयुर्वेदिक उपचार को आधुनिक तकनीकों के साथ जोड़कर ऐसा तंत्र विकसित करना है, ताकि दवाओं का निर्माण, पैकेजिंग और परीक्षण एक ही परिसर में हो। ये प्रदेश की दूसरी आयर्वेद फार्मेसी होगी। जानकारी के लिए बता दें कि इसके पहले ग्वालियर में पहली आयुर्वेदिक फार्मेसी संचालित हो रही है।
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डॉ उमेश शुक्ला ने बताया कि फार्मेसी भवन का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। हमारा लक्ष्य है कि यह यूनिट दिसंबर 2025 से पूर्ण रूप से कार्यरत हो जाए। उन्होंने बताया कि बिल्डिंग बनने के बाद हम स्टाफ की भी भर्ती करने की तैयारी कर रहे हैं। साथ ही इक्विपमेंट की खरीदी पर भी चर्चा शुरू हो चुकी है। शुक्ला ने बताया कि 434.04 लाख से फार्मेसी का निर्माण 1025 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में किया जा रहा है। फार्मेसी भवन का स्ट्रक्चर कार्य पूर्ण हो चुका है, दिसंबर तक भवन तैयार हो जाएगा। यहां अस्पताल में ही आयर्वेदिक दवाएं जैसे चर्ण, क्वाथ, तेल, घृत, आसव और अरिष्ट बनाई जाएंगी। इससे दवाओं की गुणवत्ता बेहतर होगी और मरीजों को कम दाम में उपचार मिल सकेगा।
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बाजार दर से करीब 50 प्रतिशत तक सस्ती मिलेंगी दवाएं
इस फार्मेसी में तैयार की जाने वाली दवाएं बाजार दर की तुलना में 30 से 50% तक सस्ती होंगी। यह पहल आमजन, विशेषकर गरीब और मध्यम वर्ग के रोगियों को आयुर्वेदिक चिकित्सा का सशक्त विकल्प देगी। इससे न केवल आयुर्वेद के प्रति भरोसा बढ़ेगा, बल्कि युवाओं को शोध और नवाचार के लिए प्रेरणा भी मिलेगी।
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सारी प्रक्रिया एक ही परिसर में करने का प्लान
आयुर्वेद खुशीलाल मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ उमेश शुक्ला ने बताया कि फार्मेसी बानाने का उद्देश्य आयुर्वेदिक उपचार को आधुनिक तकनीकों के साथ जोड़कर ऐसा तंत्र विकसित करना है, ताकि दवाओं का निर्माण, पैकेजिंग और परीक्षण एक ही परिसर में हो। ये प्रदेश की दूसरी आयर्वेद फार्मेसी होगी। जानकारी के लिए बता दें कि इसके पहले ग्वालियर में पहली आयुर्वेदिक फार्मेसी संचालित हो रही है।
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डॉ उमेश शुक्ला ने बताया कि फार्मेसी भवन का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। हमारा लक्ष्य है कि यह यूनिट दिसंबर 2025 से पूर्ण रूप से कार्यरत हो जाए। उन्होंने बताया कि बिल्डिंग बनने के बाद हम स्टाफ की भी भर्ती करने की तैयारी कर रहे हैं। साथ ही इक्विपमेंट की खरीदी पर भी चर्चा शुरू हो चुकी है। शुक्ला ने बताया कि 434.04 लाख से फार्मेसी का निर्माण 1025 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में किया जा रहा है। फार्मेसी भवन का स्ट्रक्चर कार्य पूर्ण हो चुका है, दिसंबर तक भवन तैयार हो जाएगा। यहां अस्पताल में ही आयर्वेदिक दवाएं जैसे चर्ण, क्वाथ, तेल, घृत, आसव और अरिष्ट बनाई जाएंगी। इससे दवाओं की गुणवत्ता बेहतर होगी और मरीजों को कम दाम में उपचार मिल सकेगा।
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बाजार दर से करीब 50 प्रतिशत तक सस्ती मिलेंगी दवाएं
इस फार्मेसी में तैयार की जाने वाली दवाएं बाजार दर की तुलना में 30 से 50% तक सस्ती होंगी। यह पहल आमजन, विशेषकर गरीब और मध्यम वर्ग के रोगियों को आयुर्वेदिक चिकित्सा का सशक्त विकल्प देगी। इससे न केवल आयुर्वेद के प्रति भरोसा बढ़ेगा, बल्कि युवाओं को शोध और नवाचार के लिए प्रेरणा भी मिलेगी।
