{"_id":"688510e51e8b64d16c041e53","slug":"bhopal-news-cpim-objected-to-the-advice-of-policemen-to-read-ramcharitmanas-demanded-action-against-adg-2025-07-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bhopal: CPIM ने पुलिसकर्मियों को रामचरितमानस पाठ की सलाह पर जताई आपत्ति, कहा- यह संविधान की मूल भावना के खिलाफ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bhopal: CPIM ने पुलिसकर्मियों को रामचरितमानस पाठ की सलाह पर जताई आपत्ति, कहा- यह संविधान की मूल भावना के खिलाफ
Sat, 26 Jul 2025 11:01 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Sat, 26 Jul 2025 11:01 PM IST
सार
Bhopal News: सीपीआई (एम) के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने कहा कि यह कदम भारत के संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता की भावना को आहत करता है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षुओं में सभी धर्मों के लोग शामिल होते हैं, ऐसे में किसी एक धार्मिक ग्रंथ के पाठ को प्रोत्साहित करना सांप्रदायिक एजेंडा थोपने जैसा है।
विज्ञापन
पुलिस प्रशिक्षण के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) राजा बाबू सिंह
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
रामचरितमानस को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। इस बार मामला मध्यप्रदेश पुलिस के प्रशिक्षण से जुड़ा है, जहां अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) राजा बाबू सिंह ने प्रशिक्षु आरक्षकों को रामचरितमानस का पाठ करने की सलाह दी। उनका कहना था कि इससे घर की याद (होमसिकनेस) दूर करने और नैतिक मूल्यों की शिक्षा प्राप्त करने में मदद मिलेगी। हालांकि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे संविधान की धर्मनिरपेक्ष आत्मा के खिलाफ बताया है और एडीजी पर कार्रवाई की मांग की है।
विज्ञापन
रामचरितमानस के पाठ की सलाह, लेकिन अनिवार्यता नहीं
जानकारी के मुताबिक, बुधवार को प्रदेश के आठ पुलिस प्रशिक्षण स्कूलों में करीब 4,000 नए पुलिसकर्मियों के लिए नौ माह का बुनियादी प्रशिक्षण प्रारंभ हुआ। इस अवसर पर 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी राजा बाबू सिंह ने प्रशिक्षुओं से कहा कि उन्हें श्रीराम के जीवन और गुणों से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने सभी प्रशिक्षण स्कूलों के प्रमुखों को सलाह दी कि प्रत्येक रात सोने से पहले श्रीरामचरितमानस के एक या दो अध्याय सामूहिक रूप से पढ़े जाएं। हालांकि बाद में एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह कोई अनिवार्य अभ्यास नहीं है और अन्य धर्मों के प्रशिक्षुओं को इसमें भाग लेने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें- Ratlam: प्रेमिका से मिलने पहुंचे युवक की पीट-पीट कर हत्या, बाल काटकर किया था अपमानित; परिजनों ने किया चक्काजाम
विज्ञापन
सीपीआई (एम) ने बताया संविधान के मूल स्वरूप पर हमला
सीपीआई (एम) के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह कदम भारत के संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता की भावना को आहत करता है। उनका कहना है कि प्रशिक्षुओं में सभी धर्मों के लोग शामिल होते हैं, ऐसे में किसी एक धार्मिक ग्रंथ के पाठ को प्रोत्साहित करना सांप्रदायिक एजेंडा थोपने जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी बीजेपी और आरएसएस की नजरों में अच्छा बनने और रिटायरमेंट के बाद लाभ पाने के लिए संविधान की मूल भावना से खिलवाड़ कर रहे हैं। पार्टी ने इसे पुलिस बल का सांप्रदायिकरण करने की साजिश करार दिया और डीजीपी से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
‘संस्कृति और मूल्यों की सीख है रामचरितमानस’
एडीजी राजा बाबू सिंह ने कहा कि श्रीरामचरितमानस एक ज्ञान का भंडार है, जो आदर्श जीवन मूल्यों की दिशा दिखाता है। उनके अनुसार, इसमें जीवन में अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा, निस्वार्थ सेवा और त्याग की सीख मिलती है, जो पुलिस सेवा जैसे जिम्मेदारी वाले कार्यक्षेत्र में अत्यंत आवश्यक है।
यह भी पढ़ें- Burhanpur News: बुरहानपुर में साढ़े चार साल की बच्ची से दुष्कर्म, आरोपी गिरफ्तार
