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Bhopal News : मशहूर साहित्यकार जिया फारूखी का इंतकाल, बड़ा बाग कब्रिस्तान में किया सुपुर्द ए खाक
Tue, 12 Nov 2024 04:35 PM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Tue, 12 Nov 2024 04:35 PM IST
सार
वे शायर और साहित्यकार अच्छे थे या इंसान बेहतर थे, यह तय किया जाना थोड़ा मुश्किल है। बुजुर्गियत की उम्र से भी आगे निकल चुके थे लेकिन उनकी सक्रियता इस बात पर यकीन करने की इजाजत नहीं देती थी। शहर की कमोबेश हर साहित्यिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधि में पूरे जोश के साथ मौजूद रहना उनकी खासियतों में शामिल था।
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मशहूर साहित्यकार जिया फारूखी का इंतकाल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मंगलवार सुबह जब शायर और साहित्यकार जिया फारूखी के इंतकाल की खबर सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो लोग इस पर आसानी से यकीन नहीं कर पाए। कुछ दिन पहले मुलाकात होने का जिक्र करते हुए डॉ. नजर मेहमूद ने जब इस खबर को सुना तो यकीन नहीं किया। उन्होंने बताया कि चंद दिनों पहले जिस सेहत, तंदुरुस्ती और सक्रियता के साथ वे नजर आए थे, उसके मुताबिक तो यह खबर काबिल ए यकीन नहीं लग रही लेकिन उन्होंने अल्लाह के फैसले को सबसे आगे मानते हुए उनकी मगफिरत की दुआ की।
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कई कार्यक्रमों और कई बार महज मुलाकात के लिए भी साथ रहने वाले डॉ. महताब आलम की जिया फारूखी से एक रात पहले ही लंबी टेलीफोनिक चर्चा हुई थी। रिटायर्ड डीजीपी एम.डब्ल्यू. अंसारी ने जिया फारूखी के इंतकाल की खबर से लोगों को सोशल मीडिया के मार्फत अवगत कराया। दोपहर को कोह ए फिजा स्थित उनके निवास से जिया फारूखी का आखिरी सफर शुरू हुआ, जिसकी नमाज ए जनाजा सैफिया रोड शेड पर अदा की गई, इसके बाद उन्हें बड़ा बाग कब्रिस्तान में सुपुर्द ए खाक किया गया।
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डॉ अंजुम बाराबंकवी, इकबाल मसूद, सैयद इफ्तिखार अली समेत शहर के साहित्यिक और मुशायरा मंच से ताल्लुक रखने वाले लोग बड़ी तादाद में उन्हें खिराज ए अकीदत पेश करने पहुंचे थे। जिया फारूखी साहित्य संसार का चर्चित, जाना-पहचाना और मकबूल नाम रहा है। मुंशी हुसैन खां टेक्निकल इंस्टीट्यूट में दी गई उनकी सेवाएं भी हमेशा याद रखी जाएंगी।
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