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Bhopal: अब पुलिस, पटवारी और शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में होगा AI का प्रयोग,परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा पर लगेगी रोक
Sat, 14 Dec 2024 07:04 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Sat, 14 Dec 2024 07:04 PM IST
सार
मध्य प्रदेश में पुलिस, पटवारी और शिक्षकों के भर्ती प्रक्रिया में फर्जीवाड़े को कम करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) तकनीकी का प्रयोग किया जाएगा। इसकी शुरुआत जनवरी 2025 में होने वाली परिक्षााओं में किया जाएगा।
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कर्मचारी चयन मंडल भोपाल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश में पुलिस पटवारी और शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़ा के चलते चर्चा का विषय बनी रहती हैं। अब इन परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) का उपयोग करेगा। इसकी तैयारी की जा रही है। एमपी ईएसबी के डायरेक्टर सकेत मालवीय ने बताया कि अभी प्रयोग के तौर पर जनवरी माह में होने वाली परीक्षाओं में एआई तकनीकी के प्रयोग करेंगे। उन्होंने बतााया कि एआइ के माध्यम से आवेदन पत्र, परीक्षा के दौरान चेहरों के मिलान और उत्तर देने में लगने वाले समय का विश्लेषण कर फर्जीवाड़े की आशंका को खत्म करने की योजना बनाई गई है। अधिकारियों ने बताया कि एआई माड्यूल चार प्रकार के डाटा का विश्लेषण कर फर्जीवाड़ा का पता लगाएगा।
परीक्षार्थियों इस तरह की जाएगी जांच
मिली जानकारी के मुताबिक इस तकनीकी के उपयोग से उम्मीदवारो की पहले चरण में आवेदन पत्रों की स्कैनिंग कर यह पता लगाया जाएगा कि किसी खास शहर में केंद्र विशेष चाहने वालों की संख्या असामान्य तो नहीं है? दूसरे चरण में माड्यूल परीक्षा के दौरान फेस रिकोग्निशन तकनीक से ऐसे लोगों की पहचान करेगा जो दूसरे के नाम पर परीक्षा देने बैठ रहे हैं। तीसरे चरण में परीक्षार्थियों द्वारा हल किए गए सवालों का विश्लेषण किया जाएगा। इसमें यह पता लगाया जाएगा कि सवाल हल करने में परीक्षार्थी को कितना समय लगा। अगर सवालों को हल करने में लगने वाला समय एक समान है या फिर असामान्य है तो इसे संदिग्ध माना जाएगा।
प्रश्नपत्र हल करने के तरीके और समय पर रखेगा नजर
एआई तकनीक से ऑनलाइन परीक्षा के दौरान ही फर्जीवाड़ा पकड़ा जाएगा। इसके जरिये सॉफ्टवेयर परीक्षार्थी के प्रश्नपत्र हल करने के तरीके और समय पर नजर रखेगा। परीक्षार्थी किस प्रश्न पर कितनी देर रुका, प्रश्नों को हल करने में कितना समय लगा, कितनी देर वह खाली बैठा रहा। इसके आधार पर संदिग्ध की पहचान होगी। अगर अभ्यर्थी सिर्फ 15 से 20 मिनट में सवालों का जवाब दे देता है तो एआई मंडल को रेड अलर्ट भेजेगा कि यहां कुछ गड़बड़ है। किसी केंद्र विशेष का बहुत से अभ्यर्थियों द्वारा विकल्प चुने जाने पर भी रेड अलर्ट भेजा जाएगा। परीक्षा की पूरी प्रक्रिया को तीन अलग-अलग एजेंसियां पूरी कराएंगी। एक एजेंसी ऑनलाइन परीक्षा कराएगी, दूसरी एजेंसी प्रश्न पत्र तैयार करके देगी और तीसरी एजेंसी एआई माड्यूल का काम संभालेगी। अभी तक परीक्षा में दो ही एजेंसियों को लगाया जाता रहा है।
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इस तरह से होगी निगरानी
1- जितने केंद्रों पर परीक्षा हो रही है। कंट्रोल रूम से उतने ही लोग निगरानी करेंगे। यानी हर केंद्र की लाइव निगरानी होगी।
2- बायोमैट्रिक आथेंटिफिकेशन और उपस्थिति दर्ज करने का काम अब परीक्षा लेने वाली एजेंसी के साथ सुरक्षा एजेंसी भी करेगी।
3- एजेंसियां परीक्षा केंद्र पर भौतिक, साइबर सुरक्षा, सर्वर, नेटवर्क सिक्योरिटी सहित गोपनीयता सुनिश्चित करेगी।
जनवरी माह में होने वाली परीक्षाओं में करेंगे प्रयोग
ईएसबी के डायरेक्टर साकेत मालवीय ने बताया कि नई नई तकनीकियों का उपयोग कर किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने का प्रयास किया जा रहा है। इसी कड़ी में एआई तकनीकी का भी प्रयोग हम शुरू करने जा रहे हैं। इसमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की आशंका को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाएगा। जनवरी माह में होने वाली परीक्षाओं में इस तकनीकी का उपयोग किया जाएगा। एआई के माध्यम से हर अभ्यर्थी की गहनता से पड़ताल की जाएगी। यह सॉफ्टवेयर के जरिए डाटा विश्लेषण कर निरीक्षण और डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करेगी।
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परीक्षार्थियों इस तरह की जाएगी जांच
मिली जानकारी के मुताबिक इस तकनीकी के उपयोग से उम्मीदवारो की पहले चरण में आवेदन पत्रों की स्कैनिंग कर यह पता लगाया जाएगा कि किसी खास शहर में केंद्र विशेष चाहने वालों की संख्या असामान्य तो नहीं है? दूसरे चरण में माड्यूल परीक्षा के दौरान फेस रिकोग्निशन तकनीक से ऐसे लोगों की पहचान करेगा जो दूसरे के नाम पर परीक्षा देने बैठ रहे हैं। तीसरे चरण में परीक्षार्थियों द्वारा हल किए गए सवालों का विश्लेषण किया जाएगा। इसमें यह पता लगाया जाएगा कि सवाल हल करने में परीक्षार्थी को कितना समय लगा। अगर सवालों को हल करने में लगने वाला समय एक समान है या फिर असामान्य है तो इसे संदिग्ध माना जाएगा।
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प्रश्नपत्र हल करने के तरीके और समय पर रखेगा नजर
एआई तकनीक से ऑनलाइन परीक्षा के दौरान ही फर्जीवाड़ा पकड़ा जाएगा। इसके जरिये सॉफ्टवेयर परीक्षार्थी के प्रश्नपत्र हल करने के तरीके और समय पर नजर रखेगा। परीक्षार्थी किस प्रश्न पर कितनी देर रुका, प्रश्नों को हल करने में कितना समय लगा, कितनी देर वह खाली बैठा रहा। इसके आधार पर संदिग्ध की पहचान होगी। अगर अभ्यर्थी सिर्फ 15 से 20 मिनट में सवालों का जवाब दे देता है तो एआई मंडल को रेड अलर्ट भेजेगा कि यहां कुछ गड़बड़ है। किसी केंद्र विशेष का बहुत से अभ्यर्थियों द्वारा विकल्प चुने जाने पर भी रेड अलर्ट भेजा जाएगा। परीक्षा की पूरी प्रक्रिया को तीन अलग-अलग एजेंसियां पूरी कराएंगी। एक एजेंसी ऑनलाइन परीक्षा कराएगी, दूसरी एजेंसी प्रश्न पत्र तैयार करके देगी और तीसरी एजेंसी एआई माड्यूल का काम संभालेगी। अभी तक परीक्षा में दो ही एजेंसियों को लगाया जाता रहा है।
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इस तरह से होगी निगरानी
1- जितने केंद्रों पर परीक्षा हो रही है। कंट्रोल रूम से उतने ही लोग निगरानी करेंगे। यानी हर केंद्र की लाइव निगरानी होगी।
2- बायोमैट्रिक आथेंटिफिकेशन और उपस्थिति दर्ज करने का काम अब परीक्षा लेने वाली एजेंसी के साथ सुरक्षा एजेंसी भी करेगी।
3- एजेंसियां परीक्षा केंद्र पर भौतिक, साइबर सुरक्षा, सर्वर, नेटवर्क सिक्योरिटी सहित गोपनीयता सुनिश्चित करेगी।
जनवरी माह में होने वाली परीक्षाओं में करेंगे प्रयोग
ईएसबी के डायरेक्टर साकेत मालवीय ने बताया कि नई नई तकनीकियों का उपयोग कर किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने का प्रयास किया जा रहा है। इसी कड़ी में एआई तकनीकी का भी प्रयोग हम शुरू करने जा रहे हैं। इसमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की आशंका को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाएगा। जनवरी माह में होने वाली परीक्षाओं में इस तकनीकी का उपयोग किया जाएगा। एआई के माध्यम से हर अभ्यर्थी की गहनता से पड़ताल की जाएगी। यह सॉफ्टवेयर के जरिए डाटा विश्लेषण कर निरीक्षण और डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करेगी।
