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Bhopal: एम्स भोपाल में ब्रेस्ट कैंसर पर शोध,सहज की पत्ती से ब्रेस्ट कैंसर होगा कंट्रोल, जाने क्या है यह रिसर्च

Sun, 24 Nov 2024 05:24 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Sun, 24 Nov 2024 05:24 PM IST
सार

महिलों में तेजी से बढ़ रहे ब्रेस्ट कैंसर पर एम्स भोपाल में एक अलग तरीके का शोध किया गया है। शोधकर्ता का दावा है कि सहज (Moringa) की पत्ती से ब्रेस्ट कैंसर पर कंट्रोल किया जा सकेगा। साथ यह ही लिवर और किडनी पर होने वाले नकारात्मक प्रभाव से भी बचाएगी। 

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Bhopal: Research on breast cancer in AIIMS Bhopal, breast cancer will be controlled with sahaj ki patta, know
एम्स नेिदेशक के साथ शोध करने वाली टीम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आधुनिक दौर में महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर तेजी से बढ़ रहा है। इसके इलाज के लिए ज्यादातर किमो थेरेपी का उपयोग किया जाता है। एम्स भोपाल में ब्रेस्ट कैंसर पर एक नया शोध सामने आया है जिसमें सहज (Moringa) की पत्ती से ब्रेस्ट कैंसर पर कंट्रोल किया जा सकता है। यह शोध करने वाले एम्स की टीम का कहना है कि सहजन  की पत्ति से निकाले गए कंपाउंड और कीमोथेरेपी के संयोजन से ब्रेस्ट कैंसर को अधिक तेजी से कंट्रोल कर सकते हैं। इसके साथ ही लिवर और किडनी पर होने वाले नकारात्मक प्रभाव से भी बचाती है।
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चूहों पर 15 दिन तक कैंसर को किया डेवलप
शोधकर्ता एम्स के जैव रसायन विभाग की डॉ नेहा मसारकर ने बताया कि शोध के लिए 30 इम्यून कॉमप्रोमाइ्ज्ड चुहे इंपोर्ट किए गए। इस विशेष प्रकार के चुहों को विशेष रूप से शोध के लिए तैयार किया जाता है। इन चूहों में पहले 15 दिन तक कैंसर के ट्यूमर को डेवलप किया गया। इसके बाद एक ग्रुप में सिर्फ कीमोथेरेपी और अन्य ड्रग्स से इलाज किया गया। वहीं दूसरे ग्रुप में सहजन की पत्ति से निकाले गए कंपाउंड और कीमोथेरेपी के संयोजन से इलाज किया गया। वहीं, अन्य दो ग्रुप के चुहों पर पत्ति से निकाले गए दो कंपाउंड को अलग अलग उपयोग किया गया। जिसके बाद 6 माह तक चुहों पर निगरानी रखी गई। तब यह रिजल्ट सामने आए। 
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जैव रसायन विभाग का रिसर्च
शोधकर्ता एम्स के जैव रसायन विभाग की डॉ नेहा मसारकर ने स्तन कैंसर के खिलाफ पारंपरिक कीमोथेरेपी एजेंट्स के साथ मोरिंगा ओलिफेरा के जैव सक्रिय यौगिकों के संयोजन के प्रभाव पर रिसर्च किया है। एम्स प्रबंधन द्वारा यह शोध जारी किया गया। जैव रसायन विभाग की नेहा मसारकर ने यह शोध विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. सुखेस मुखर्जी के मार्गदर्शन में किया। डॉ. मुखर्जी ने बताया कि स्तन कैंसर के खिलाफ पारंपरिक कीमोथेरेपी एजेंट्स के साथ सहजन की पत्ति से निकाले गए कंपाउंड का असर देखना था। एम्स भोपाल के डायरेक्टर डॉक्टर अजय सिंह ने कहा है कि डॉ नेहा मसारकर का यह शोध न केवल कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक नई दिशा प्रदान करता है, बल्कि यह एम्स भोपाल की वैज्ञानिक प्रगति और नवाचार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। प्राकृतिक यौगिकों और पारंपरिक उपचारों का यह संयोजन कैंसर के इलाज को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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