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Bhopal: रंगमंच नर्सरी सजी नाट्य महक से, एक तरफ दारा की भाईचारे की सीख, दूसरी तरफ खुदाई फौजदार ने दी गुदगुदाहट

Tue, 04 Mar 2025 05:07 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: अरविंद कुमार Updated Tue, 04 Mar 2025 05:07 PM IST
सार

Bhopal News: रंगमंच की नर्सरी नाट्य महक से सजी है। एक तरफ दारा की भाईचारे की सीख तो वहीं दूसरी तरफ खुदाई फौजदार ने गुदगुदाहट दी। जानिए क्या रहा खास...

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Bhopal Theatre nursery decorated with theatrical fragrance on one side Dara teachings of brotherhood
कलाकारों की प्रस्तुति - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रंगमंच की नर्सरी कहे जाने वाले झीलों के नगर भोपाल में इन दिनों मंचीय गतिविधियों का डेरा डला हुआ है। एक ही दिन में दो मंच पर चार अलग-अलग नाटकों की प्रस्तुति ने कला प्रेमियों को तृप्त किया। जहां एक तरफ लिटिल बैलेट ट्रूप दारा शिकोह की भाईचारे और सौहार्द से भरी पुकार से गूंज रहा था। वहीं, शहीद भवन में अलग-अलग तीन प्रस्तुतियों से श्रोता भावविभोर होते नजर आ रहे थे। 

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रंगश्री लिटिल बैले टुप में "नाटक दारा शिकोह" का मंचन हुआ। नाटक के लेखक मोहम्मद हसन हैं और निर्देशन प्रदीप अहिरवार द्वारा किया गया है। इसमें दारा शिकोह का किरदार अदनान खान और शाहजहां का रूपेश तिवारी ने निभाया। बता दें कि दारा शिकोह शाहजहां के सबसे बड़े बेटे थे।
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मुगल परंपरा के अनुसार, अपने पिता के बाद वह सिंहासन के उत्तराधिकारी थे। वे अपने पिता के बहुत प्रिय लड़के थे। दारा शिकोह भारत का ऐसा बादशाह बनने का सपना देख रहे थे, जो बादशाह के साथ-साथ दर्शन, सफिज्म और आध्यात्मिकता पर भी महारत रखता हो। इस्लाम के साथ उनकी हिंदू धर्म में भी गहरी रुचि थी और वो सभी धर्मों को समानता की नजर से देखते थे। नाटक के माध्यम से निर्देशक ने दारा शिकोह के नजरिए और सोच से आम लोगों को अवगत करने का प्रयास किया।
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यहां एक साथ तीन मंचन
इधर, शहीद भवन सभागार में कंटीनूअम एकेडमी द्वारा तीन कहानियों का सफल मंचन किया गया। मंचन में लेखक उदय प्रकाश की 'हीरालाल का भूत', प्रेमचन्द की कहानी 'खुदाई फ़ौजदार' और धर्मवीर भारती के लघु नाटक 'नीली झील' का नाटकीय प्रदर्शन किया गया। नाटक का निर्देशन प्रतीक शर्मा द्वारा किया गया। जहां खुदाई फौजदार ने दर्शकों को गुदगुदाया। वहीं, हीरालाल के भूत ने दर्शकों को हवेली के भूत की डरावनी किन्तु मार्मिक कहानी दिखाई। नीली झील में जीवन और आत्मा के दर्शन को तांत्रिक और आगंतुक के माध्यम से दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। तीन अलग लेखकों और उनकी अलग शैली में लिखी गई कहानियों को एक सूत्र में पिरोकर काफी मनोरंजक तरीके से प्रदर्शित किया गया।

खुदाई फ़ौजदार कहानी में प्रेमचंद ने सेठ के माध्यम से जहां सामंतवाद विचार को दिखाया। वहीं, धन के संचय और उसके चले जाने के भय को भी हास्यात्मक ढंग से पेश किया है। ठाकुरों और हवेलियों के द्वारा वर्षों से किए जा रहे शोषण को हीरालाल के भूत कहानी में दिखाया है। जहां ठाकुर साहब और पटवारी उम्र भर चुप रहने वाले हीरालाल का शोषण करते हैं, उम्र भर उसका पसीना, ज़मीन यहां तक कि उसकी बीवी की इज्जत भी लूट लेते हैं। वहीं, हीरालाल मौत के बाद अपने शोषण का बदला लेता है।


नीली झील कहानी एक चमत्कारी और रहस्यमई लोक की कहानी बताता है। जहां एक आगंतुक के आने से कईं चीजें बदल जाती हैं। कहानी में तांत्रिक और आगंतुक के संवाद समाज, आत्मा और जीवन के दर्शन से लोगों को जोड़ते हैं। असली खोज आत्मा की है, सत्य की है, इसी कथन के साथ नाटक का अंत होता है। नाटक की प्रकाश परिकल्पना प्रियम जैन द्वारा की गई थी। नाटक को अपने संगीत से जीवंत करने की जिम्मेदारी वीरेंद्र जानी ने संभाली। वहीं कहानियों का नाटकीय करण अर्शिन ख़ान द्वारा किया गया।

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