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Bhopal News: फार्मेसी काउंसिल का आदेश जमीन पर बेअसर,जेलों में मेल नर्स कर रहे दवा वितरण का काम,एक्ट का उल्लंघन

Thu, 09 Oct 2025 08:06 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Thu, 09 Oct 2025 08:06 PM IST
सार

मध्य प्रदेश फार्मेसी काउंसिल के आदेश का पालन जेलों में नहीं हो रहा है। कुछ वर्ष पहले जेल विभाग में 60 फार्मासिस्ट की जगह मेल नर्सों की भर्ती की गई, जो अब दवाओं का वितरण भी करते हैं। ऐसे में यह फार्मेसी एक्ट की धारा 42 का उल्लंघन है।

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Bhopal News: Pharmacy Council's order ineffective on the ground, male nurses distributing medicines in jails,
फार्मेसी काउंसिल भोपाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश में कफ सिरप से लगातार हो रही बच्चों की मौत के बाद मध्य प्रदेश फार्मेसी काउंसिल द्वारा फार्मेसी एक्ट 1948 की धारा 42 के तहत एक आदेश जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है कि दवाओं से संबंधित कोई भी कार्य केवल पंजीकृत फार्मासिस्ट द्वारा ही किया जा सकता है। गैर-पंजीकृत व्यक्ति अगर ऐसा करते पाए जाते हैं, तो इस प्रावधान के तहत आरोपी को तीन महीने की जेल, दो लाख रुपए जुर्माना या दोनों ही सजा दी जा सकती है। हालांकि, इस आदेश के वास्तविक क्रियान्वयन को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। जमीनी हकीकत यह है कि प्रदेश के जेल विभाग में यह नियम वर्षों से दरकिनार किया जा रहा है।
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मेल नर्स कर रहे दवा वितरण
जानकारी के अनुसार, कुछ वर्ष पहले जेल विभाग में 60 फार्मासिस्ट की जगह मेल नर्सों की भर्ती की गई, जो अब फार्मेसी से जुड़ा समस्त कार्य कर रहे हैं। ऐसे में यह स्पष्ट रूप से फार्मेसी एक्ट की धारा 42 का उल्लंघन है, जिसमें गैर-पंजीकृत व्यक्ति द्वारा दवा वितरण या फार्मेसी का कोई भी कार्य प्रतिबंधित है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या कि फार्मेसी काउंसिल इस आदेश का पालन सुनिश्चित करने के लिए सिर्फ निजी संस्थानों तक सीमित रहेगी या फिर शासकीय विभागों जैसे जेल, स्वास्थ्य उपकेंद्र आदि में भी इस पर कार्रवाई करेगी?
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नियमों का सख्ती से हो पालन
इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन, मध्यप्रदेश ने मांग की है कि प्रदेशभर में जहां भी गैर-फार्मासिस्ट से फार्मेसी कार्य कराया जा रहा है, वहां फार्मेसी एक्ट 1948 की धारा 42 के तहत तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही, सभी शासकीय संस्थानों में पंजीकृत फार्मासिस्ट की नियुक्ति अनिवार्य की जाए। प्रदेश अध्यक्ष, इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन अंबर चौहान ने कहा है कि जेल विभाग में मेल नर्सों से दवा वितरण करवाया जा रहा है, जो फार्मेसी एक्ट का सीधा उल्लंघन है। यदि गैर-पंजीकृत व्यक्ति दवा बांटते हैं, तो फार्मेसी काउंसिल को कार्रवाई करनी चाहिए। चाहे वह विभाग कोई भी हो। हम चाहते हैं कि छिंदवाड़ा जैसी घटनाएं दोबारा न हों और हर स्तर पर एक्ट का पालन सुनिश्चित किया जाए।
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डॉक्टरों की कमी के कारण वह बदलाव
डीआईजी जेल संजय पाण्डेय ने बताया कि आवश्यकता के अनुसार फार्मासिस्ट की जगह 60 पोस्ट पर मेल नर्स की भर्ती की गई थी, क्योंकि नर्स ज्यादा उपयोगी होता है, हमारे यहां डॉक्टरों की कमी है, इसलिए मेल नसों को प्राथमिकता दी गई थी। हालांकि हमारे यहां 60 पोस्ट फार्मासिस्ट की भी है कई जगह फार्मासिस्ट ही दावओं का वितरण करते हैं।  

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जहां भी गड़बड़ होगी करेंगे कार्रवाई 
फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष संजय जैन ने कहा है कि हमने जो आदेश निकाला है, उसमें चाहे सरकारी हो या प्राइवेट जिन भी संस्थाओं में गड़बड़ी पाई जाएगी वहां कार्रवाई की जाएगी। अगर हमें जेल से शिकायत मिलती है तो हम वहां भी कार्रवाई करेंगे।
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